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गुरु भक्ति और प्रेम ही आत्मा का सच्चा आहार : अनमोलानंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। काटजू नगर किला में शनिवार को आनंद परिवार की ओर से संत समागम का आयोजन किया गया। इसमें सुबह 11 बजे गुरु आरती पूजा करने के बाद काटजू नगर की श्री आनंदपुर कुटिया की बाईजी ने गुरुओं के प्रवचनों को साध संगत को सुनाया।
इसमें मध्यप्रदेश के श्री आनंदपुर धाम से पधारे महात्मा परम अनमोलानंद महाराज ने कहा कि संसार में आने से पहले जीव प्रभु से वादा करके आया था कि वह नामजप करेगा और संसार में जाकर प्रभु भक्ति करके अपने जीवन को भवसागर पार करेगा।
लेकिन संसार में आकर वह मोह माया के बंधन में बंध कर प्रभु भक्ति को भूल गया। गुरु भक्ति व प्रेम ही आत्मा का सच्चा आहार है, यही हमें संसार के दुखों से मुक्त करता है। प्रेम हमें अपने और दूसरों के बीच की दूरी को मिटाकर एकता का अनुभव कराता है और जब तक हम दूसरों के लिए प्रेम नहीं कर सकते तब तक हम सच्चे प्रेम को नहीं समझ सकते। वास्तव में तो ईश्वर से प्रेम करना सबसे बड़ा तप है क्योंकि वह प्रेम हमें अपने भीतर की शांति और शक्ति से जोड़ता है। प्रेम वह दिव्य शक्ति है जो सबको एक सूत्र में बांधती है।
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सच्चा प्रेम न दिखावा करता है न कोई अपेक्षाएं रखता है, यह बस शुद्ध और निरंतर होता है। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छे कर्म करो मरने के बाद स्वर्ग में जाओगे, सुबह शाम प्रभु का नाम लिया करो स्वर्ग में सुख पाओगे, तो उन्होंने कहा आनंदपुर धाम जाओ जीते जी स्वर्ग देख पाओगे और सतगुरु के सामने दरबार में बैठ जाओ स्वर्ग को ही भूल जाओगे। प्रवचनों के बाद भंडारा लगाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद रूपी भंडारा ग्रहण किया।
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तरावड़ी। काटजू नगर किला में शनिवार को आनंद परिवार की ओर से संत समागम का आयोजन किया गया। इसमें सुबह 11 बजे गुरु आरती पूजा करने के बाद काटजू नगर की श्री आनंदपुर कुटिया की बाईजी ने गुरुओं के प्रवचनों को साध संगत को सुनाया।
इसमें मध्यप्रदेश के श्री आनंदपुर धाम से पधारे महात्मा परम अनमोलानंद महाराज ने कहा कि संसार में आने से पहले जीव प्रभु से वादा करके आया था कि वह नामजप करेगा और संसार में जाकर प्रभु भक्ति करके अपने जीवन को भवसागर पार करेगा।
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लेकिन संसार में आकर वह मोह माया के बंधन में बंध कर प्रभु भक्ति को भूल गया। गुरु भक्ति व प्रेम ही आत्मा का सच्चा आहार है, यही हमें संसार के दुखों से मुक्त करता है। प्रेम हमें अपने और दूसरों के बीच की दूरी को मिटाकर एकता का अनुभव कराता है और जब तक हम दूसरों के लिए प्रेम नहीं कर सकते तब तक हम सच्चे प्रेम को नहीं समझ सकते। वास्तव में तो ईश्वर से प्रेम करना सबसे बड़ा तप है क्योंकि वह प्रेम हमें अपने भीतर की शांति और शक्ति से जोड़ता है। प्रेम वह दिव्य शक्ति है जो सबको एक सूत्र में बांधती है।
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सच्चा प्रेम न दिखावा करता है न कोई अपेक्षाएं रखता है, यह बस शुद्ध और निरंतर होता है। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छे कर्म करो मरने के बाद स्वर्ग में जाओगे, सुबह शाम प्रभु का नाम लिया करो स्वर्ग में सुख पाओगे, तो उन्होंने कहा आनंदपुर धाम जाओ जीते जी स्वर्ग देख पाओगे और सतगुरु के सामने दरबार में बैठ जाओ स्वर्ग को ही भूल जाओगे। प्रवचनों के बाद भंडारा लगाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद रूपी भंडारा ग्रहण किया।