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जीटी पर हादसों में चार साल में 373 लोगों की मौत
करनाल
Updated Fri, 07 Feb 2014 12:15 AM IST
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नेशनल हाईवे का सफर लोगों के लिए जानलेवा होता जा रहा है। हाईवे पर चल रहा निर्माण कार्य, क्रॉसिंग पर रेडलाइट न होना और अवैज्ञानिक कटों के चलते हर तीसरे दिन एक व्यक्ति अपनी जान गवा रहा है।
बीते चार साल में पौने चार सौ लोग जीटी रोड पर मौत का शिकार हो चुके हैं। ये आंकड़ा मात्र करनाल जिले में लगने वाले नेशनल हाईवे के क्षेत्र का है। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा द्वारा आरटीआई के तहत ली गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है।
इसके मुताबिक पिछले चार सालों के दौरान जीटी रोड पर अकेले करनाल में 343 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 373 लोगाें की जान जा चुकी है और 657 लोग घायल हो चुके हैं। जीटी रोड को पानीपत से लेकर जालंधर तक सिक्स लेन बनाने का प्रोजेक्ट सोमा कंपनी को दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही सरकार ने प्रदेश में खनन पर पाबंदी लगा दी। जिस कारण निर्माण कंपनी सोमा और प्रदेश सरकार के बीच विवाद पैदा हो गया। बताया जा रहा है कि यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा है।
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वर्ष 2011 में होना था पूरा काम
नेशनल हाईवे और सोमा कंपनी के बीच हुए समझौते के अनुसार पानीपत से अमृतसर तक जीटी रोड को सिक्स लेन बनाने का अनुबंध हुआ था। जिसकी लागत 2746.55 करोड़ रुपये थी। यह प्राजेक्ट 11 मई 2009 को शुरू हो कर 11 नवंबर 2011 को पूरा होना था, लेकिन उसके बाद भी इसका निर्माण पूरा करने के लिए कई बार समय सीमा बढ़ाई गई।
प्रशासनिक प्रबंध भी पडे़ अधूरे
जीटी रोड पर प्रशासनिक प्रबंध भी पूरे नहीं है। जीटी रोड पर बनाए गए कुछ कट भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। कटों पर न तो लाल बत्ती लगी है और न ही जीटी रोड पर सफेद पट्टी है, जिस कारण वाहन चालकों को भारी परशानी का सामना करना पड़ता है।
एक जनवरी 2010 से 25 जनवरी 2014 तक जीटी रोड पर करनाल सीमा के भीतर 343 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी है। जिनमें 373 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 657 घायल हो चुके हैं। इसलिए इस मार्ग के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार काम होना चाहिए।
-एडवोकेट राजेश शर्मा आरटी आई कार्यकर्ता करनाल।
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बीते चार साल में पौने चार सौ लोग जीटी रोड पर मौत का शिकार हो चुके हैं। ये आंकड़ा मात्र करनाल जिले में लगने वाले नेशनल हाईवे के क्षेत्र का है। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा द्वारा आरटीआई के तहत ली गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है।
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इसके मुताबिक पिछले चार सालों के दौरान जीटी रोड पर अकेले करनाल में 343 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 373 लोगाें की जान जा चुकी है और 657 लोग घायल हो चुके हैं। जीटी रोड को पानीपत से लेकर जालंधर तक सिक्स लेन बनाने का प्रोजेक्ट सोमा कंपनी को दिया गया था, लेकिन कुछ समय बाद ही सरकार ने प्रदेश में खनन पर पाबंदी लगा दी। जिस कारण निर्माण कंपनी सोमा और प्रदेश सरकार के बीच विवाद पैदा हो गया। बताया जा रहा है कि यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा है।
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वर्ष 2011 में होना था पूरा काम
नेशनल हाईवे और सोमा कंपनी के बीच हुए समझौते के अनुसार पानीपत से अमृतसर तक जीटी रोड को सिक्स लेन बनाने का अनुबंध हुआ था। जिसकी लागत 2746.55 करोड़ रुपये थी। यह प्राजेक्ट 11 मई 2009 को शुरू हो कर 11 नवंबर 2011 को पूरा होना था, लेकिन उसके बाद भी इसका निर्माण पूरा करने के लिए कई बार समय सीमा बढ़ाई गई।
प्रशासनिक प्रबंध भी पडे़ अधूरे
जीटी रोड पर प्रशासनिक प्रबंध भी पूरे नहीं है। जीटी रोड पर बनाए गए कुछ कट भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। कटों पर न तो लाल बत्ती लगी है और न ही जीटी रोड पर सफेद पट्टी है, जिस कारण वाहन चालकों को भारी परशानी का सामना करना पड़ता है।
एक जनवरी 2010 से 25 जनवरी 2014 तक जीटी रोड पर करनाल सीमा के भीतर 343 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी है। जिनमें 373 लोगों की मौत हो चुकी हैं और 657 घायल हो चुके हैं। इसलिए इस मार्ग के निर्माण के लिए प्राथमिकता के आधार काम होना चाहिए।
-एडवोकेट राजेश शर्मा आरटी आई कार्यकर्ता करनाल।