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434 गांवों का राजस्व रिकार्ड हुआ डिजिटल, पांच मिनट में ले सकेंगे प्रति
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प्रदेश में आयोजित किए जा रहे छठे सुशासन दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से करनाल वासियों को डिजिटल सेवा की एक नई सौगात उपलब्ध करवाई गई है। जिले के सभी 434 गांवों के सभी पटवार सर्कलों का डिजिटल राजस्व रिकार्ड तैयार किया गया है और इस रिकार्ड की हार्ड कापी के रखरखाव के लिए भी आधुनिक और सुरक्षित प्रणाली अपनाई गई है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व पंडित मदनमोहन मालवीय की जंयती के अवसर पर इस सुविधा का उद्घाटन कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सिंह सैनी ने किया।
नायब सिंह सैनी ने जिला प्रशासन की इस नई पहल की सराहना की और कहा कि इससे आम व्यक्ति को एक बड़ी राहत मिलेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को और अधिक बल मिलेगा। उन्होंने इस आधुनिक और डिजिटल रिकार्ड रूम की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली और मौके पर उपस्थित गांव कैलाश के आवेदक विजेंद्र कुमार को इस नई व्यवस्था के तहत उसकी भूमि के रिकार्ड की प्रति भी प्रदान की।
रखरखाव की व्यवस्था
स्टील की पेटियाें में बार कोड व्यवस्था से रखा गया रिकार्ड
उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राजस्व रिकार्ड के रखने की पुरानी तकनीक से संबंधित व्यक्ति को जानकारी देने की प्रक्रिया काफी लंबी और पेचीदा थी। इसके साथ-साथ रिकार्ड का उचित रख-रखाव न होने के कारण कुछ समय उपरांत दस्तावेज खस्ताहाल में आ जाते थे और ऐसे दस्तावेजों की प्राकृतिक आपदाओं के समय भी नष्ट होने की संभावना अधिक रहती थी। अब नई व्यवस्था के तहत पूरे रिकार्ड को स्कैन करके डिजिटल रिकार्ड तैयार किया गया है। मूल प्रतियों के रख रखाव के लिए कपडे़ के बंडल बनाने की बजाय स्टील की पेटियों में सुरक्षित रखा गया है। इन पेटियों पर बार कोड भी लगाया गया है। यह कोड लगने से डिजिटल सुविधा के माध्यम से तुरंत यह पता लगाया जा सकता है कि किस भूमि मालिक के रिकार्ड के दस्तावेज किस पेटी में सुरक्षित है। यहीं नहीं रिकार्ड रूम की सुरक्षा की दृष्टि से बायोमेट्रिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसके तहत केवल वहीं कर्मचारी रिकार्डरूम में प्रवेश कर पाएंगे जिन्हें रिकार्ड रूम में जाने के लिए अधिकृत किया गया है। इनके अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति रिकार्ड रूम में प्रवेश नहीं कर पाएगा। रिकार्ड के रखरखाव की इस आधुनिक व्यवस्था से अब रिकार्ड के गलने और फट जाने की संभावना भी समाप्त हो गई है।
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उर्दू पढ़ने वालों की नहीं रहेगी जरूरत
डीसी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत भूमि रिकार्ड की नकल प्राप्त करने के कार्य में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी पूरी तरह अंकुश लगेगा। राजस्व रिकार्ड को डिजिटल बनाते समय उर्दू में उपलब्ध रिकार्ड के लिए विशेष तौर पर उर्दू पढ़ने व समझने वाले लोगों का सहयोग लिया जाएगा। अब ऐसे रिकार्ड पर बार कोडिंग होने से बार-बार उर्दू पढ़ने वाले लोगों की मदद लेने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। केवल डिजिटल रिकार्ड में व्यक्ति के नाम के साथ बार कोड के सहयोग से ही ऐसे दस्तावेजों को आसानी से ढूंढा जा सकेगा।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद, एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक, नगराधीश अमरेंद्र सिंह, जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल, तहसीलदार राजबख्श, पंचायती राज विभाग के अधीक्षक अभियंता रामफल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर खुंडिया, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला बैरागी, भाजपा नेता अशोक सुखीजा, योगेंद्र राणा, राजबीर शर्मा, शमशेर नैन, वीर विक्त्रस्म कुमार, प्रवीण लाठर, जगदेव पाढ़ा उपस्थित रहे।
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नायब सिंह सैनी ने जिला प्रशासन की इस नई पहल की सराहना की और कहा कि इससे आम व्यक्ति को एक बड़ी राहत मिलेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरंभ किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को और अधिक बल मिलेगा। उन्होंने इस आधुनिक और डिजिटल रिकार्ड रूम की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली और मौके पर उपस्थित गांव कैलाश के आवेदक विजेंद्र कुमार को इस नई व्यवस्था के तहत उसकी भूमि के रिकार्ड की प्रति भी प्रदान की।
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रखरखाव की व्यवस्था
स्टील की पेटियाें में बार कोड व्यवस्था से रखा गया रिकार्ड
उपायुक्त विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राजस्व रिकार्ड के रखने की पुरानी तकनीक से संबंधित व्यक्ति को जानकारी देने की प्रक्रिया काफी लंबी और पेचीदा थी। इसके साथ-साथ रिकार्ड का उचित रख-रखाव न होने के कारण कुछ समय उपरांत दस्तावेज खस्ताहाल में आ जाते थे और ऐसे दस्तावेजों की प्राकृतिक आपदाओं के समय भी नष्ट होने की संभावना अधिक रहती थी। अब नई व्यवस्था के तहत पूरे रिकार्ड को स्कैन करके डिजिटल रिकार्ड तैयार किया गया है। मूल प्रतियों के रख रखाव के लिए कपडे़ के बंडल बनाने की बजाय स्टील की पेटियों में सुरक्षित रखा गया है। इन पेटियों पर बार कोड भी लगाया गया है। यह कोड लगने से डिजिटल सुविधा के माध्यम से तुरंत यह पता लगाया जा सकता है कि किस भूमि मालिक के रिकार्ड के दस्तावेज किस पेटी में सुरक्षित है। यहीं नहीं रिकार्ड रूम की सुरक्षा की दृष्टि से बायोमेट्रिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसके तहत केवल वहीं कर्मचारी रिकार्डरूम में प्रवेश कर पाएंगे जिन्हें रिकार्ड रूम में जाने के लिए अधिकृत किया गया है। इनके अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति रिकार्ड रूम में प्रवेश नहीं कर पाएगा। रिकार्ड के रखरखाव की इस आधुनिक व्यवस्था से अब रिकार्ड के गलने और फट जाने की संभावना भी समाप्त हो गई है।
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उर्दू पढ़ने वालों की नहीं रहेगी जरूरत
डीसी ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत भूमि रिकार्ड की नकल प्राप्त करने के कार्य में न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी पूरी तरह अंकुश लगेगा। राजस्व रिकार्ड को डिजिटल बनाते समय उर्दू में उपलब्ध रिकार्ड के लिए विशेष तौर पर उर्दू पढ़ने व समझने वाले लोगों का सहयोग लिया जाएगा। अब ऐसे रिकार्ड पर बार कोडिंग होने से बार-बार उर्दू पढ़ने वाले लोगों की मदद लेने की आवश्यकता नहीं पडे़गी। केवल डिजिटल रिकार्ड में व्यक्ति के नाम के साथ बार कोड के सहयोग से ही ऐसे दस्तावेजों को आसानी से ढूंढा जा सकेगा।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष जगमोहन आनंद, एसडीएम नरेंद्र पाल मलिक, नगराधीश अमरेंद्र सिंह, जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल, तहसीलदार राजबख्श, पंचायती राज विभाग के अधीक्षक अभियंता रामफल, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजबीर खुंडिया, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला बैरागी, भाजपा नेता अशोक सुखीजा, योगेंद्र राणा, राजबीर शर्मा, शमशेर नैन, वीर विक्त्रस्म कुमार, प्रवीण लाठर, जगदेव पाढ़ा उपस्थित रहे।