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शहर में नहीं सरकारी जमीन, इसलिए गांवों में शुरू हो रही परियोजनाएं
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:35 AM IST
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शहर में शामलात जमीन न होने कारण प्रदेश सरकार ने मजबूरन कई परिजनाएं शहर के आसपास के क्षेत्रों में देनी पड़ रही है। इसका ताजा उदाहरण हाईवे पर स्थित बसताड़ा की पंचायती जमीन में आईटीआई की सौगात देना है। शहर में जो भी शामलात जमीन है, उन पर सरकार किसी भी भवन का निर्माण करने में सक्षम नहीं है, क्योंकि अधिकतर जमीनों के मामले न्यायालय में विचाराधीन है। इस कारण शहर के लोगों को कई और सौगातों से महरूम रहना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुटेल में स्थित कल्याण फार्म हाउस पर आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन में हालांकि, आईटीआई घरौंडा विधानसभा क्षेत्र में बनाने की घोषणा कर दी थी, लेकिन साथ ही यह भी घोषणा की थी कि जो ग्राम पंचायत इसके लिए जमीन देगी, उसी गांव में आईटीआई का निर्माण कराया जाएगा।
इसके लिए कई पंचायतों ने आईटीआई के लिए सरकार को जमीन देने की सहमति जताई थी, लेकिन गांव बसताड़ा की पंचायत ने ग्राम सभा की एक बैठक में सरकार को किसी भी सरकारी भवन बनाने के लिए 60 एकड़ जमीन देने का फैसला लिया है। इसका प्रपोजल प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था।
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इसके बाद सरकार ने हाईवे पर स्थित गांव बसताडा की छह एकड़ जमीन में सरकार ने आईटीआई बनाने का फैसला ले लिया है। शहर में शामलात जमीन न होने के कारण सरकार ने कई परियोजनाओं के फैसले शहर के आसपास में लेने पड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार की और सें कई परियोजनाएं बनने वाली है, इसलिए शहर में शामलात जमीन न होने के कारण सरकार का रुझान शहर के आसपास क्षेत्र में बन सकता है।
शामलात जमीन पर चल रहे हैं मामले
शहर के अधिकतर जमीनों पर न्यायालय में मामले विचाराधीन है। न्यायालय में मामले चलने के सरकार को काफी दिक्कतें आ रही है। न्यायालय से मामले निपटने के बाद ही सरकार शहर में किसी प्रकार की सरकारी भवन का निर्माण कर सकती है। लोगों का मानना है कि कई वर्षों पूर्व शहर में एक राजकीय महाविद्यालय का निर्माण किया गया था। शहर से हटकर कालेज ग्रामीण क्षेत्र में होने से युवाओं का कालेज की और रुझान नहीं बन पाया है। इससे छात्र व छात्राएं पढ़ने के लिए करनाल व पानीपत जा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुटेल में स्थित कल्याण फार्म हाउस पर आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन में हालांकि, आईटीआई घरौंडा विधानसभा क्षेत्र में बनाने की घोषणा कर दी थी, लेकिन साथ ही यह भी घोषणा की थी कि जो ग्राम पंचायत इसके लिए जमीन देगी, उसी गांव में आईटीआई का निर्माण कराया जाएगा।
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इसके लिए कई पंचायतों ने आईटीआई के लिए सरकार को जमीन देने की सहमति जताई थी, लेकिन गांव बसताड़ा की पंचायत ने ग्राम सभा की एक बैठक में सरकार को किसी भी सरकारी भवन बनाने के लिए 60 एकड़ जमीन देने का फैसला लिया है। इसका प्रपोजल प्रदेश सरकार को भेज दिया गया था।
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इसके बाद सरकार ने हाईवे पर स्थित गांव बसताडा की छह एकड़ जमीन में सरकार ने आईटीआई बनाने का फैसला ले लिया है। शहर में शामलात जमीन न होने के कारण सरकार ने कई परियोजनाओं के फैसले शहर के आसपास में लेने पड़ रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार की और सें कई परियोजनाएं बनने वाली है, इसलिए शहर में शामलात जमीन न होने के कारण सरकार का रुझान शहर के आसपास क्षेत्र में बन सकता है।
शामलात जमीन पर चल रहे हैं मामले
शहर के अधिकतर जमीनों पर न्यायालय में मामले विचाराधीन है। न्यायालय में मामले चलने के सरकार को काफी दिक्कतें आ रही है। न्यायालय से मामले निपटने के बाद ही सरकार शहर में किसी प्रकार की सरकारी भवन का निर्माण कर सकती है। लोगों का मानना है कि कई वर्षों पूर्व शहर में एक राजकीय महाविद्यालय का निर्माण किया गया था। शहर से हटकर कालेज ग्रामीण क्षेत्र में होने से युवाओं का कालेज की और रुझान नहीं बन पाया है। इससे छात्र व छात्राएं पढ़ने के लिए करनाल व पानीपत जा रहे हैं।