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Karnal News: सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर युवतियां बन रही आत्मनिर्भर
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले की युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला बाल कल्याण परिषद के बाल भवन में सिलाई व फैशन डिजाइनिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। केंद्रों में छह महीने व एक साल के कोर्स सिखाए जाते हैं, जिनमें बदलता हर ट्रेंड युवतियों को सिखाया जाता है।
कार्यक्रम के तहत कम फीस में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में सिलाई, डिजाइनिंग, पैटर्न कटिंग और डाई करने का कौशल सिखाया जाता है। केंद्र में युवतियों को हर प्रकार के ट्रेडिंग व पारंपरिक परिधानों की डिजाइनिंग कर उन्हें सिलने की कला सिखाई जाती है। प्रशिक्षक पूनम ने बताया कि वह पिछले छह साल से केंद्र में युवतियों को प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि युवतियों में हाथ का हुनर जरूर होना चाहिए, जिसमें सिलाई सबसे जरूरी काैशल माना जाता है। इसलिए हर लड़की को सिलाई जरूर सिखनी चाहिए। केंद्र में 35 से 40 युवतियां सिलाई सीखने के लिए आ रही हैं, जिसमें उन्हें दो बैच में प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिला बाल कल्याण अधिकारी डाॅ. मंजू ने बताया कि केंद्र में केवल युवतियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उन्हें आत्मनिर्भर होने लायक बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि केंद्र की ज्यादातर लड़कियां अपना स्टिचिंग केंद्र खोलकर आत्मनिर्भर भी बन चुकी है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सरकारी सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है, जो पूरे भारत में कहीं भी रोजगार प्राप्त करने में सहायक होता है। इससे लड़कियां स्वयं का रोजगार स्थापित कर अन्य महिलाओं व युवतियों को रोजगार देने का कार्य कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 60 से 70 बेटियां प्रशिक्षण पाकर स्वयं का रोजगार भी चला रही हैं।
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पढ़ाई के साथ निकाल रही अपनी जरूरत के खर्च
- वसंत बिहार निवासी निशू ने बताया कि वह पढ़ाई कर रही हैं, जिसमें कॉलेज के बाद वह दूसरे बैच में सिलाई सीखने के लिए केंद्र में आती हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार महीने से केंद्र में डिजाइनिंग व सिलाई दोनों का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह घर पर सिलाई का काम शुरू कर अपने कॉलेज का खर्च भी निकाल रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रों में कम फीस से अच्छा काम सिखाया जा रहा है।
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प्रशिक्षण प्राप्त कर शुरू करेंगी स्वयं का सिलाई सेंटर
- टीकरी निवासी तनु ने बताया कि आज के दौर में हाथ के हुनर में ही पैसा है, इसलिए जरूरी है कि स्वयं का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सके। वह पिछले दो महीने से फैशन डिजाइनिंग व सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह 11वीं कक्षा की छात्रा है। स्कूल के बाद वह प्रशिक्षण लेने के लिए केंद्र में रोजाना आती हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में फैशन डिजाइनिंग का बहुत अच्छा कॅरिअर है, इसलिए वह सरकारी सर्टिफिकेट प्राप्त कर स्वयं का सेंटर खोलना चाहती हैं।
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करनाल। जिले की युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला बाल कल्याण परिषद के बाल भवन में सिलाई व फैशन डिजाइनिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। केंद्रों में छह महीने व एक साल के कोर्स सिखाए जाते हैं, जिनमें बदलता हर ट्रेंड युवतियों को सिखाया जाता है।
कार्यक्रम के तहत कम फीस में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में सिलाई, डिजाइनिंग, पैटर्न कटिंग और डाई करने का कौशल सिखाया जाता है। केंद्र में युवतियों को हर प्रकार के ट्रेडिंग व पारंपरिक परिधानों की डिजाइनिंग कर उन्हें सिलने की कला सिखाई जाती है। प्रशिक्षक पूनम ने बताया कि वह पिछले छह साल से केंद्र में युवतियों को प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि युवतियों में हाथ का हुनर जरूर होना चाहिए, जिसमें सिलाई सबसे जरूरी काैशल माना जाता है। इसलिए हर लड़की को सिलाई जरूर सिखनी चाहिए। केंद्र में 35 से 40 युवतियां सिलाई सीखने के लिए आ रही हैं, जिसमें उन्हें दो बैच में प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिला बाल कल्याण अधिकारी डाॅ. मंजू ने बताया कि केंद्र में केवल युवतियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें उन्हें आत्मनिर्भर होने लायक बनाया जाता है। उन्होंने बताया कि केंद्र की ज्यादातर लड़कियां अपना स्टिचिंग केंद्र खोलकर आत्मनिर्भर भी बन चुकी है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सरकारी सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है, जो पूरे भारत में कहीं भी रोजगार प्राप्त करने में सहायक होता है। इससे लड़कियां स्वयं का रोजगार स्थापित कर अन्य महिलाओं व युवतियों को रोजगार देने का कार्य कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 60 से 70 बेटियां प्रशिक्षण पाकर स्वयं का रोजगार भी चला रही हैं।
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पढ़ाई के साथ निकाल रही अपनी जरूरत के खर्च
- वसंत बिहार निवासी निशू ने बताया कि वह पढ़ाई कर रही हैं, जिसमें कॉलेज के बाद वह दूसरे बैच में सिलाई सीखने के लिए केंद्र में आती हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले चार महीने से केंद्र में डिजाइनिंग व सिलाई दोनों का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह घर पर सिलाई का काम शुरू कर अपने कॉलेज का खर्च भी निकाल रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रों में कम फीस से अच्छा काम सिखाया जा रहा है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर शुरू करेंगी स्वयं का सिलाई सेंटर
- टीकरी निवासी तनु ने बताया कि आज के दौर में हाथ के हुनर में ही पैसा है, इसलिए जरूरी है कि स्वयं का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन सके। वह पिछले दो महीने से फैशन डिजाइनिंग व सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं। वह 11वीं कक्षा की छात्रा है। स्कूल के बाद वह प्रशिक्षण लेने के लिए केंद्र में रोजाना आती हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में फैशन डिजाइनिंग का बहुत अच्छा कॅरिअर है, इसलिए वह सरकारी सर्टिफिकेट प्राप्त कर स्वयं का सेंटर खोलना चाहती हैं।