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धर्मनगरी में घूमेगा बापू का चरखा
कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 03 Feb 2014 12:01 AM IST
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भारतीय संस्कृति, खादी और राष्ट्र की महान विभूतियों के प्रति रुझान पैदा करने के लिए गांधी स्मारक निधि हर साल कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर पर बापू का अस्थि विसर्जन दिवस व्यापक स्तर पर आयोजित करेगी। बाल, युवा और बुजुर्ग ब्रह्मसरोवर के तट पर एक साथ गांधी चरखा चलाकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
इसके साथ-साथ ही बापू के विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के अध्यक्ष महेश दत्त शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि धर्मनगरी में बापू के अस्थि विसर्जन दिवस 12 फरवरी को मनाया जाएगा।
गौरतलब है कि संयुक्त पंजाब-हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी गोपी चंद भार्गव बापू स्मारक निधि के प्रथम अध्यक्ष थे। वर्ष 1970 में भारतीय खादी ग्राम उद्योग संघ का शुभारंभ करने वाले महेश दत्त शर्मा वर्तमान में स्मारक निधि के अध्यक्ष हैं। वे गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी सोमभाई के बेटे हैं।
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फिलौर में हुआ था अस्थि विजर्सन
12 फरवरी 1948 को संयुक्त पंजाब के फिलौर में बापू का अस्थि विसर्जन सतलुज के तट पर किया गया था। इसके पश्चात हर वर्ष 12 फरवरी को अस्थि विसर्जन दिवस मनाने की परंपरा रही, लेकिन बापू स्मारक निधि इस दिवस को एक खास मिशन के तहत व्यापक रूप देना चाहती है।
आरएसएस से ज्यादा गांधी करते थे संस्कृति की बात
महेश दत्त शर्मा के मुताबिक आरएसएस द्वारा भारत की जिस महान संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की बात और पाश्चात्य संस्कृति का विरोध किया जाता है, उससे कहीं ज्यादा ऐसी ही भावना बापू की थी। इसका उल्लेख उनकी पुस्तक हिंद स्वराज में मिलता है। बापू ने पाश्चात्य संस्कृति का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज देश पाश्चात्य संस्कृति के चंगुल में है, जिससे उन्हें बाहर निकालना बड़ी चुनौती है। महेश दत्त शर्मा का कहना है कि कांग्रेस खादी और गांधी की विचारधारा को भूलती जा रही है और भाजपा बापू को कांग्रेसी मानती है। देश में 2 अक्तूबर और 30 जनवरी व अन्य अवसरों पर बापू याद तो किए जाते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा का अनुसरण नहीं दिखता।
अमर उजाला की रिपोर्ट पर कार्यक्रम की योजना
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद गांधी स्मारक निधि अगले वर्ष से हर साल 12 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बापू की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है। बापू की पुण्यतिथि 30 जनवरी को अमर उजाला ने विशेष रिपोर्ट में 12 नवंबर 1948 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया था। इस रिपोर्ट में बापू और कुरुक्षेत्र को जोड़ने वाली एक कड़ी को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया था। कुरुक्षेत्र के शरणार्थियों को रेडियो पर बापू का ये पहला और आखिरी संबोधन था।
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इसके साथ-साथ ही बापू के विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। गांधी स्मारक निधि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के अध्यक्ष महेश दत्त शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि धर्मनगरी में बापू के अस्थि विसर्जन दिवस 12 फरवरी को मनाया जाएगा।
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गौरतलब है कि संयुक्त पंजाब-हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी गोपी चंद भार्गव बापू स्मारक निधि के प्रथम अध्यक्ष थे। वर्ष 1970 में भारतीय खादी ग्राम उद्योग संघ का शुभारंभ करने वाले महेश दत्त शर्मा वर्तमान में स्मारक निधि के अध्यक्ष हैं। वे गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी सोमभाई के बेटे हैं।
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फिलौर में हुआ था अस्थि विजर्सन
12 फरवरी 1948 को संयुक्त पंजाब के फिलौर में बापू का अस्थि विसर्जन सतलुज के तट पर किया गया था। इसके पश्चात हर वर्ष 12 फरवरी को अस्थि विसर्जन दिवस मनाने की परंपरा रही, लेकिन बापू स्मारक निधि इस दिवस को एक खास मिशन के तहत व्यापक रूप देना चाहती है।
आरएसएस से ज्यादा गांधी करते थे संस्कृति की बात
महेश दत्त शर्मा के मुताबिक आरएसएस द्वारा भारत की जिस महान संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की बात और पाश्चात्य संस्कृति का विरोध किया जाता है, उससे कहीं ज्यादा ऐसी ही भावना बापू की थी। इसका उल्लेख उनकी पुस्तक हिंद स्वराज में मिलता है। बापू ने पाश्चात्य संस्कृति का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि आज देश पाश्चात्य संस्कृति के चंगुल में है, जिससे उन्हें बाहर निकालना बड़ी चुनौती है। महेश दत्त शर्मा का कहना है कि कांग्रेस खादी और गांधी की विचारधारा को भूलती जा रही है और भाजपा बापू को कांग्रेसी मानती है। देश में 2 अक्तूबर और 30 जनवरी व अन्य अवसरों पर बापू याद तो किए जाते हैं, लेकिन उनकी विचारधारा का अनुसरण नहीं दिखता।
अमर उजाला की रिपोर्ट पर कार्यक्रम की योजना
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद गांधी स्मारक निधि अगले वर्ष से हर साल 12 नवंबर को कुरुक्षेत्र में बापू की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है। बापू की पुण्यतिथि 30 जनवरी को अमर उजाला ने विशेष रिपोर्ट में 12 नवंबर 1948 की एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया था। इस रिपोर्ट में बापू और कुरुक्षेत्र को जोड़ने वाली एक कड़ी को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया था। कुरुक्षेत्र के शरणार्थियों को रेडियो पर बापू का ये पहला और आखिरी संबोधन था।