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Karnal News: जांच के नाम पर खानापूर्ति, किताबें बिकने के बाद जागे शिक्षा अधिकारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Apr 2025 02:25 AM IST
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Formalities in the name of investigation, education officers woke up after books were sold
- पूर्व सूचना के बाद सेक्टर-8 के निजी स्कूल पहुंचे, केवल एनसीईआरटी की किताबें ही मिलीं
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- लोग बोले, स्कूलों का करें औचक निरीक्षण, विद्यार्थियों के बस्ते जांचें तो दिखेंगी निजी प्रकाशकों की किताबें

माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नए शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों की किताबें बिकते हुए करीब एक माह का समय बीत चुका है। निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के आरोप अभिभावक भी लगा चुके हैं, लेकिन विभाग अब वीरवार को जागा है। कार्रवाई के तौर पर जांच के नाम पर महज खानापूर्ति की गई। किताबें बिकने के बाद कक्षाएं लगते हुए भी करीब 17 दिन का समय बीत चुका है। और विभाग ने अब जांच शुरू की है।

अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सेक्टर-8 के जिस निजी स्कूल में खंड शिक्षा अधिकारी सीमा मदान और जिला शिक्षा अधिकारी जांच करने पहुंची। वहां एक भी विद्यार्थी के पास निजी प्रकाशक की किताब नहीं मिली। जिन कक्षाओं में खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों की पुस्तकें देखीं, उनमें सभी एनसीईआरटी की पुस्तकें ही मिली। इसके बाद अधिकारी अपने कार्यालय में लौट आए। लेकिन जिन नामी स्कूलों पर अभिभावकों की ओर से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाने का आरोप लगाया गया था, उनमें से किसी में भी जांच नहीं की गई।
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शिक्षा सुधार के लिए काम कर रहे एडवोकेट संदीप राणा, तेजपाल और सुधा झा का कहना है कि अधिकारी जांच करने के लिए कार्यालय छोड़कर स्कूलों का औचक निरीक्षण करें। कक्षाओं के समय में अचानक पहुंचें और जो पुस्तक विद्यार्थी पढ़ रहे हो, उन्हें देखें। इसके अलावा छुट्टी के समय में या औचक निरीक्षण में विद्यार्थियों के बस्ते की सभी किताबें जांचें। तभी निजी प्रकाशकों की पुस्तकें उन्हें दिखाई देंगी। पूर्व सूचना पर जाएंगे तो सब ठीक ही मिलेगा। विदित हो कि जिले में 500 से ज्यादा निजी विद्यालय हैं।
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बड़ा सवाल : लोगों ने महंगे सेट खरीदे, वे कहां गए
एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि अभिभावकों ने निजी प्रकाशकों की निजी स्कूलों द्वारा लगवाई गई किताबों के महंगे सेट खरीदे थे। अगर विभाग सभी जगह हालात सही होने का दावा करता है तो वे सेट कहां गए हैं। पहली कक्षा से लेकर आठवीं तक की किताबों की कीमत तीन हजार से लेकर सात हजार रुपये तक थी। करोड़ों रुपये अभिभावकों से लूटे गए। अभी भी कई पुस्तक विक्रेता किताबें बेच रहे हैं। इनके यहां भी जांच होनी चाहिए।



करनाल खंड शिक्षा अधिकारी के साथ सेक्टर-8 के स्कूल में जांच की गई थी। कक्षाओं में बच्चों के पास केवल एनसीईआरटी की किताबें मिली। - सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी।
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