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Karnal News: अपनी तकलीफें भूल मरीजों की लौटा रहे मुस्कान
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- डॉक्टर बोले- सिर्फ दवाई लिखकर फर्ज नहीं निभाना चाहते, मरीज ठीक होने पर ही दिल को मिलता है सुकून
- राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस आज
काजल पांचाल
करनाल। कहते हैं कि डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो इंसानियत को भी जिंदा रखते हैं। कोई शारीरिक चुनौती से जूझते हुए भी हार नहीं मानता, कोई रोज सैकड़ों जिंदगियों को नया सवेरा देता है। राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के मौके पर नागरिक अस्पताल के कुछ डॉक्टरों की भी ऐसी ही कहानियां हैं, जो न सिर्फ पेशेवर बल्कि इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि वह सिर्फ दवाई लिखकर फर्ज नहीं निभाना चाहते, मरीज ठीक होने पर ही दिल को सुकून मिलता है।
पोस्टमार्टम टेबल पर पहले दिन डर था पर निभाई जिम्मेदारी
अस्पताल में कार्यरत फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. दीपक गोयल बताते हैं कि जब पहली बार उन्हें पोस्टमार्टम करने और मेडिकोलीगल काम का मौका मिला, तो मन में डर और घबराहट दोनों थी। लेकिन सीनियर डॉक्टरों को देख हौसला मिला। धीरे-धीरे लाशों की चुप्पी में छिपे राज पढ़ना सीख लिया। आज बड़े से बड़े हत्याकांड में भी वो सच सामने लाने का काम कर रहे हैं। जैसे कि 2023 में हुआ यश हत्याकांड जैसे चर्चित मामले में पुलिस, राजनीतिक और प्रेस का जबरदस्त दबाव था, लेकिन उन्होंने निडर होकर मर्डर में होने वाले हथियार की पुष्टि की थी जिसमें मां-बाप कातिल निकले, इस प्रकार कई केसों की गुत्थी सुलझाकर अपना फर्ज निभा रहे हैं।
मरीज का ठीक होना किसी इनाम से कम नहीं
टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप का कहना है कि रोज सुबह अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज कतार में खड़े रहते हैं। औसतन 30 से 40 मरीज हर रोज आते हैं, लेकिन हर मरीज को पूरा समय और जरूरी परामर्श दिया जाता है। मरीज जब पूरी तरह ठीक होकर थैंक्यू कहता है, तो वो सुकून किसी इनाम से कम नहीं लगता, लेकिन टीबी एक ऐसी बीमारी है कि जब तब मरीज इलाज पूरा नहीं करवाता और बीच में ही छोड़ देता है तो बहुत निराशा होती है, यह एक डॉक्टर के काम में असंतुष्टिजनक स्थिति उत्पन्न करता है। उन्होंने बताया कि जब से यहां आए हैं तब से लेकर अब तक टीबी मरीजों में ठीक होने वालों की संख्या में काफी इजाफा देख रहा हूं जिससे मुझे अपनी इलाज प्रकिया पर खुशी महसूस हाेती है।
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जन्म से पोलियो फिर भी नहीं रुके कदम
नागरिक अस्पताल में वर्ष 2019 से सेवाएं दे रहे त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो शारीरिक कमियां कभी रास्ता नहीं रोक सकतीं। जन्म से ही पैर में पोलियो की परेशानी झेल रहे डॉक्टर ने कभी हार नहीं मानी। किसान परिवार में जन्मे, अपने पिता को ही प्रेरणा मानकर हमेशा आगे बढ़ती रहे। आज न जाने कितनों की त्वचा संबंधी परेशानियों का समाधान कर वो मुस्कान लौटाने का काम कर रहे हैं। डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि एक डॉक्टर को एक दिन में इलाज करने की सीमा 60 मरीज तक ही तय है लेकिन रोजाना 250 से 300 मरीजों को समय दे रहे हैं। संवाद
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- राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस आज
काजल पांचाल
करनाल। कहते हैं कि डॉक्टर सिर्फ इलाज नहीं करते, वो इंसानियत को भी जिंदा रखते हैं। कोई शारीरिक चुनौती से जूझते हुए भी हार नहीं मानता, कोई रोज सैकड़ों जिंदगियों को नया सवेरा देता है। राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस के मौके पर नागरिक अस्पताल के कुछ डॉक्टरों की भी ऐसी ही कहानियां हैं, जो न सिर्फ पेशेवर बल्कि इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि वह सिर्फ दवाई लिखकर फर्ज नहीं निभाना चाहते, मरीज ठीक होने पर ही दिल को सुकून मिलता है।
पोस्टमार्टम टेबल पर पहले दिन डर था पर निभाई जिम्मेदारी
अस्पताल में कार्यरत फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. दीपक गोयल बताते हैं कि जब पहली बार उन्हें पोस्टमार्टम करने और मेडिकोलीगल काम का मौका मिला, तो मन में डर और घबराहट दोनों थी। लेकिन सीनियर डॉक्टरों को देख हौसला मिला। धीरे-धीरे लाशों की चुप्पी में छिपे राज पढ़ना सीख लिया। आज बड़े से बड़े हत्याकांड में भी वो सच सामने लाने का काम कर रहे हैं। जैसे कि 2023 में हुआ यश हत्याकांड जैसे चर्चित मामले में पुलिस, राजनीतिक और प्रेस का जबरदस्त दबाव था, लेकिन उन्होंने निडर होकर मर्डर में होने वाले हथियार की पुष्टि की थी जिसमें मां-बाप कातिल निकले, इस प्रकार कई केसों की गुत्थी सुलझाकर अपना फर्ज निभा रहे हैं।
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मरीज का ठीक होना किसी इनाम से कम नहीं
टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप का कहना है कि रोज सुबह अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज कतार में खड़े रहते हैं। औसतन 30 से 40 मरीज हर रोज आते हैं, लेकिन हर मरीज को पूरा समय और जरूरी परामर्श दिया जाता है। मरीज जब पूरी तरह ठीक होकर थैंक्यू कहता है, तो वो सुकून किसी इनाम से कम नहीं लगता, लेकिन टीबी एक ऐसी बीमारी है कि जब तब मरीज इलाज पूरा नहीं करवाता और बीच में ही छोड़ देता है तो बहुत निराशा होती है, यह एक डॉक्टर के काम में असंतुष्टिजनक स्थिति उत्पन्न करता है। उन्होंने बताया कि जब से यहां आए हैं तब से लेकर अब तक टीबी मरीजों में ठीक होने वालों की संख्या में काफी इजाफा देख रहा हूं जिससे मुझे अपनी इलाज प्रकिया पर खुशी महसूस हाेती है।
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जन्म से पोलियो फिर भी नहीं रुके कदम
नागरिक अस्पताल में वर्ष 2019 से सेवाएं दे रहे त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो शारीरिक कमियां कभी रास्ता नहीं रोक सकतीं। जन्म से ही पैर में पोलियो की परेशानी झेल रहे डॉक्टर ने कभी हार नहीं मानी। किसान परिवार में जन्मे, अपने पिता को ही प्रेरणा मानकर हमेशा आगे बढ़ती रहे। आज न जाने कितनों की त्वचा संबंधी परेशानियों का समाधान कर वो मुस्कान लौटाने का काम कर रहे हैं। डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि एक डॉक्टर को एक दिन में इलाज करने की सीमा 60 मरीज तक ही तय है लेकिन रोजाना 250 से 300 मरीजों को समय दे रहे हैं। संवाद