फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Flowerpot maker Nitin lalit in karnal

प्लास्टिक से तैयार गमलों में 75 फीसदी कम पानी में तैयार हो रहे पौधे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jul 2019 02:48 AM IST
विज्ञापन
Flowerpot maker Nitin lalit in karnal
करनाल: नितिन की सक्सेस स्टोरी। 71r
कनाडा को छोड़ अपने देश में वापस घर करनाल आकर नितिन ललित ने वेस्ट प्लास्टिक से गमलों का कारोबार खड़ा किया। ‘गमला’ ऐसे तो ये नाम छोटा लगता है, पर ये गमला दूसरे गमलों की अपेक्षा 75 फीसदी कम पानी लेता है। घटते जलस्तर को देखते हुए ये प्रोडक्ट युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ भविष्य के लिए जल संचय में भी सहयोग करेगा। इसके बाद अब अल्फा लेंटन के नाम से नया गमला तैयार किया गया है, जिसके नीचे लाइट और उसके ऊपर प्लांट है। लाइट के लिए इसमें सोलर पैनल फिट करने का प्रावधान भी है। नवंबर में पूना में फूलों व पौधों की एक विशाल प्रदर्शनी में उसने गमलों और पौधों को देखते हुए प्रशस्ति पत्र भी मिला है।
विज्ञापन

बता दें कि वर्ष 2007 में कनाडा जाकर ऑटो मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग में स्पेसलाइजेशन की और इसी फील्ड में काम करना शुरू किया। वर्ष 2016 तक कनाडा में प्रवास किया। तक उसे मालूम हुआ कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजनरी सरकार है। विजनरी सरकार में स्टार्टअप, स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे सुअवसर अपनाने के व्यापक रास्ते थे, लेकिन विचार आया कि अपने देश में प्रकृति की अनमोल नेमत पानी की इतनी बर्बादी है, जिसका अनुमान लगाना भी कठिन है। यदि इसे नहीं बचाया गया, तो आने वाले पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है। इसी विचार से गमलों को तैयार किया
विज्ञापन

ऐसे तैयार किया गमले में पौधा
वेस्ट प्लास्टिक को रिसाइकिल कर उसकी डिजाइन युक्त शीट तैयार की गई। इसे मोड़कर अलग-अलग आकार के गमले बनाए जाने का प्रयोग किया। गमले की सतह पर एक अन्य डिजाइन में जल संचय के लिए छोटा वाटर रिजरवायर यानी तश्तरीनुमा जलाशय फिट किया गया। नारियल का बुरादा, चावल मिल की ऐश और वर्मिंग कंपोस्ट के मिश्रण से तैयार खाद को गमले में डालकर उसमें पौधे लगाए गए और सामान्य गमलों में डाले जाने वाले पानी की तुलना में एक चौथाई पानी ही डाला गया। धीरे-धीरे पौधे ने जड़ो के जरिए पानी लेकर अपनी ग्रोथ शुरू की और कुछ समय बीत जाने के बाद एक स्वस्थ पौधा आंखों के सामने था। अब उनकी यहां एल्फा एडवांटक एलएलपी नाम से कंपनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चार डिजाइनों में अलग-अलग साइज के गमले
नर्सरी में गमले 4 इंच से लेकर 25-30 इंच तक अलग-अलग साइजों में हैं। 10 इंच के गमले की बात करें, तो उसमें 6-7 इंच की क्षमता तक कंपोस्ट, 2 से ढाई इंच में मात्र 1 लीटर पानी और फिर उसके ऊपर पौधा, यह है एक तैयार गमला। अब यहां हॉरीजेंटल, वर्टिकल, पॉकेट व बुके जैसे डिजाइनों में गमले मौजूद हैं।

नर्सरी में 25 प्रजातियाें के पौधे
नर्सरी में पौधों की 25 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें हिमाचल की एक प्रजाति रॉक रोज तथा सैंसीवेरिया, कैकटस, कोलियस, एवरग्रीन, पाम, एलोविरा, फाईकस व बांस जैसे पौधे शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed