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करनाल में हवाई जहाज की उड़ान को लेकर फिर सुगबुगाहट
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हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन करनाल की नेवल हवाई पट्टी के विस्तारीकरण एवं यहां घरेलू हवाई अड्डा बनाने के मामले में एकबार फिर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस बाबत शुक्रवार को जिला सचिवालय स्थित उपायुक्त के कांफ्रेंस हाल में संबंधित किसानों को जमीन देने के लिए राजी करने को बुलाया गया था। इस दौरान उनकी मुख्यमंत्री से वीडियो कांफ्रेंसिंग भी होनी थी, लेकिन सीएम की किसानों से बात नहीं हो सकी। ऐसे में एसडीएम आयुष सिन्हा ने किसानों को आश्वासन दिया कि रविवार को मुख्यमंत्री करनाल आएंगे, जिसमें किसानों की सारी आपत्तियां और मांगें सुनीं जाएंगी। साथ ही उनके निराकरण का प्रयास होगा। यदि मुख्यमंत्री और किसानों की वार्ता सफल रही तो करनाल में हवाई अड्डा बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
करनाल में वर्ष 2008 से घरेलू हवाई अड्डा बनाने को लेकर कवायद की जा रही है, लेकिन न तो आज तक हवाई पट्टी के विस्तार के लिए और न ही अड्डा बनाने के लिए भूमि अधिग्रहीत की जा सकी। जबकि इसके बाद से हरियाणा के हिसार में हवाई अड्डा बनकर तैयार भी हो गया। इससे पहले 30 अक्तूबर 2012 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने करनाल में हवाई अड्डा बनाने की संभावना तलाशी। अथॉरिटी के कार्यकारी निदेशक डीपी सिंह की टीम करनाल पहुंची थी। एक अगस्त 2013 को तत्कालीन सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा था कि करनाल में 100 एकड़ जमीन एक्वायर होगी। 2014 में सरकार बदलने के बाद भी करनाल में हवाई अड्डे को लेकर चरचाएं चलती रहीं, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हो सका। अब एकबार फिर सरकार की ओर से इस दिशा में पहल की गई। इससे शहरवासियों में उम्मीद जगी है। शुक्रवार को लघु सचिवालय में संबंधित किसानों को भूमि अधिग्रहण संबंधी बातचीत के लिए बुलाया गया था। किसानों की मानें तो रविवार को मुख्यमंत्री से उनकी बात हो सकती है, जिसमें किसान रिवाइज्ड कलेक्टर रेट और केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून-2014 के तहत जमीन के मुआवजे की मांग रखेंगे। करनाल में हवाई अड्डे का रास्ता साफ होगा या नहीं यह तो वक्त की बताएगा, लेकिन शासन-प्रशासन और सरकार की ओर से शुरू हुई सुगबुगाहट के बाद एकबार फिर शहरवासियों में इसकी आस जगी है।
जमीन देने पर किसानों का बदलने लगा मन
मॉडल टाउन निवासी किसान इंद्रप्रीत सिंह, कलवेहड़ी निवासी रमेश कांबोज, रामकुमार, दिवान चंद, श्यामसुंदर, वीरेंद्र, लख्मीचंद, मदनलाल, नौरती राम का कहना है कि उनके गांव में जमीन का कलेक्टर रेट रिवाइज किया जाए। उसके बाद जो औसत रेट निकलेगा तो वे सहमति जताएंगे। ढाई साल पूर्व जो रजामंदी दी थी उसमें 87.50 लाख रुपये प्रति एकड़ रेट बताया गया था। उसके बाद कुंजपुरा में कलेक्टर रेट बढ़े हैं लेकिन शहर से सटे कलवेहड़ी गांव में नहीं बढ़ाए गये। कलवेहड़ी गांव की जमीन का कलेक्टर रेट पुन: निर्धारण किया जाए। उनका तर्क है कि केंद्र के भूमि अधिग्रहण कानून व राज्य की पालिसी में अंतर है।
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रनवे को 5000 फुट करना चाहती है सरकार
हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन करनाल की कलवेहड़ी रोड पर नेवल हवाई पट्टी करीब 105 एकड़ क्षेत्र में है। इसका रनवे 3000 फुट लंबा है। रनवे को 5000 फुट करने की योजना है। इंस्टीट्यूट में विज्ञान संकाय से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी को कामर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए 200 घंटे की उड़ान करवाई जाती है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन दिल्ली से बनता है। प्रशिक्षण के लिए टू सीटर सेशना-152 व फोर सीटर सेशना-172 क्राफ्ट हैं।
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करनाल में वर्ष 2008 से घरेलू हवाई अड्डा बनाने को लेकर कवायद की जा रही है, लेकिन न तो आज तक हवाई पट्टी के विस्तार के लिए और न ही अड्डा बनाने के लिए भूमि अधिग्रहीत की जा सकी। जबकि इसके बाद से हरियाणा के हिसार में हवाई अड्डा बनकर तैयार भी हो गया। इससे पहले 30 अक्तूबर 2012 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने करनाल में हवाई अड्डा बनाने की संभावना तलाशी। अथॉरिटी के कार्यकारी निदेशक डीपी सिंह की टीम करनाल पहुंची थी। एक अगस्त 2013 को तत्कालीन सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा था कि करनाल में 100 एकड़ जमीन एक्वायर होगी। 2014 में सरकार बदलने के बाद भी करनाल में हवाई अड्डे को लेकर चरचाएं चलती रहीं, लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं हो सका। अब एकबार फिर सरकार की ओर से इस दिशा में पहल की गई। इससे शहरवासियों में उम्मीद जगी है। शुक्रवार को लघु सचिवालय में संबंधित किसानों को भूमि अधिग्रहण संबंधी बातचीत के लिए बुलाया गया था। किसानों की मानें तो रविवार को मुख्यमंत्री से उनकी बात हो सकती है, जिसमें किसान रिवाइज्ड कलेक्टर रेट और केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून-2014 के तहत जमीन के मुआवजे की मांग रखेंगे। करनाल में हवाई अड्डे का रास्ता साफ होगा या नहीं यह तो वक्त की बताएगा, लेकिन शासन-प्रशासन और सरकार की ओर से शुरू हुई सुगबुगाहट के बाद एकबार फिर शहरवासियों में इसकी आस जगी है।
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जमीन देने पर किसानों का बदलने लगा मन
मॉडल टाउन निवासी किसान इंद्रप्रीत सिंह, कलवेहड़ी निवासी रमेश कांबोज, रामकुमार, दिवान चंद, श्यामसुंदर, वीरेंद्र, लख्मीचंद, मदनलाल, नौरती राम का कहना है कि उनके गांव में जमीन का कलेक्टर रेट रिवाइज किया जाए। उसके बाद जो औसत रेट निकलेगा तो वे सहमति जताएंगे। ढाई साल पूर्व जो रजामंदी दी थी उसमें 87.50 लाख रुपये प्रति एकड़ रेट बताया गया था। उसके बाद कुंजपुरा में कलेक्टर रेट बढ़े हैं लेकिन शहर से सटे कलवेहड़ी गांव में नहीं बढ़ाए गये। कलवेहड़ी गांव की जमीन का कलेक्टर रेट पुन: निर्धारण किया जाए। उनका तर्क है कि केंद्र के भूमि अधिग्रहण कानून व राज्य की पालिसी में अंतर है।
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रनवे को 5000 फुट करना चाहती है सरकार
हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल एविएशन करनाल की कलवेहड़ी रोड पर नेवल हवाई पट्टी करीब 105 एकड़ क्षेत्र में है। इसका रनवे 3000 फुट लंबा है। रनवे को 5000 फुट करने की योजना है। इंस्टीट्यूट में विज्ञान संकाय से 12वीं उत्तीर्ण विद्यार्थी को कामर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए 200 घंटे की उड़ान करवाई जाती है। यह लाइसेंस डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन दिल्ली से बनता है। प्रशिक्षण के लिए टू सीटर सेशना-152 व फोर सीटर सेशना-172 क्राफ्ट हैं।