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30. दिव्यांगता को पिछे छोड़कर युवक बना साइंटिस्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2022 02:39 AM IST
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Flight filled with spirits, defeated disability and found a place
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। लक्ष्य हासिल करने के लिए जो हौसलों से उड़ान भरते हैं, उन्हें मंजिल अवश्य मिलती है। यह दिव्यांग सतीश ने भी साबित कर दिखाया है। गांव शेरगढ़ टापू निवासी सतीश कुमार एक पैर से चल नहीं सकता। इसके बावजूद उसने कड़ी मेहनत की और अब इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) में वैज्ञानिक बन गया है। उन्हें ज्वॉइनिंग लेटर भी मिल चुका है। यह मुकाम हासिल कर सतीश ने दिव्यांगों के लिए एक मिसाल पेश की है। उसका कहना है कि दिव्यांगता को कमजोरी न समझें बल्कि उसे अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ें। सतीश ने 2020 में इसरो में वैज्ञानिक के लिए परीक्षा दी थी, 2021 में परिणाम आया था और साक्षात्कार हुआ था। अब 2022 में उसे ज्वॉइनिंग लेटर मिला है।
प्रोफेसर से मिली प्रेरणा
सतीश ने बताया कि पांचवीं पास उसने गांव के स्कूल से की। इसके बाद हाई स्कूल में जाना था, जो कि गांव से दूर था, जहां जाने में वह असमर्थ था, इस कारण उसके माता-पिता ने उसे मामा के घर भेज दिया। वहां वह 12वीं कक्षा तक पढ़ा। इसके बाद उसने जगाधरी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई की और कंप्यूटर में डिप्लोमा किया। इसी दौरान उनकी प्रोफेसर अनुभूति बंसल जो कि इसरो में वैज्ञानिक के लिए तैयारी कर रही थीं, उन्हीं से प्रेरणा मिली और फिर उसने भी इसकी तैयारी शुरू कर दी।
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नौकरी छूटने पर कोरोना काल में की कड़ी मेहनत
दिव्यांग ने बताया कि वह प्राइवेट नौकरी करता था। कोरोना काल में वह नौकरी चली गई। इस कारण उसने करनाल शहर में किराये पर कमरा लिया और वैज्ञानिक बनने के लिए दिन रात तैयारी की। इसके बाद ही उसका चयन इसरो में हुआ। सतीश का कहना है कि कोरोना काल में उसे पढ़ाई करने का अच्छा मौका मिला, क्योंकि उस दौरान लॉकडाउन लगा था और घर से बाहर भी नहीं निकल सकते थे। ऐसे में उसने पूरे दिन कमरे पर रहकर पढ़ाई की।
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इस बार था अंतिम समय, माता पिता का किया सपना साकार
सतीश कुमार ने बताया कि उसके माता-पिता का सपना था कि बेटा सरकारी अधिकारी बने। उसका बड़ा भाई सरकारी अधिकारी नहीं बन सका, इस कारण उसने अपने माता-पिता के सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की। इतना ही नहीं यह उसका अंतिम समय था, क्योंकि साइंटिस्ट के लिए 35 वर्ष की उम्र तक ही आवेदन कर सकते हैं, जिस दौरान उसने फार्म भरा था, उस दौरान उसकी उम्र 35 वर्ष थी। वह परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं होता तो दोबारा फार्म नहीं भर सकता था। सतीश कुमार ने बताया कि उसे यह नौकरी बिना खर्ची और पर्ची के मिली है।
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