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Karnal News: हरी खाद का प्रयोग कम होने से घट रही भूमि की उर्वरा शक्ति
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संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। कृषि किसान कल्याण विभाग की ओर से बुधवार को पुंडरी गांव के विश्वकर्मा मंदिर में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया गया। मास्टर ट्रेनर एवं सेवानिवृत्त विषय विशेषज्ञ (पौध संरक्षण) डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे शरीर को शक्ति देने के लिए जिस पोष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार भूमि को भी अच्छी पैदावार देने के लिए संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। प्रदेश में भूमि में गोबर की खाद व हरी खाद का प्रयोग बहुत कम होने की वजह से भूमि की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसकी कमी को पूरा करने के लिए किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा फसलों के लिए सिफारिश की गई कि खाद की मात्रा से कहीं अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। इसकी वजह से किसान की कृषि लागत बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती एक देसी गाय के गोबर व मूत्र से 30 एकड़ में की जा सकती है। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत, ब्रह्मास्त्र इत्यादि तैयार करने की विधि की विस्तार से जानकारी दी। खंड कृषि अधिकारी घरौंडा के सुपरवाइजर बलकार सिंह ने कहा कि कृषि किसान कल्याण विभाग हरियाणा प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने के लिए 30000 रुपये तथा चार ड्रम अनुदान पर दे रहा है। पुंडरी गांव के सरपंच सूरजभान ने गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण शिविर लगाने के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उपस्थित सभी किसानों को अपने खेत में प्राकृतिक खेती को शुरू करने का आग्रह किया। इस अवसर पर धर्मवीर त्यागी, शिवचरण, राजेंद्र ,सोहन लाल, मीना देवी, अजीत सिंह, बबली, मोनिका, लाजवंती, राधा, निर्मला उपस्थित रहे।
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घरौंडा। कृषि किसान कल्याण विभाग की ओर से बुधवार को पुंडरी गांव के विश्वकर्मा मंदिर में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण दिया गया। मास्टर ट्रेनर एवं सेवानिवृत्त विषय विशेषज्ञ (पौध संरक्षण) डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे शरीर को शक्ति देने के लिए जिस पोष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार भूमि को भी अच्छी पैदावार देने के लिए संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। प्रदेश में भूमि में गोबर की खाद व हरी खाद का प्रयोग बहुत कम होने की वजह से भूमि की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है।
उन्होंने कहा कि इसकी कमी को पूरा करने के लिए किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा फसलों के लिए सिफारिश की गई कि खाद की मात्रा से कहीं अधिक रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। इसकी वजह से किसान की कृषि लागत बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती एक देसी गाय के गोबर व मूत्र से 30 एकड़ में की जा सकती है। किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत, ब्रह्मास्त्र इत्यादि तैयार करने की विधि की विस्तार से जानकारी दी। खंड कृषि अधिकारी घरौंडा के सुपरवाइजर बलकार सिंह ने कहा कि कृषि किसान कल्याण विभाग हरियाणा प्राकृतिक खेती के लिए देसी गाय पालने के लिए 30000 रुपये तथा चार ड्रम अनुदान पर दे रहा है। पुंडरी गांव के सरपंच सूरजभान ने गांव में प्राकृतिक खेती पर प्रशिक्षण शिविर लगाने के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उपस्थित सभी किसानों को अपने खेत में प्राकृतिक खेती को शुरू करने का आग्रह किया। इस अवसर पर धर्मवीर त्यागी, शिवचरण, राजेंद्र ,सोहन लाल, मीना देवी, अजीत सिंह, बबली, मोनिका, लाजवंती, राधा, निर्मला उपस्थित रहे।

मेरठ-------बच्चा पार्क स्थित सेंट थॉमस चर्च में प्रार्थना सभा मे भाग लेते श्रद्वालु----नीटू- फोटो : वीडियो ग्रैब
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