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सरकार के खिलाफ किसानों की हुंकार, प्रदर्शन कर फूंके पुतले

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Feb 2022 02:12 AM IST
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Farmers shouted against the government, demonstrated and burnt effigies
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान संगठनों ने सोमवार को विश्वासघात दिवस मनाते हुए जिला मुख्यालय और तहसील स्तर पर प्रदर्शन कर पुतले फूंके। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री मनोहरलाल व प्रदेश के कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल को भी भेजी हैं। किसानों ने किसान आंदोलन की समाप्ति पर सरकार से हुए समझौते की शर्तों को लागू न करने का आरोप लगाया। शहर में किसान संगठन दो स्थानों पर एकत्रित हुए।
भाकियू चढूनी ग्रुप के सदस्य सेक्टर 12 स्थित जाट धर्मशाला के समीप एकत्रित हुए और प्रदर्शन कर लघु सचिवालय के सामने पहुंचे। आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की सदस्य भी प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचीं। इस दौरान सचिवालय द्वार को बंद कर पुलिस बल तैनात किया गया। वाटर केनन व वज्र वाहन भी तैनात थे। नायब तहसीलदार राहुल बूरा किसानों के पास पहुंचे और उनके ज्ञापन को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए। मौके पर भाकियू प्रदेश कोर कमेटी सदस्य जगदीप औलख, धरना कमेटी अध्यक्ष रामपाल चहल, आईटी प्रकोेष्ठ जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह मेहला, गुरतेज सिंह, बलवान सिंह, हैप्पी औलख, जेपी शेखपुरा, गुरजंट सिंह, मनीष लाठर व अन्य किसान मौजूद थे।
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दूसरी ओर अन्य किसान संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य महात्मा गांधी चौक पर एकत्रित हुए और धरना दिया। यहां से पुतले की शवयात्रा निकालते हुए सेक्टर 12 लघु सचिवालय द्वार के समक्ष पहुंचे और पुतला जलाया। नायब तहसीलदार राहुल बूरा को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों में भाकियू प्रदेश संगठन सचिव शाम सिंह मान, उपप्रधान प्रेमचंद शाहपुर, प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान, बीर सिंह लाठर, जिलाध्यक्ष यशपाल राणा, युवा जिलाध्यक्ष नरेंद्र धूमसी, अन्नदाता किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरमुख सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के जिला कमेटी सदस्य डॉ. अशोक अरोड़ा व अन्य सदस्य मौजूद थे।
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ये मांगें उठाईं
- नौ दिसंबर को जिस पत्र के आधार पर संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया था उसे लागू किया जाए।
- किसानों पर दर्ज मुकदमे रद्द किए जाएं।
- एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए। इस पर कमेटी बनाने और उसमें किसानों को शामिल करने का आश्वासन दिया था।
- आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के आश्रितों को मुआवजा और रोजगार दिया जाए।
- बिजली संशोधित बिल को लेकर वार्ता में किसानों को शामिल किया जाए।
- हरियाणा में बने भूमि अधिग्रहण कानून पर एतराज जताया।
- आंदोलनों में संपत्ति क्षतिपूर्ति वसूली अधिनियम निरस्त हो।
- पिछले समय में खराब हुई फसलों का मुआवजा दिलाया जाए।
- रबी 2022 में बर्बाद हुई फसलों की विशेष गिरदावरी कर मुआवजा।
- जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की खराब स्थिति को देखते हुए मदद की जाए।
- बेमौसम बारिश से खराब फसलों की मुआवजा राशि बढ़ाई जाए।
- खाद की कमी दूर हो।
- लावारिस पशुओं की समस्या की रोकथाम हो और पशु मेलों का फिर से आयोजन किया जाए।
किसान आंदोलन की समाप्ति पर हुए समझौते की शर्तों को लागू नहीं किया गया इसलिए किसानों ने विश्वासघात दिवस मनाया है। एमएसपी पर गारंटी को लेकर सरकार काम नहीं कर रही है। किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए।
शाम सिंह मान, प्रदेश संगठन सचिव, भाकियू
सरकार ने वादाखिलाफी की है। इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शन का निर्णय लिया। सरकार से अपील है कि जो वादे किए थे उन पर काम करने की शुरूआत तो करे। किसानों की राज्य स्तर की भी कुछ मांगें हैं।
सुरेंद्र सांगवान, प्रदेश प्रवक्ता, भाकियू
जब कृषि कानून वापस लिए और आंदोलन स्थगित किया तो उम्मीद थी कि सभी मांगें पूरी की जाएंगी। हरियाणा व यूपी की सरकारें मान गई थी कि किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस होंगे लेकिन नहीं हुए। अब भी किसानों के पास समन आ रहे हैं।
डॉ. अशोक अरोड़ा, सदस्य, अखिल भारतीय किसान सभा
केंद्र सरकार ने बीते नौ दिसंबर को लिखित आश्वासन दिया था कि किसानों की मांगें मान रहे हैं और आंदोलन खत्म किया जाए। एमएसपी के लिए कमेटी बनाने में किसान प्रतिनिधियों को शामिल करने पर अब कोई चर्चा नहीं है।

- गुरमुख सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अन्नदाता किसान यूनियन
सरकार मांगें माने अन्यथा दोबारा देंगे धरना
निसिंग। क्षेत्र के किसानों ने उप तहसील कार्यालय में कानूनगो रमेश को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेता गुलजार सिंह कामरेड की अगुवाई में किसानों ने रोष जाहिर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। एमएसपी की गारंटी, तीन कृषि कानून वापस लेने और हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड व मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में किसानों पर दर्ज केस वापस लेने का आश्वासन देते हुए आंदोलन समाप्त करवाया था। सरकार ने उनकी मांगों और वादे को पूरा न करते हुए छल किया है। संवाद
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