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Karnal News: सावधान रहें किसान, यह पखवाड़ा तय करेगा गेहूं पैदावार की दर
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देव शर्मा
करनाल। वीरवार से शुरू हो रहा पखवाड़ा खेती और किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में दाना परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है। खासकर अगैती फसलों में दाना मजबूत होने लगा है, ऐसे में किसान की निगाहें आसमान पर टिक गई है। यदि पिछले साल की तरह तापमान अधिक बढ़ा तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, अन्यथा गेहूं रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ सकती है। इसी पखवाड़े में कुछ पश्चिमी विक्षोभ भी दस्तक दे रहे हैं, जो मौसम को गेहूं के अनुकूल बना सकते हैं। गेहूं के खेत में हल्की नमी का रहना आवश्यक है।
15 से 31 मार्च तक का ये पखवाड़ा गेहूं की पैदावार की दर को तय करेगा। मौसम और कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार गेहूं की फसल निर्विघ्न रूप से अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच चुकी है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि 15 मार्च तक गेहूं को मौसम से कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके बाद इस पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने संभावना ये जताई थी कि अब न तो बारिश और न ही किसी बीमारी ने गेहूं को प्रभावित किया है, इसलिए इस बार गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना प्रबल है। क्योंकि 75 फीसदी रकबा अगैती किस्मों व 50 प्रतिशत रकबा ताप सहनशील प्रजातियों का है। इसलिए इस पर मौसम का प्रभाव नहीं होगा।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की जिला कृषि मौसम सेवा के जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि इन दिनों अगैती गेहूं की बालियों में दाना मजबूत हो रहा है। ऐसी स्थिति में अधिक तापमान नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि अधिक तापमान से दाना सूखकर छोटा रह सकता है। लेकिन इन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में कई पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहे हैं, जिनसे तापमान गेहूं के अनुकूल रहने की प्रबल संभावना है।
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वर्जन
इन दिनों किसान बेहद सावधान रहें। हालांकि उत्तर भारत में जल्द पश्चिमी विक्षोभ की झड़ी लगने वाली है। एक के बाद एक कई मौसमी तंत्र देशभर में सक्रिय हो सकते हैं। जिनका असर करनाल में भी दिखेगा। पश्चिमी विक्षोभ से प्रेरित परिसंचरण क्षेत्र उत्तर राजस्थान व आसपास के इलाकों पर बनेगा, जिससे करनाल में बादलवाई रहेगी। 16 मार्च से नया मध्यम दर्जे का पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। हरियाणा व पंजाब में इसका असर देखा जा सकता है। इससे 19 मार्च तक बादलवाई व कहीं-कहीं गरज के बीच बिखरी हुई हल्की बारिश की संभावना रहेगी। 22 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है। जिसके कारण करनाल में आंधी के साथ हल्की बारिश संभावित है।
- डॉ.योगेश कुमार, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, एनडीआरआई, करनाल। (फोटो-1006)
किसानों को ये सलाह
- गेहूं व जौ की फसल में नमी बरक़रार रखें, जरूरत होने पर शाम को हल्की सिंचाई करें।
- स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रबंध है तो ये गेहूं व जौ की फसल में सबसे अच्छा सिंचाई प्रबंधन है।
- ये समय बेहद महत्वपूर्ण है, कृषि सलाह से ही गेहूं की फसल में सिंचाई व स्प्रे करें।
- चना व सरसों की कटाई व कढ़ाई करें और उसके भंडारण का विशेष प्रबंध करें।
- गन्ने की बिजाई के लिए उपयुक्त समय है, इसके लिए खेतों को तैयार करें।
- पकी हुई सब्जियों की तुड़वाई करें और फलदार पौधों में जरूरत होने पर सिंचाई करें।
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करनाल। वीरवार से शुरू हो रहा पखवाड़ा खेती और किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल में दाना परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है। खासकर अगैती फसलों में दाना मजबूत होने लगा है, ऐसे में किसान की निगाहें आसमान पर टिक गई है। यदि पिछले साल की तरह तापमान अधिक बढ़ा तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, अन्यथा गेहूं रिकॉर्ड उत्पादन की ओर बढ़ सकती है। इसी पखवाड़े में कुछ पश्चिमी विक्षोभ भी दस्तक दे रहे हैं, जो मौसम को गेहूं के अनुकूल बना सकते हैं। गेहूं के खेत में हल्की नमी का रहना आवश्यक है।
15 से 31 मार्च तक का ये पखवाड़ा गेहूं की पैदावार की दर को तय करेगा। मौसम और कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार गेहूं की फसल निर्विघ्न रूप से अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच चुकी है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह पहले ही कह चुके हैं कि 15 मार्च तक गेहूं को मौसम से कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके बाद इस पर नजर रखी जाएगी। उन्होंने संभावना ये जताई थी कि अब न तो बारिश और न ही किसी बीमारी ने गेहूं को प्रभावित किया है, इसलिए इस बार गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना प्रबल है। क्योंकि 75 फीसदी रकबा अगैती किस्मों व 50 प्रतिशत रकबा ताप सहनशील प्रजातियों का है। इसलिए इस पर मौसम का प्रभाव नहीं होगा।
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की जिला कृषि मौसम सेवा के जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि इन दिनों अगैती गेहूं की बालियों में दाना मजबूत हो रहा है। ऐसी स्थिति में अधिक तापमान नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि अधिक तापमान से दाना सूखकर छोटा रह सकता है। लेकिन इन्हीं महत्वपूर्ण दिनों में कई पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे रहे हैं, जिनसे तापमान गेहूं के अनुकूल रहने की प्रबल संभावना है।
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वर्जन
इन दिनों किसान बेहद सावधान रहें। हालांकि उत्तर भारत में जल्द पश्चिमी विक्षोभ की झड़ी लगने वाली है। एक के बाद एक कई मौसमी तंत्र देशभर में सक्रिय हो सकते हैं। जिनका असर करनाल में भी दिखेगा। पश्चिमी विक्षोभ से प्रेरित परिसंचरण क्षेत्र उत्तर राजस्थान व आसपास के इलाकों पर बनेगा, जिससे करनाल में बादलवाई रहेगी। 16 मार्च से नया मध्यम दर्जे का पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। हरियाणा व पंजाब में इसका असर देखा जा सकता है। इससे 19 मार्च तक बादलवाई व कहीं-कहीं गरज के बीच बिखरी हुई हल्की बारिश की संभावना रहेगी। 22 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है। जिसके कारण करनाल में आंधी के साथ हल्की बारिश संभावित है।
- डॉ.योगेश कुमार, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र, एनडीआरआई, करनाल। (फोटो-1006)
किसानों को ये सलाह
- गेहूं व जौ की फसल में नमी बरक़रार रखें, जरूरत होने पर शाम को हल्की सिंचाई करें।
- स्प्रिंकलर सिंचाई का प्रबंध है तो ये गेहूं व जौ की फसल में सबसे अच्छा सिंचाई प्रबंधन है।
- ये समय बेहद महत्वपूर्ण है, कृषि सलाह से ही गेहूं की फसल में सिंचाई व स्प्रे करें।
- चना व सरसों की कटाई व कढ़ाई करें और उसके भंडारण का विशेष प्रबंध करें।
- गन्ने की बिजाई के लिए उपयुक्त समय है, इसके लिए खेतों को तैयार करें।
- पकी हुई सब्जियों की तुड़वाई करें और फलदार पौधों में जरूरत होने पर सिंचाई करें।