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पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों के काफिले
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206: करनाल के समीप जीटी रोड पर दिल्ली किसान आंदोनल की ओर रवाना होते पंजाब के किसान। अमर उजाला
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पंजाब व उत्तरी हरियाणा की ओर से किसानों के काफिले फिर राष्ट्रीय राजमार्ग से दिल्ली की ओर कूच करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले वर्ष भी इन दिनों कृषि कानूनों के खिलाफ जीटी रोड पर किसानों के ट्रैक्टर-ट्रालियों का काफिला गुजरता रहा। वीरवार पूरे दिन व रात को किसानों के ट्रैक्टर दिल्ली की ओर जाते नजर आए। किसानों ने 26 नवंबर से संसद भवन कूच का एलान किया था। ट्रैक्टर-ट्रालियों में किसान अपने साथ राशन-पानी व खाद्य सामग्री व बिस्तर लादकर ले जा रहे हैं। किसानों के लिए करनाल की सीमा क्षेत्र में ओएसिस पर्यटन केंद्र के समीप तथा बसताड़ा टोल प्लाजा के समीप लंगर की व्यवस्था स्थानीय किसानों की ओर से की गई है।
पिछले साल नवंबर में जब किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे तो कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग की जा रही थी। आंदोलन लंबा चलने से मुद्दे बढ़ गए। अब किसानों की मांग है कि एमएसपी की गारंटी का कानून लागू किया जाए। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी व मुआवजा, सिंघू बॉडर पर किसान शहीद स्मारक बनाया जाए। संशोधित बिजली बिल व पराली जलाने को लेकर बने कानून का भी विरोध है।
कल बैठक में लिया जाएगा आगामी निर्णय
कर्ण लेक के समीप लंगर स्थल पर रुके पंजाब के होशियारपुर जिले के किसानों ने राशन की मदद भी दी। लंगर व्यवस्था के लिए किसान यहां आर्थिक मदद दे रहे हैं। भाकियू नेता बसताड़ा टोल प्लाजा धरना कमेटी अध्यक्ष रामपाल चहल किसानों के बीच पहुंचे। चहल ने कहा कि स्थानीय किसानों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया गया है। 27 नवंबर को सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगामी निर्णय लिए जाएंगे। बैठक में करनाल से भी कई किसान नेता भागीदारी करेंगे। मौके पर शिवचरण सिंह पूनिया, दलविंद्र सिंह, प्रगट सिंह, जीत सिंह, धर्मपाल पाढ़ा, तखविंद्र सिंह दरड़ व अन्य किसान मौजूद रहे।
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करनाल। पंजाब व उत्तरी हरियाणा की ओर से किसानों के काफिले फिर राष्ट्रीय राजमार्ग से दिल्ली की ओर कूच करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले वर्ष भी इन दिनों कृषि कानूनों के खिलाफ जीटी रोड पर किसानों के ट्रैक्टर-ट्रालियों का काफिला गुजरता रहा। वीरवार पूरे दिन व रात को किसानों के ट्रैक्टर दिल्ली की ओर जाते नजर आए। किसानों ने 26 नवंबर से संसद भवन कूच का एलान किया था। ट्रैक्टर-ट्रालियों में किसान अपने साथ राशन-पानी व खाद्य सामग्री व बिस्तर लादकर ले जा रहे हैं। किसानों के लिए करनाल की सीमा क्षेत्र में ओएसिस पर्यटन केंद्र के समीप तथा बसताड़ा टोल प्लाजा के समीप लंगर की व्यवस्था स्थानीय किसानों की ओर से की गई है।
पिछले साल नवंबर में जब किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे तो कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग की जा रही थी। आंदोलन लंबा चलने से मुद्दे बढ़ गए। अब किसानों की मांग है कि एमएसपी की गारंटी का कानून लागू किया जाए। आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के आश्रितों को सरकारी नौकरी व मुआवजा, सिंघू बॉडर पर किसान शहीद स्मारक बनाया जाए। संशोधित बिजली बिल व पराली जलाने को लेकर बने कानून का भी विरोध है।
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कल बैठक में लिया जाएगा आगामी निर्णय
कर्ण लेक के समीप लंगर स्थल पर रुके पंजाब के होशियारपुर जिले के किसानों ने राशन की मदद भी दी। लंगर व्यवस्था के लिए किसान यहां आर्थिक मदद दे रहे हैं। भाकियू नेता बसताड़ा टोल प्लाजा धरना कमेटी अध्यक्ष रामपाल चहल किसानों के बीच पहुंचे। चहल ने कहा कि स्थानीय किसानों से दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया गया है। 27 नवंबर को सिंघू बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में आगामी निर्णय लिए जाएंगे। बैठक में करनाल से भी कई किसान नेता भागीदारी करेंगे। मौके पर शिवचरण सिंह पूनिया, दलविंद्र सिंह, प्रगट सिंह, जीत सिंह, धर्मपाल पाढ़ा, तखविंद्र सिंह दरड़ व अन्य किसान मौजूद रहे।
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