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किसानों के बच्चे बनेंगे इंजीनियर
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जेईई मेन्स पहले चरण का परीक्षा परिणाम जारी हो चुका है। इस बार ज्यादातर किसानों के बच्चों ने परीक्षा पास की है। इंजीनियर बनने का सपना लिए इन बच्चों का कहना है कि वे नई तकनीक से देश को नई दिशा देंगे। देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए जेईई की परीक्षा होती है। पहला चरण पास करने वाले विद्यार्थी दूसरे चरण की परीक्षा देंगे। इसके बाद वे जेईई एडवांस में हिस्सा लेंगे। अंतिम परिणाम के आधार पर ही इन्हें अलग-अलग संस्थानों में दाखिला मिलेगा।
बेहतर परिणाम लाने वाले इन होनहारों के परिवारों में खुशी का माहौल है। इन विद्यार्थियों का कहना है कि अब डिजिटल युग की शुरूआत हो चुकी है। आने वाला समय सिर्फ तकनीक का ही है। ताकि ये मुश्किल राह और आसान हो और देश को नई दिशा मिले।
पहले प्रयास में मिली सफलता
मूल रूप से यूपी के सिदूर क्षेत्र के रहने वाले किसान के बेटे समर्पण ने पहले प्रयास में 99.86 परसेंटाईल से परीक्षा पास की है। उनका कंप्यूटर इंजीनियर बनने का सपना है। करनाल में रहते हुए बेटे ने दिन-रात पढ़ाई की, ताकि वह भी देश के लिए नई तकनीक इजाद कर सके। सफलता का श्रेय उसने अपने गुरुजनों को दिया।
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अंतरिक्ष यात्री बनने की चाह
अंश चौधरी ने 99.13 परसेंटाईल से परीक्षा पास की। वह एयरो स्पेस टॅक्नोलॉजी में बी-टैक करना चाहता है। उसकी इच्छा अंतरिक्ष यात्री बनने की है। किसान का बेटा अंश चौधरी अब जेईई एडवांस की तैयारी में जुटा है। पढ़ाई में परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है।
पिता ने किया प्रेरित
आर्यन दहिया ने 98.91 परसेंटाईल से परीक्षा पास की। रेलवे पुलिस के जवान का बेटा कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है। आर्यन ने बताया कि पिता ने उन्हें लगन से पढ़ाई करने के टिप्स दिए।
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करनाल। जेईई मेन्स पहले चरण का परीक्षा परिणाम जारी हो चुका है। इस बार ज्यादातर किसानों के बच्चों ने परीक्षा पास की है। इंजीनियर बनने का सपना लिए इन बच्चों का कहना है कि वे नई तकनीक से देश को नई दिशा देंगे। देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए जेईई की परीक्षा होती है। पहला चरण पास करने वाले विद्यार्थी दूसरे चरण की परीक्षा देंगे। इसके बाद वे जेईई एडवांस में हिस्सा लेंगे। अंतिम परिणाम के आधार पर ही इन्हें अलग-अलग संस्थानों में दाखिला मिलेगा।
बेहतर परिणाम लाने वाले इन होनहारों के परिवारों में खुशी का माहौल है। इन विद्यार्थियों का कहना है कि अब डिजिटल युग की शुरूआत हो चुकी है। आने वाला समय सिर्फ तकनीक का ही है। ताकि ये मुश्किल राह और आसान हो और देश को नई दिशा मिले।
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पहले प्रयास में मिली सफलता
मूल रूप से यूपी के सिदूर क्षेत्र के रहने वाले किसान के बेटे समर्पण ने पहले प्रयास में 99.86 परसेंटाईल से परीक्षा पास की है। उनका कंप्यूटर इंजीनियर बनने का सपना है। करनाल में रहते हुए बेटे ने दिन-रात पढ़ाई की, ताकि वह भी देश के लिए नई तकनीक इजाद कर सके। सफलता का श्रेय उसने अपने गुरुजनों को दिया।
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अंतरिक्ष यात्री बनने की चाह
अंश चौधरी ने 99.13 परसेंटाईल से परीक्षा पास की। वह एयरो स्पेस टॅक्नोलॉजी में बी-टैक करना चाहता है। उसकी इच्छा अंतरिक्ष यात्री बनने की है। किसान का बेटा अंश चौधरी अब जेईई एडवांस की तैयारी में जुटा है। पढ़ाई में परिवार का पूरा सहयोग मिल रहा है।
पिता ने किया प्रेरित
आर्यन दहिया ने 98.91 परसेंटाईल से परीक्षा पास की। रेलवे पुलिस के जवान का बेटा कंप्यूटर इंजीनियर बनना चाहता है। आर्यन ने बताया कि पिता ने उन्हें लगन से पढ़ाई करने के टिप्स दिए।