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Karnal News: फिलहाल किसानों को नहीं लौटानी होगी मुआवजा राशि
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। एचएसआईआईडीसी की ओर से किसानों से मुआवजा राशि की रिकवरी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दे दिया है। जिससे भू-स्वामियों को तो राहत मिली ही है, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने भूस्वामियों को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की भी अनुमति दे दी है। अब किसानों को मुआवजे की राशि फिलहाल वापस नहीं करनी पड़ेगी।
जिला न्यायालय में भूस्वामियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता चौधरी शक्ति सिंह ने बताया कि शहर के सेक्टर-3 एक्सटेंशन के लिए भूमि अर्जन कलेक्टर ने 23 जून 2009 को जीटी रोड से सटे दो एकड़ तक 15 लाख रुपये और उससे पीछे की भूमि को 12 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। किसानों ने मुआवजे को कम बताते हुए न्यायालय की शरण ली। जिस पर जिला न्यायालय ने 27 अगस्त 2014 को मुआवजा राशि बढ़ाकर 40 लाख 20 हजार 884 रुपए प्रति एकड़ की दर से देने का आदेश दिया था। बढ़ी हुई मुआवजे की आधी राशि का किसानों को भुगतान भी कर दिया गया था।
लेकिन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2022 को जिला न्यायालय के फैसले को निरस्त करते हुए मुआवजा राशि को घटाकर 15 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से देने का फैसला सुना दिया। जिससे भूस्वामियों को झटका लगा और एचएसआईआईडीसी द्वारा भुगतान की गई इससे अधिक राशि की वसूली की चिंता सताने लगी। इस आदेश के खिलाफ याचिका डाली गई थी। जिस पर भूस्वामियों को सुप्रीम कोर्ट से अब स्टे मिल मिल गया है। इन दर्जनों किसानों को फिलहाल तो राहत मिली ही है, आगे भी सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद बढ़ी है।
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करनाल। एचएसआईआईडीसी की ओर से किसानों से मुआवजा राशि की रिकवरी करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दे दिया है। जिससे भू-स्वामियों को तो राहत मिली ही है, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने भूस्वामियों को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की भी अनुमति दे दी है। अब किसानों को मुआवजे की राशि फिलहाल वापस नहीं करनी पड़ेगी।
जिला न्यायालय में भूस्वामियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता चौधरी शक्ति सिंह ने बताया कि शहर के सेक्टर-3 एक्सटेंशन के लिए भूमि अर्जन कलेक्टर ने 23 जून 2009 को जीटी रोड से सटे दो एकड़ तक 15 लाख रुपये और उससे पीछे की भूमि को 12 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। किसानों ने मुआवजे को कम बताते हुए न्यायालय की शरण ली। जिस पर जिला न्यायालय ने 27 अगस्त 2014 को मुआवजा राशि बढ़ाकर 40 लाख 20 हजार 884 रुपए प्रति एकड़ की दर से देने का आदेश दिया था। बढ़ी हुई मुआवजे की आधी राशि का किसानों को भुगतान भी कर दिया गया था।
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लेकिन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 30 सितंबर 2022 को जिला न्यायालय के फैसले को निरस्त करते हुए मुआवजा राशि को घटाकर 15 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से देने का फैसला सुना दिया। जिससे भूस्वामियों को झटका लगा और एचएसआईआईडीसी द्वारा भुगतान की गई इससे अधिक राशि की वसूली की चिंता सताने लगी। इस आदेश के खिलाफ याचिका डाली गई थी। जिस पर भूस्वामियों को सुप्रीम कोर्ट से अब स्टे मिल मिल गया है। इन दर्जनों किसानों को फिलहाल तो राहत मिली ही है, आगे भी सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद बढ़ी है।
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