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ईपीएफओ : अब अपने जन्म महीने में भी जमा करा सकेंगे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र
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गगन तलवार
करनाल। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मासिक पेंशन लेने वाले बुजुर्गों को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें अपने जिंदा होने का प्रमाण यानी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) देने के लिए नवंबर माह का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बल्कि वे अपने जन्म महीने में भी इसे जमा करवा सकेंगे।
कोरोना के कारण सरकारी कार्यालयों में आमजन की आवाजाही बंद हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से बुजुर्ग भी कम ही बाहर निकलते थे। ऐसे में ईपीएफओ ने बुजुर्गों को राहत देते हुए यह निर्णय लिया है। विभाग के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेंशनधारक को साल में एक बार डीएलसी जमा कराना जरूरी है अन्यथा उसकी मासिक पेंशन जारी होनी बंद हो जाती है। अब तक हर साल केवल नवंबर माह में ही ईपीएफओ के पेंशनधारकों को डीएलसी जमा कराना होता था लेकिन अब वे किसी भी महीने में जमा करवा सकते हैं। पूरे साल यह प्रक्रिया चलेगी। ऐसे में जो बुजुर्ग नवंबर माह में डीएलसी जमा नहीं करा पाए वे अब भी करा सकते हैं। उनका यह प्रमाणपत्र अगले वर्ष इसी माह तक मान्य रहेगा। ब्यूरो
आठ जिलों के 52 हजार पेंशनधारकों को राहत
करनाल स्थित ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले करनाल समेत पंचकूला, सोनीपत, पानीपत, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला व यमुनानगर जिले के करीब 52 हजार पेंशनधारकों को हर माह पेंशन जारी होती है। नवंबर के बजाय फरवरी तक भी केवल 30 हजार बुजुर्ग ही डीएलसी जमा करा पाए। यानी 20 हजार बुजुर्गों का अभी डीएलसी नहीं आया है।
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ईपीएफओ कार्यालय, बैंक या सीएससी से होगा काम
डीएलसी अपडेट कराने के लिए विभाग के क्षेत्रीय एवं जिला कार्यालयों के अलावा बैंक और कॉमन सर्विस सेंटर में भी व्यवस्था की गई है। ऐसे में बुजुर्गों के घर के नजदीक जो भी है, वे वहां जाकर अपना डीएलसी जमा करा सकते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। वे किसी भी कार्यदिवस में कार्यालय जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
वर्ष 2020 में लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद हो गया था, उस समय विभाग ने पेंशनधारकों को राहत दी थी कि 2020 में जिसने भी अपना डीएलसी जमा कराया, वह उनकी जन्म तिथि के 12 माह तक मान्य रहेगा। इसी तरह 2021 के मध्य में कोरोना की दूसरी और अंत में तीसरी लहर आ गई। तब भी बुजुर्ग डीएलसी जमा नहीं करा पाए। ऐसे में अब इस व्यवस्था को स्थायी बनाते हुए जन्म महीने में ही डीएलसी देने की सुविधा दी गई है।
- जतिंद्र कुमार संघाले, क्षेत्रीय आयुक्त-1, ईपीएफओ
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करनाल। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने मासिक पेंशन लेने वाले बुजुर्गों को बड़ी राहत दी है। अब उन्हें अपने जिंदा होने का प्रमाण यानी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) देने के लिए नवंबर माह का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बल्कि वे अपने जन्म महीने में भी इसे जमा करवा सकेंगे।
कोरोना के कारण सरकारी कार्यालयों में आमजन की आवाजाही बंद हो गई थी। सुरक्षा के लिहाज से बुजुर्ग भी कम ही बाहर निकलते थे। ऐसे में ईपीएफओ ने बुजुर्गों को राहत देते हुए यह निर्णय लिया है। विभाग के नियमों के अनुसार प्रत्येक पेंशनधारक को साल में एक बार डीएलसी जमा कराना जरूरी है अन्यथा उसकी मासिक पेंशन जारी होनी बंद हो जाती है। अब तक हर साल केवल नवंबर माह में ही ईपीएफओ के पेंशनधारकों को डीएलसी जमा कराना होता था लेकिन अब वे किसी भी महीने में जमा करवा सकते हैं। पूरे साल यह प्रक्रिया चलेगी। ऐसे में जो बुजुर्ग नवंबर माह में डीएलसी जमा नहीं करा पाए वे अब भी करा सकते हैं। उनका यह प्रमाणपत्र अगले वर्ष इसी माह तक मान्य रहेगा। ब्यूरो
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आठ जिलों के 52 हजार पेंशनधारकों को राहत
करनाल स्थित ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले करनाल समेत पंचकूला, सोनीपत, पानीपत, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला व यमुनानगर जिले के करीब 52 हजार पेंशनधारकों को हर माह पेंशन जारी होती है। नवंबर के बजाय फरवरी तक भी केवल 30 हजार बुजुर्ग ही डीएलसी जमा करा पाए। यानी 20 हजार बुजुर्गों का अभी डीएलसी नहीं आया है।
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ईपीएफओ कार्यालय, बैंक या सीएससी से होगा काम
डीएलसी अपडेट कराने के लिए विभाग के क्षेत्रीय एवं जिला कार्यालयों के अलावा बैंक और कॉमन सर्विस सेंटर में भी व्यवस्था की गई है। ऐसे में बुजुर्गों के घर के नजदीक जो भी है, वे वहां जाकर अपना डीएलसी जमा करा सकते हैं। यह प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। वे किसी भी कार्यदिवस में कार्यालय जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
वर्ष 2020 में लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद हो गया था, उस समय विभाग ने पेंशनधारकों को राहत दी थी कि 2020 में जिसने भी अपना डीएलसी जमा कराया, वह उनकी जन्म तिथि के 12 माह तक मान्य रहेगा। इसी तरह 2021 के मध्य में कोरोना की दूसरी और अंत में तीसरी लहर आ गई। तब भी बुजुर्ग डीएलसी जमा नहीं करा पाए। ऐसे में अब इस व्यवस्था को स्थायी बनाते हुए जन्म महीने में ही डीएलसी देने की सुविधा दी गई है।
- जतिंद्र कुमार संघाले, क्षेत्रीय आयुक्त-1, ईपीएफओ