{"_id":"63a76851933a4c2eb60f31eb","slug":"effect-of-gulli-danda-in-wheat-crop-ineffective-even-after-3-sprays-karnal-news-knl131625951","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: गेहूं की फसल में गुल्ली डंडे का प्रभाव, 3 स्प्रे के बाद भी बेअसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: गेहूं की फसल में गुल्ली डंडे का प्रभाव, 3 स्प्रे के बाद भी बेअसर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। गेहूं की फसल में ज्यादा पैदावार लेने के लिए किसानों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। इनमें उनके लिए सबसे बड़ी समस्या गुल्ली डंडे की समाप्ति है। उनकी ओर से तीन-तीन बार कई प्रकार की दवाओं का स्प्रे करने के बाद भी गुल्ली डंडा समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा।
स्थिति यह है कि किसान इस कारण काफी परेशान चल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों की माने तो ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हर वर्ष गेहूं की कटाई के समय बीज झड़ जाता है और फिर यह बीज अगले वर्ष गेहूं की बिजाई के समय ही उगता है। कुछ किसान इस से निजात पाने के लिए गेहूं की बिजाई करने से पहले ही अपने खेत को अच्छी तरह से जोत लेते हैं, जिससे कि यह खरपतवार अच्छी तरह से उग सके।
इसके 10 से 15 दिन के बीच में वह अपने कृषि यंत्रों की ओर से दोबारा से फिर खेत की जुताई कर गेहूं की फसल की बिजाई करते हैं। ऐसा करने से 50 प्रतिशत गुल्ली डंडा खरपतवार का बीज समाप्त हो जाता है। इसके बाद भी जो बचता है उसको समाप्त करने के लिए ही किसान गेहूं के सीजन के चार-पांच महीनों में विभिन्न प्रकार की दवाओं का स्प्रे करने में जुटे रहते हैं, परंतु इस समय भी किसानों के लिए समस्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
इस समस्या का ये है समाधान
स्प्रे करने के साथ-साथ यह दवाओं गेहूं के विकास में भी बाधा उत्पन्न करती हैं। इसलिए सभी किसानों का एकमात्र विश्वास कृषि विभाग के ऊपर ही टिका है। किसानों का कहना है कि विभाग को कृषि वैज्ञानियों के सुझाव कर ऐसी दवा किसानों को बतानी चाहिए। इससे यह खरपतवार भी खत्म हो जाए और फसल को भी नुकसान न हो।
किसान हुकुमचंद ने बताया कि वह ठेके पर जमीन लेकर गेहूं धान की फसल उगाता है। अपनी फसल को उपरोक्त खरपतवार से बचाने के लिए वह भी कई प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल करता है, लेकिन गुल्ली डंडा समाप्त होने का नाम नहीं लेता, बल्कि गेहूं के साथ-साथ यह भी अपने पैर पसारता रहता है, जिसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पड़ता है।
किसान केहर सिंह ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से गेहूं की फसल बो रहे हैं। इस खेत में वह बरसीम की फसल करते हैं, उस खेत में तो अगले वर्ष गुल्ली डंडा नहीं उगता। इसके अलावा अन्य सभी खेतों में वह गेहूं के साथ साथ बढ़ता रहता है। लाख कोशिश करने के बाद भी वह समाप्त नहीं होता। वह चाहते हैं कि सरकार और विभाग की ओर से इस खरपतवार के समाप्ति के लिए कम पैसों में उन्हें अच्छा उत्पाद उपलब्ध हो सके।
किसान राजकुमार ने बताया कि इस खरपतवार से गेहूं की फसल को बचाने के लिए उन्होंने काफी प्रयत्न किए लेकिन उन्हें पूर्ण रूप से सफलता नहीं मिली। इससे निजात पाने के लिए वह फसल चक्र विधि अपनाते हैं तथा हर वर्ष 4 से 5 एकड़ बरसीम की फसल लगाते हैं। परंतु यह समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है।
किसान श्याम सिंह ने बताया कि उनके पास मात्र डेढ़ एकड़ जमीन ही है और वह उसमें गेहूं ही लगाते हैं तथा गेहूं का पूरा सीजन गुल्ली डंडे को समाप्त करने के लिए स्प्रे पंप लेकर लगे रहते हैं। विभाग को किसानों को सुविधा देने के लिए कम खर्च पर गुल्ली डंडा की समाप्ति के लिए किसी अन्य दवाई को तैयार करना चाहिए।
गुल्ली डंडे के खात्मे के लिए गेहूं की बिजाई के तुरंत बाद अवकिरा आदि दवाइयों का स्प्रे कारगर सिद्ध हो रहा है। इसके अलावा संकोर हरबसाइड साल्ट युक्त दवाओं का स्प्रे भी इस खरपतवार के समाप्ति के लिए उपयुक्त है।
-बलविंदर सिंह, एसडीओ, कृषि विभाग।
विज्ञापन
अंबाला सिटी। गेहूं की फसल में ज्यादा पैदावार लेने के लिए किसानों को समस्याओं से जूझना पड़ता है। इनमें उनके लिए सबसे बड़ी समस्या गुल्ली डंडे की समाप्ति है। उनकी ओर से तीन-तीन बार कई प्रकार की दवाओं का स्प्रे करने के बाद भी गुल्ली डंडा समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा।
स्थिति यह है कि किसान इस कारण काफी परेशान चल रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों की माने तो ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हर वर्ष गेहूं की कटाई के समय बीज झड़ जाता है और फिर यह बीज अगले वर्ष गेहूं की बिजाई के समय ही उगता है। कुछ किसान इस से निजात पाने के लिए गेहूं की बिजाई करने से पहले ही अपने खेत को अच्छी तरह से जोत लेते हैं, जिससे कि यह खरपतवार अच्छी तरह से उग सके।
विज्ञापन
इसके 10 से 15 दिन के बीच में वह अपने कृषि यंत्रों की ओर से दोबारा से फिर खेत की जुताई कर गेहूं की फसल की बिजाई करते हैं। ऐसा करने से 50 प्रतिशत गुल्ली डंडा खरपतवार का बीज समाप्त हो जाता है। इसके बाद भी जो बचता है उसको समाप्त करने के लिए ही किसान गेहूं के सीजन के चार-पांच महीनों में विभिन्न प्रकार की दवाओं का स्प्रे करने में जुटे रहते हैं, परंतु इस समय भी किसानों के लिए समस्या बढ़ती जा रही है।
विज्ञापन
इस समस्या का ये है समाधान
स्प्रे करने के साथ-साथ यह दवाओं गेहूं के विकास में भी बाधा उत्पन्न करती हैं। इसलिए सभी किसानों का एकमात्र विश्वास कृषि विभाग के ऊपर ही टिका है। किसानों का कहना है कि विभाग को कृषि वैज्ञानियों के सुझाव कर ऐसी दवा किसानों को बतानी चाहिए। इससे यह खरपतवार भी खत्म हो जाए और फसल को भी नुकसान न हो।
किसान हुकुमचंद ने बताया कि वह ठेके पर जमीन लेकर गेहूं धान की फसल उगाता है। अपनी फसल को उपरोक्त खरपतवार से बचाने के लिए वह भी कई प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल करता है, लेकिन गुल्ली डंडा समाप्त होने का नाम नहीं लेता, बल्कि गेहूं के साथ-साथ यह भी अपने पैर पसारता रहता है, जिसका सीधा असर गेहूं की पैदावार पर पड़ता है।
किसान केहर सिंह ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से गेहूं की फसल बो रहे हैं। इस खेत में वह बरसीम की फसल करते हैं, उस खेत में तो अगले वर्ष गुल्ली डंडा नहीं उगता। इसके अलावा अन्य सभी खेतों में वह गेहूं के साथ साथ बढ़ता रहता है। लाख कोशिश करने के बाद भी वह समाप्त नहीं होता। वह चाहते हैं कि सरकार और विभाग की ओर से इस खरपतवार के समाप्ति के लिए कम पैसों में उन्हें अच्छा उत्पाद उपलब्ध हो सके।
किसान राजकुमार ने बताया कि इस खरपतवार से गेहूं की फसल को बचाने के लिए उन्होंने काफी प्रयत्न किए लेकिन उन्हें पूर्ण रूप से सफलता नहीं मिली। इससे निजात पाने के लिए वह फसल चक्र विधि अपनाते हैं तथा हर वर्ष 4 से 5 एकड़ बरसीम की फसल लगाते हैं। परंतु यह समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है।
किसान श्याम सिंह ने बताया कि उनके पास मात्र डेढ़ एकड़ जमीन ही है और वह उसमें गेहूं ही लगाते हैं तथा गेहूं का पूरा सीजन गुल्ली डंडे को समाप्त करने के लिए स्प्रे पंप लेकर लगे रहते हैं। विभाग को किसानों को सुविधा देने के लिए कम खर्च पर गुल्ली डंडा की समाप्ति के लिए किसी अन्य दवाई को तैयार करना चाहिए।
गुल्ली डंडे के खात्मे के लिए गेहूं की बिजाई के तुरंत बाद अवकिरा आदि दवाइयों का स्प्रे कारगर सिद्ध हो रहा है। इसके अलावा संकोर हरबसाइड साल्ट युक्त दवाओं का स्प्रे भी इस खरपतवार के समाप्ति के लिए उपयुक्त है।
-बलविंदर सिंह, एसडीओ, कृषि विभाग।