{"_id":"a836247d24a780a042d5bc67b256e34d","slug":"education-useful-got-sarpanch-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पढ़ाई आई काम, मिला चौधर का इनाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पढ़ाई आई काम, मिला चौधर का इनाम
ब्यूरो/अमरउजाला, करनाल
Updated Mon, 25 Jan 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बचपन में आठवीं तक की पढ़ाई करना सुषमा के लिए वरदान साबित हुआ है। गांव अबदुल्लापुर के लोगों ने अब उसे सर्वसम्मति से सरपंच चुन लिया है। बीपीएल परिवार से संबंध रखने वाली सुषमा के पति एक ढाबे में वेटर का काम करते हैं। वहीं, सुषमा को भी कभी घरेलू कार्यों से फुरसत नहीं मिली है, लेकिन बचपन के आठ सालों की पढ़ाई ने उसे गांव की सरपंच बना दिया है।
680 मतदाताओं वाले गांव अबदुल्लापुर में इस बार सरपंच का पद एससी श्रेणी में महिलाओं के लिए आरक्षित था। पूरे गांव में एससी श्रेणी से कोई भी महिला पढ़ी लिखी नहीं है। ऐसे में सुषमा द्वारा बचपन की आठ साल की पढ़ाई ने उसे गांव का सरपंच बना दिया है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने भी पूरे गांव की सरकार को ही सर्वसम्मति से चुन लिया है। अब आठवीं पास सुषमा गांव की सरपंच बनी हैं तथा इसके साथ ही कमलेश, पूजा, देवी, बलविंद्र कौर, ऋषिपाल व रामचंद्र को सर्वसम्मति से गांव का पंच चुना गया है।
कभी नहीं सोचा था सरपंच बनूंगी : सुषमा
नवनियुक्त सरपंच सुषमा ने बताया कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस गांव की सरपंच बन जाएगी। गांव के लोगों ने जिस विश्वास के साथ उसे यह जिम्मेदारी सौंपी है, वह हर कीमत पर उसे निभाने का प्रयास करेंगी। उसका कहना है कि वह गांव की हर समस्या से भली भांति परिचित है। इन पांच सालों के कार्यकाल में वह गांव की हर समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
680 मतदाताओं वाले गांव अबदुल्लापुर में इस बार सरपंच का पद एससी श्रेणी में महिलाओं के लिए आरक्षित था। पूरे गांव में एससी श्रेणी से कोई भी महिला पढ़ी लिखी नहीं है। ऐसे में सुषमा द्वारा बचपन की आठ साल की पढ़ाई ने उसे गांव का सरपंच बना दिया है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने भी पूरे गांव की सरकार को ही सर्वसम्मति से चुन लिया है। अब आठवीं पास सुषमा गांव की सरपंच बनी हैं तथा इसके साथ ही कमलेश, पूजा, देवी, बलविंद्र कौर, ऋषिपाल व रामचंद्र को सर्वसम्मति से गांव का पंच चुना गया है।
विज्ञापन
कभी नहीं सोचा था सरपंच बनूंगी : सुषमा
नवनियुक्त सरपंच सुषमा ने बताया कि उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस गांव की सरपंच बन जाएगी। गांव के लोगों ने जिस विश्वास के साथ उसे यह जिम्मेदारी सौंपी है, वह हर कीमत पर उसे निभाने का प्रयास करेंगी। उसका कहना है कि वह गांव की हर समस्या से भली भांति परिचित है। इन पांच सालों के कार्यकाल में वह गांव की हर समस्या का समाधान करने का प्रयास करेगी।
विज्ञापन