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कष्ट निवारण समिति में शिक्षामंत्री ने सुनी लोगों की फरियाद
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जनाब.. कुछ करो। मैं 82 साल का बुढ़ा बीमार हूं। इतने का मेरा प्लाट नहीं है जितने मैने 27 साल में रजिस्ट्री कराने के लिए चक्कर मारते हुए खर्च कर दिए। साहब तहसीलदार ने कई साल पहले मुझसे 50 हजार रुपये मांगे थे, लेकिन गरीब आदमी हूं, कहां से देता? यही वजह है कि आज तक मेरे प्लाट की रजिस्ट्री ही नहीं हो पायी। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में नीलोखेड़ी निवासी बुजुर्ग चुन्नी लाल की फरियाद सुनकर शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुज्जर ने पूछा, पैसे मांगने वाला तहसीलदार कौन था? बुजुर्ग बोला, साहब सालों में छह तहसीलदार बदल गए। अब तो नाम भी याद नहीं। छूटते ही मंत्री बोले फिर कार्रवाई किस पर करूं..?, ऐसे तो सारे नप जाएंगे। एडीसी अनीश कुमार यादव ने मामले की विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद मंत्री ने डीसी निशांत कुमार यादव को एक माह से पहले पहले बुजुर्ग के प्लाट की रजिस्ट्री कराते हुए निपटाने के निर्देश दिए। शुक्रवार को पंचायत भवन में हुई बैठक में पहले दो मामले छह माह पुराने थे। दोनों में ही मंत्री ने दोबारा जांच के निर्देश दिए।
मंत्री बोले, मामला गंभीर एक आदमी 27 साल से चक्कर काट रहा
बुजुर्ग की हालत देखकर और उसकी बात सुनकर शिक्षा मंत्री भी गंभीर हुए। अधिकारियों की तरफ देखते हुए बोले कि कितनी गंभीर बात है कि एक व्यक्ति अपने काम के लिए 27 साल से चक्कर काट रहा है। उसे कहीं न्याय ही नहीं मिला। ऐसा नहीं होना चाहिए। अधिकारी हर काम को गंभीरता से करें। ना ही लोगों को गुमराह होने दें और ना ही उन्हें भटकने दें। प्राथमिकता के आधार पर बुजुर्गों के काम निपटाएं।
मामला नंबर-2
ये है मामला-
एजेंडे में शामिल मामला नंबर दो में नीलोखेड़ी निवासी चुन्नी लाल ने प्लॉट की रजिस्ट्री न होने की शिकायत 10 अगस्त 2019 को की थी। उन्होेंने बताया कि गांव अरजाहेड़ी में एक प्लॉट खरीदा था, तत्कालीन बीडीपीओ और तहसीलदार के बहुत चक्कर काटने के बाद भी उनके प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं हुई, जबकि उन्होंने सभी कागजात पूरे कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि रजिस्ट्री के लिए जमीन की कन्वेक्शन डीड होती है जोकि परिवादी के पास नहीं थी। इसके लिए मंत्री ने उपायुक्त को कहा कि वह अगले एक महीने में इस समस्या का हल करवाएं।
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मामला-1
गुम रसीदों की जांच में दो नई और मिली, अब फिर होगी जांच
बैठक की शुरूआत में सबसे पहला मामला नई मंडी करनाल स्थित गांधी फ्रूट कंपनी का आया। ये मामला भी छह साल पुराना है। पिछली बैठक में मंत्री ने रसीदें गुम होने की बात पर जांच के आदेश दिए थे। इस बार मंडी सचिव सुंदर लाल ने रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि दो नई रसीदें भी मिली हैं। ऐसे में अब फिर दोबारा जांच के निर्देश दिए गए।
हम अपील ही करते रहेंगे, आप पैसे गौशाला में दे दो फिर..
बैठक में जब मंडी सचिव ने अपना पक्ष रखने के बाद कहा कि यदि वे संतुष्ट नहीं है तो मुख्य प्रशासक को भी अपील कर सकते हैं। मंत्री ने भी सहमति जताते हुए जांच के निर्देश दिए। ऐसे में परेशान प्रार्थी ने कहा कि हम सालों से अपील ही करते रहेंगे। आप पैसे गौशाला में दे दो फिर..। अब जांच रिपोर्ट के बाद पाया गया कि दुकान के मालिक ने जो पैसे दिए हैं उनकी रसीद दे दी गई है, परंतु दुकान मालिक ने रसीदों पर नकली होने का आरोप लगाया, जिस पर मंत्री ने रसीदों की जांच करवाने के संबंधित अधिकारी को आदेश दिए और मार्केट कमेटी के मुख्य प्रशासक चंडीगढ़ को जांच के बाद दुकानदार के जमा अधिक पैसे वापस करने के लिए लिखें।
यह है मामला-
बैठक में मामला नंबर-1 सब्जी मंडी स्थित गांधी फ्रूट कंपनी का था। प्रार्थी ने कहा कि अलॉट की गई दुकानों की सारी किश्तें हमने जमा करवा दी थी, लेकिन एक किश्त मार्केट कमेटी के अधिकारी ने पैसे वसूलने के बाद भी अपने खातों में जमा नहीं की। इस कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पिछली बैठक में एसडीएम नरेंद्र मलिक ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि मार्केट कमेटी के सुपरवाइजर ललित कुमार द्वारा रसीद बुक नंबर 37 व 118 के माध्यम से प्राप्त की गई लगभग एक करोड़ 47 लाख रुपये की राशि कार्यालय में जमा नहीं करवाई गयी। बाद में ऑडिट जांच के दौरान 2 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि जमा न होने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी बताया था कि दोषी सुपरवाइजर द्वारा 1.47 करोड़ रुपये की राशि मार्केट कमेटी के कार्यालय में जमा करवा दी गई है, लेकिन दुकानदारों के पास उपलब्ध और पुलिस के रिकॉर्ड में उपलब्ध रसीदों का मिलान न होने के कारण इस राशि को समायोजित नहीं किया जा सका है।
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मंत्री बोले, मामला गंभीर एक आदमी 27 साल से चक्कर काट रहा
बुजुर्ग की हालत देखकर और उसकी बात सुनकर शिक्षा मंत्री भी गंभीर हुए। अधिकारियों की तरफ देखते हुए बोले कि कितनी गंभीर बात है कि एक व्यक्ति अपने काम के लिए 27 साल से चक्कर काट रहा है। उसे कहीं न्याय ही नहीं मिला। ऐसा नहीं होना चाहिए। अधिकारी हर काम को गंभीरता से करें। ना ही लोगों को गुमराह होने दें और ना ही उन्हें भटकने दें। प्राथमिकता के आधार पर बुजुर्गों के काम निपटाएं।
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मामला नंबर-2
ये है मामला-
एजेंडे में शामिल मामला नंबर दो में नीलोखेड़ी निवासी चुन्नी लाल ने प्लॉट की रजिस्ट्री न होने की शिकायत 10 अगस्त 2019 को की थी। उन्होेंने बताया कि गांव अरजाहेड़ी में एक प्लॉट खरीदा था, तत्कालीन बीडीपीओ और तहसीलदार के बहुत चक्कर काटने के बाद भी उनके प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं हुई, जबकि उन्होंने सभी कागजात पूरे कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि रजिस्ट्री के लिए जमीन की कन्वेक्शन डीड होती है जोकि परिवादी के पास नहीं थी। इसके लिए मंत्री ने उपायुक्त को कहा कि वह अगले एक महीने में इस समस्या का हल करवाएं।
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मामला-1
गुम रसीदों की जांच में दो नई और मिली, अब फिर होगी जांच
बैठक की शुरूआत में सबसे पहला मामला नई मंडी करनाल स्थित गांधी फ्रूट कंपनी का आया। ये मामला भी छह साल पुराना है। पिछली बैठक में मंत्री ने रसीदें गुम होने की बात पर जांच के आदेश दिए थे। इस बार मंडी सचिव सुंदर लाल ने रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि दो नई रसीदें भी मिली हैं। ऐसे में अब फिर दोबारा जांच के निर्देश दिए गए।
हम अपील ही करते रहेंगे, आप पैसे गौशाला में दे दो फिर..
बैठक में जब मंडी सचिव ने अपना पक्ष रखने के बाद कहा कि यदि वे संतुष्ट नहीं है तो मुख्य प्रशासक को भी अपील कर सकते हैं। मंत्री ने भी सहमति जताते हुए जांच के निर्देश दिए। ऐसे में परेशान प्रार्थी ने कहा कि हम सालों से अपील ही करते रहेंगे। आप पैसे गौशाला में दे दो फिर..। अब जांच रिपोर्ट के बाद पाया गया कि दुकान के मालिक ने जो पैसे दिए हैं उनकी रसीद दे दी गई है, परंतु दुकान मालिक ने रसीदों पर नकली होने का आरोप लगाया, जिस पर मंत्री ने रसीदों की जांच करवाने के संबंधित अधिकारी को आदेश दिए और मार्केट कमेटी के मुख्य प्रशासक चंडीगढ़ को जांच के बाद दुकानदार के जमा अधिक पैसे वापस करने के लिए लिखें।
यह है मामला-
बैठक में मामला नंबर-1 सब्जी मंडी स्थित गांधी फ्रूट कंपनी का था। प्रार्थी ने कहा कि अलॉट की गई दुकानों की सारी किश्तें हमने जमा करवा दी थी, लेकिन एक किश्त मार्केट कमेटी के अधिकारी ने पैसे वसूलने के बाद भी अपने खातों में जमा नहीं की। इस कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पिछली बैठक में एसडीएम नरेंद्र मलिक ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि मार्केट कमेटी के सुपरवाइजर ललित कुमार द्वारा रसीद बुक नंबर 37 व 118 के माध्यम से प्राप्त की गई लगभग एक करोड़ 47 लाख रुपये की राशि कार्यालय में जमा नहीं करवाई गयी। बाद में ऑडिट जांच के दौरान 2 करोड़ 34 लाख रुपये की राशि जमा न होने की बात सामने आई है। उन्होंने यह भी बताया था कि दोषी सुपरवाइजर द्वारा 1.47 करोड़ रुपये की राशि मार्केट कमेटी के कार्यालय में जमा करवा दी गई है, लेकिन दुकानदारों के पास उपलब्ध और पुलिस के रिकॉर्ड में उपलब्ध रसीदों का मिलान न होने के कारण इस राशि को समायोजित नहीं किया जा सका है।