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Karnal News: 68 प्रतिशत गांवों में बढ़ रहे नशे के मरीज

Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 23 Nov 2025 12:56 AM IST
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Drug addiction is increasing in 68 percent of villages.
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिले के 68 प्रतिशत गांवों में नशे के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में 10 गांव ऐसे हैं जो वर्ष 2022 से नशे की गिरफ्त में हैं। यहां सबसे ज्यादा मरीज हैं और यह स्थिति आज तक बरकरार है। इनमें टपराना, खेड़ीसर्फली, राहड़ा, बांसा, खांडा खेड़ी, सौंकड़ा, चंद्राव, डाचर, गोंदर और असंध गांव शामिल हैं।
ये गांव पिछले चार साल से नशामुक्त नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों इलाकों में नशे की आसान उपलब्धता और पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ रही नशे की लत ने इन इलाकों में स्थिति को और गंभीर बना दिया है। वहीं, तीन महीनों में इन गावों में 29 नए गांव जुड़े हैं। अब स्थिति यह है कि 40 से 55 या 60 वर्ष तक के लोग सबसे ज्यादा भांग का नशा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि लगभग हर गांव में भांग के पौधे खेतों में मौजूद हैं, इसलिए इस नशे तक पहुंच बेहद आसान हो चुकी है। इसी आसान उपलब्धता ने गांव के माहौल को ऐसा बना दिया है कि लोग रोजमर्रा की आदत के रूप में भांग का नशा कर रहे हैं। इसके पीछे का कारण खेतों और झाड़ियों में भांग खुद उगना भी है।
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जिला नागरिक अस्पताल से काउंसलर हर्षित का कहना है कि जिले में कुल 435 गांवों में आधे से ज्यादा गांवों में लोग भांग का नशा कर रहे हैं। कई ग्रामीण लोग इसे काटने या हटाने की जरूरत ही नहीं समझते। ऐसे में यह नशा बिना किसी रोकटोक के पीढ़ियों तक पहुंच रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की आसान उपलब्धता ने नशे का दायरा और गहरा कर दिया है।
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- बड़े-बुजुर्गों को देखकर बच्चे भी आ रहे चपेट में

स्थिति और चिंताजनक तब हो गई है जब गांवों में बड़े-बुजुर्गों को देखकर उनके 17 से अधिक वर्ष की उम्र के बच्चे व युवा भी भांग का नशा करने लगे हैं। काउंसलिंग कराने आ रहे लोगों का कहना है कि उत्सुकता या समूह में दबाव के चलते युवा भांग चखने लगे हैं और धीरे-धीरे यह आदत उनके व्यवहार में शामिल होती जा रही है। विशेषज्ञ इसे पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ती नशे की लत के रूप में देख रहे हैं।




घर-परिवार की चिंता और आर्थिक तंगी के कारण करते हैं नशा

नागरिक अस्पताल से मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक का कहना है कि काउंसलिंग में अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधिक होते हैं जिन्हें पूरा उपचार दिया जाता है। लेकिन यह मरीज के ऊपर ही निर्भर करता है कि वे अपनी मानसिकता पर नियंत्रण करना चाहते हैं या नहीं। कई बार काउंसलिंग पूरी होने के बाद दोस्तों के बहकावे में आकर दोबारा नशा शुरू कर देते हैं तो कुछ घर-परिवार की चिंताओं के कारण और आर्थिक तंगी के चलते शुरू करते हैं।
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