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स्मार्ट होगी कर्णनगरी की पेयजल व्यवस्था

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Jul 2022 02:15 AM IST
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Drinking water system of Karnanagari will be smart
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। कर्णनगरी में करीब 450 किमी लंबी पेयजल पाइप लाइन है, हालांकि इसमें पाइप लाइन का काफी हिस्सा दशकों पुराना है, जिसे बदलने का प्रयास किया जा रहा है और आने वाले दिनों में पर्यवेक्षी नियंत्रण और डाटा अधिग्रहण प्रणाली (स्काडा) के तहत पेयजलापूर्ति की व्यवस्था स्मार्ट हो जाएगी। इसमें पूरी पाइप लाइन, पंपिंग सेट और घरों में आपूर्ति के जंक्शन बॉक्स आदि पर सेंसर लगाए जाएंगे। जिससे पेयजलापूर्ति बाधित होने, लीकेज होने की तत्काल सूचना इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) को मिलेगी और कुछ ही देर में पेयजलापूर्ति को दुरुस्त करा दिया जाएगा।
शहर में पेयजलापूर्ति को स्काडा के तहत जोड़ने की योजना को करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने कई साल पहले ही बनाई थी, लेकिन ये सिरे नहीं चढ़ सकी है। प्रोजेक्ट को भी तैयार कर स्वीकृति ले ली गई थी। टेंडर भी जारी करने की तैयारी कर ली, लेकिन ये प्रोजेक्ट टलता ही रहा। अब स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पास भी बेहद कम समय रह गया है। अतिरिक्त मिले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने हैं, इसलिए अब स्काडा को लागू करने के प्रोजेक्ट से स्मार्ट सिटी ने खुद हाथ खड़े कर दिए हैं, लेकिन वह इसका बजट करीब 38 करोड़ रुपये निर्माणदायी संस्था को देगी। नगर निगम ने स्काडा को लागू करने का प्रोजेक्ट अपने हाथों में ले लिया है। 22 जुलाई को नगर निगम हाउस की बैठक में ये प्रस्ताव रखा गया, जिसे पारित भी कर दिया गया है। हालांकि अभी तक स्मार्ट सिटी ने इसके लिए बजट जारी नहीं किया है। नगर निगम के जेई संजीत कुमार ने बताया कि शहर में करीब 450 किमी लंबी पेयजल पाइप लाइन है, करीब छह किमी पाइप लाइन बेहद खराब हो चुकी है, जिसे बदलने का कार्य किया जा रहा है।
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क्या होगा फायदा
करनाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड की महाप्रबंधक रमेश मढ़ान ने बताया कि स्काडा अत्याधुनिक तकनीक है। जिसके तहत नगर की पेयजल पाइप लाइनों, पंपिंग सेट, जंक्शन बॉक्स, सप्लाई बॉक्स के साथ-साथ जहां से घरों को लाइनें जाती हैं, उन लाइनों पर भी सेंसर लगाए जाएंगे। कहीं भी पाइप लाइन लीकेज होने, फटने, बाधित होने आदि की दशा में तत्काल सेंसर के माध्यम से आईसीसीसी को सूचना स्वयं चली जाएगी। इसके साथ-साथ ये भी पता लग सकेगा कि किस घर को कितना पानी मिला, कितने का उपयोग किया गया, कितना पानी व्यर्थ चला गया, ये सारी सूचनाएं आईसीसीसी में दर्ज हो सकेंगी। पूरी पाइप लाइन को एक ही स्थान से नियंत्रित किया जा सकेगा। आईसीसीसी में सूचना आते ही संबंधित विभाग के अधिकारी को मैसेज जाएगा और खराबी को दुरुस्त करा दिया जाएगा।
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बोर्ड में तो स्काडा को लागू करने का प्रस्ताव पारित हो गया है, लेकिन जब स्मार्ट सिटी इसके लिए धन जारी करेगा, उसके बाद ही इसकी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। सर्वे के आधार पर तय किया जाएगा कि कहां कितने सेंसर लगेंगे। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
- महिपाल सिंह, मुख्य अभियंता नगर निगम करनाल
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