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कंप्यूटर शिक्षा की बैटरी डाउन
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Wed, 06 Aug 2014 12:42 AM IST
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भले ही शिक्षा विभाग आधुनिक शिक्षा का दावा कर रहा हो, लेकिन यह शिक्षा
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योजना धरातल पर है। आधुनिक शिक्षा देने के नाम पर जिलेभर के सरकारी स्कूल
में स्थापित की गई लैबों में कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं।
हालात इतने बुरे हो गए हैं कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को कंप्यूटर के बारे में कोई ज्ञान नहीं है। जिले में कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां पर कंप्यूटर लैब तो है, लेकिन बच्चों ने आज तक कंप्यूटर को ऑन-ऑफ तक करके नहीं देखा है।
यह है जिले में कंप्यूटरों की स्थिति
जिले में 782 स्कूल हैं जिनमें से सेकेंडरी तथा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तीन कंपनियों की 173 लैब हैं। इनमें करीब 3440 सिस्टम व 2680 बैटरी लगी हैं। इन लैब मेें हजाराें बैटरियां ठप होने से अनेकों सिस्टम बंद पड़े हैं। बच्चे तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने की बाट जोह रहे हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही व कंपनियों के ढुलमुल रवैये के चलते सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कंप्यूटर शिक्षा से वंचित हैं।
इन कंपनियों को सौंपी गई थी जिम्मेदारी
कोर कंपनी : की सबसे अधिक 130 लैब हैं। हर लैब में 22 सिस्टम व 16 बैटरियां लगी हैं। कुल मिलाकर 2880 सिस्टम व 2080 बैटरी लगी है। इनमें से कई लैब बंद पड़ी हैं। एचसीएल की 33 लैब हैं। हर लैब में 10 सिस्टम व 14 बैटरियां लगी हैं। इनमें से 112 बैटरियां व 80 सिस्टम बंद पड़े हैं। अमरोन कंपनी की दस लैब हैं। हर लैब में 25 सिस्टम व 14 बैटरी लगी हैं। इनमें से तीन लैब बंद होने के कारण 75 सिस्टम व 42 बैटरी डंप हो चुकी हैं।
प्रदेश में लगे 2622 कंप्यूटर सहायक
निजी कंपनी द्वारा प्रदेश में 2622 कंप्यूटर सहायक लगाए गए हैं। जिले में करीब 140 कंप्यूटर सहायक लगे हैं। जो पिछले 26 महीने से वेतन न मिलने के कारण कई महीने कक्षाओं का बहिष्कार किया और कुछ महीने कभी कभार ही स्कूल जाते थे। इससे संभाल न होने से सिस्टम खराब हो गए।
इनको मात्र 120 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाना है, जिसके चलते 25 जून से आठ जुलाई तक धरना प्रदर्शन के बाद विभाग ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छह महीने का वेतन दिया है। करनाल में 173 कंप्यूटर टीचर पोस्ट हैं जिनमें से 151 टीचर वर्तमान में लगे हैं।
अध्यापक बैटरियां को दफ्तर के कार्य के लिए भी प्रयोग करते हैं, जिससे बैटरियां लोड मान कर ठप हो जाती हैं। विभाग ने बैटरियां इन्वर्टर के लिए नहीं बल्कि विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देने की लिए लगाई गई हैं, लेकिन कुछ स्कूलों में इनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोट
जिले में डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर होता है। यदि किसी को कोई समस्या है तो वह डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर से संपर्क कर अपनी समस्या को दूर कर सकता है।
- आशा मुंजाल, जिला शिक्षा अधिकारी करनाल।
हालात इतने बुरे हो गए हैं कि सरकारी स्कूलों के बच्चों को कंप्यूटर के बारे में कोई ज्ञान नहीं है। जिले में कई स्कूल तो ऐसे हैं, जहां पर कंप्यूटर लैब तो है, लेकिन बच्चों ने आज तक कंप्यूटर को ऑन-ऑफ तक करके नहीं देखा है।
यह है जिले में कंप्यूटरों की स्थिति
जिले में 782 स्कूल हैं जिनमें से सेकेंडरी तथा सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तीन कंपनियों की 173 लैब हैं। इनमें करीब 3440 सिस्टम व 2680 बैटरी लगी हैं। इन लैब मेें हजाराें बैटरियां ठप होने से अनेकों सिस्टम बंद पड़े हैं। बच्चे तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने की बाट जोह रहे हैं, लेकिन विभाग की लापरवाही व कंपनियों के ढुलमुल रवैये के चलते सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी कंप्यूटर शिक्षा से वंचित हैं।
इन कंपनियों को सौंपी गई थी जिम्मेदारी
कोर कंपनी : की सबसे अधिक 130 लैब हैं। हर लैब में 22 सिस्टम व 16 बैटरियां लगी हैं। कुल मिलाकर 2880 सिस्टम व 2080 बैटरी लगी है। इनमें से कई लैब बंद पड़ी हैं। एचसीएल की 33 लैब हैं। हर लैब में 10 सिस्टम व 14 बैटरियां लगी हैं। इनमें से 112 बैटरियां व 80 सिस्टम बंद पड़े हैं। अमरोन कंपनी की दस लैब हैं। हर लैब में 25 सिस्टम व 14 बैटरी लगी हैं। इनमें से तीन लैब बंद होने के कारण 75 सिस्टम व 42 बैटरी डंप हो चुकी हैं।
प्रदेश में लगे 2622 कंप्यूटर सहायक
निजी कंपनी द्वारा प्रदेश में 2622 कंप्यूटर सहायक लगाए गए हैं। जिले में करीब 140 कंप्यूटर सहायक लगे हैं। जो पिछले 26 महीने से वेतन न मिलने के कारण कई महीने कक्षाओं का बहिष्कार किया और कुछ महीने कभी कभार ही स्कूल जाते थे। इससे संभाल न होने से सिस्टम खराब हो गए।
इनको मात्र 120 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाना है, जिसके चलते 25 जून से आठ जुलाई तक धरना प्रदर्शन के बाद विभाग ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छह महीने का वेतन दिया है। करनाल में 173 कंप्यूटर टीचर पोस्ट हैं जिनमें से 151 टीचर वर्तमान में लगे हैं।
अध्यापक बैटरियां को दफ्तर के कार्य के लिए भी प्रयोग करते हैं, जिससे बैटरियां लोड मान कर ठप हो जाती हैं। विभाग ने बैटरियां इन्वर्टर के लिए नहीं बल्कि विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देने की लिए लगाई गई हैं, लेकिन कुछ स्कूलों में इनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
कोट
जिले में डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर होता है। यदि किसी को कोई समस्या है तो वह डिस्ट्रिक्ट कोआर्डिनेटर से संपर्क कर अपनी समस्या को दूर कर सकता है।
- आशा मुंजाल, जिला शिक्षा अधिकारी करनाल।