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Karnal News: डॉक्टरों की हड़ताल के साथ बढ़ी मरीजों की परेशानी
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डॉक्टरों की हड़ताल के साथ बढ़ी मरीजों की परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल बढ़ने के साथ मरीजों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। तीसरे दिन भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पाई। हालात यह हैं कि न तो जरूरी जांच हो पा रही है और न ही सर्जरी। तीन दिनों में 100 से अधिक अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन व 50 से ज्यादा ऑपरेशन टले हैं। ऐसे में मरीज निजी अस्पतालों की ओर से रुख करने लगे हैं। सबसे अधिक गर्भवती और हादसों में गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी होने लगी है।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन दिन से गर्भवती महिलाएं अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि इनके अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों से कराए जा रहे हैं लेकिन इमरजेंसी केस और अन्य बीमारियों के पीड़ित मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। सामान्य हालात में दिन में करीब 30 से 35 अल्ट्रासाउंड होते थे। इसी तरह से रोजाना 15 सर्जरी होती थी, इनमें से भी एक भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में हड़ताल खत्म होने पर अस्पताल में अत्यधिक भार पड़ सकता है। अल्ट्रासाउंड और सर्जरी के लिए इंतजार बढ़ने का अनुमान है। हड़ताल के कारण प्रसव भी केवल 3 से 7 हो पा रहे हैं। जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 15 तक संख्या पहुंच जाती थी। बुधवार को 7 ही प्रसव हुए। चार सीजेरियन और तीन सामान्य। मंगलवार को केवल दो ही प्रसव हुए थे। हड़ताल के तीसरे दिन नागरिक अस्पताल की ओपीडी में 1,553 रही, जबकि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल 4,084 मरीज पहुंचे।
गंभीर चोट से जुड़े मरीजों को परेशानी अधिक
सड़क हादसों, पेट दर्द, ब्लीडिंग, चोट से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों के लिए सीटी स्कैन तुरंत करना जरूरी होता है। हड़ताल के कारण जांच बंद रहने से इन गंभीर मामलों में भी कुछ नहीं हो पा रहा है। इन मरीजों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है। हर दिन जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 15 से 20 सर्जरी हो जाती थीं, बुधवार को केवल 4 ही हुईं। आईपीडी में 41 मरीज भर्ती हुए और आईसीयू में दो का ही उपचार हो पाया।
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मेडिकल कॉलेज में होंगे अल्ट्रासाउंड
सुबह से दोपहर तक मरीज अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर खड़े होकर वापस लौट रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल में अल्ट्रासाउंड कराना तय किया है। वीरवार से जिला अस्पताल से मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा। गर्भवती के अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर भी कराए जा रहे हैं। जिले में करीब 10 केंद्रों के साथ स्वास्थ्य विभाग का अनुबंध है।
- अल्ट्रासाउंड कराने सुबह से केंद्र के बाहर खड़ी
मधुबन से आई एक महीने से गर्भवती संगीता ने बताया कि पर्ची तो काट दी लेकिन सुबह से केंद्र के बाहर खड़े होने के बावजूद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। पहले से ही तबियत ठीक नहीं है यहां खड़े होकर और बिगड़ रही है।
- आकर पता चला नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
गीता ने बताया कि अपनी गर्भवती बहू का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यहां आए थे। लेकिन यहां आकर पता चला कि अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं। डॉक्टर बोल रहे हैं कि बिना अल्ट्रासाउंड के जांच नहीं कर सकती हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कहां जाएं।
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इमरजेंसी में आए मरीजों को अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के लिए मेडिकल कॉलेज में रेफर करने की व्यवस्था की है। गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों में भेजा जा रहा है। इंद्री, असंध, करनाल के निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में पर्ची बनाकर गर्भवती महिलाओं को भेज रहे हैं। व्यवस्था सुचारू रूप से चलाई जा रही है। मरीजों को दिक्कत न आए, इसलिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की यहां तैनाती की गई है। -डॉ. पूनम चौधरी, सीएमओ, करनाल
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करनाल। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों की हड़ताल बढ़ने के साथ मरीजों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। तीसरे दिन भी मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पाई। हालात यह हैं कि न तो जरूरी जांच हो पा रही है और न ही सर्जरी। तीन दिनों में 100 से अधिक अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन व 50 से ज्यादा ऑपरेशन टले हैं। ऐसे में मरीज निजी अस्पतालों की ओर से रुख करने लगे हैं। सबसे अधिक गर्भवती और हादसों में गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी होने लगी है।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन दिन से गर्भवती महिलाएं अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि इनके अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों से कराए जा रहे हैं लेकिन इमरजेंसी केस और अन्य बीमारियों के पीड़ित मरीजों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। सामान्य हालात में दिन में करीब 30 से 35 अल्ट्रासाउंड होते थे। इसी तरह से रोजाना 15 सर्जरी होती थी, इनमें से भी एक भी नहीं हो पा रही है। ऐसे में हड़ताल खत्म होने पर अस्पताल में अत्यधिक भार पड़ सकता है। अल्ट्रासाउंड और सर्जरी के लिए इंतजार बढ़ने का अनुमान है। हड़ताल के कारण प्रसव भी केवल 3 से 7 हो पा रहे हैं। जबकि सामान्य दिनों में रोजाना 15 तक संख्या पहुंच जाती थी। बुधवार को 7 ही प्रसव हुए। चार सीजेरियन और तीन सामान्य। मंगलवार को केवल दो ही प्रसव हुए थे। हड़ताल के तीसरे दिन नागरिक अस्पताल की ओपीडी में 1,553 रही, जबकि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल 4,084 मरीज पहुंचे।
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गंभीर चोट से जुड़े मरीजों को परेशानी अधिक
सड़क हादसों, पेट दर्द, ब्लीडिंग, चोट से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों के लिए सीटी स्कैन तुरंत करना जरूरी होता है। हड़ताल के कारण जांच बंद रहने से इन गंभीर मामलों में भी कुछ नहीं हो पा रहा है। इन मरीजों को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा है। हर दिन जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 15 से 20 सर्जरी हो जाती थीं, बुधवार को केवल 4 ही हुईं। आईपीडी में 41 मरीज भर्ती हुए और आईसीयू में दो का ही उपचार हो पाया।
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मेडिकल कॉलेज में होंगे अल्ट्रासाउंड
सुबह से दोपहर तक मरीज अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर खड़े होकर वापस लौट रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कल्पना चावला राजकीय मेडिकल में अल्ट्रासाउंड कराना तय किया है। वीरवार से जिला अस्पताल से मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाएगा। गर्भवती के अल्ट्रासाउंड निजी केंद्रों पर भी कराए जा रहे हैं। जिले में करीब 10 केंद्रों के साथ स्वास्थ्य विभाग का अनुबंध है।
- अल्ट्रासाउंड कराने सुबह से केंद्र के बाहर खड़ी
मधुबन से आई एक महीने से गर्भवती संगीता ने बताया कि पर्ची तो काट दी लेकिन सुबह से केंद्र के बाहर खड़े होने के बावजूद भी अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। पहले से ही तबियत ठीक नहीं है यहां खड़े होकर और बिगड़ रही है।
- आकर पता चला नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
गीता ने बताया कि अपनी गर्भवती बहू का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए यहां आए थे। लेकिन यहां आकर पता चला कि अल्ट्रासाउंड नहीं किए जा रहे हैं। डॉक्टर बोल रहे हैं कि बिना अल्ट्रासाउंड के जांच नहीं कर सकती हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कहां जाएं।
इमरजेंसी में आए मरीजों को अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के लिए मेडिकल कॉलेज में रेफर करने की व्यवस्था की है। गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों में भेजा जा रहा है। इंद्री, असंध, करनाल के निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में पर्ची बनाकर गर्भवती महिलाओं को भेज रहे हैं। व्यवस्था सुचारू रूप से चलाई जा रही है। मरीजों को दिक्कत न आए, इसलिए मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की यहां तैनाती की गई है। -डॉ. पूनम चौधरी, सीएमओ, करनाल