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डॉक्टरों को नहीं भा रहा करनाल जिला
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Thu, 29 Oct 2015 12:22 AM IST
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प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में की गई एमबीबीएस डॉक्टरों की भर्ती के बावजूद जिले में डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो पाई है। हकीकत यह है कि कभी डॉक्टरों की प्रथम च्वाइस रहा करनाल सिटी अब डॉक्टरों को रास नहीं आ रहा है। गत दिनों स्वास्थ्य विभाग की ओर से 13 डॉक्टर करनाल जिले में भेजे गए, पर इनमें से मात्र तीन डॉक्टरों ने ज्वाइन किया, बाकी ने करनाल ज्वाइन ही नहीं किया। इतना ही नहीं जिन तीन डॉक्टरों ने ज्वाइन किया था, वे भी अपने गृह जिलों में ट्रांसफर कराकर चले गए हैं।
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सबसे ज्यादा नुकसान पीएचसी में
इसका सबसे ज्यादा नुकसान गांवों में स्थित पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) व असंध के अस्पताल को हुआ है। क्योंकि ये सभी 13 डॉक्टर पीएससी और असंध के अस्पताल के लिए भेजे गए थे। असंध के लिए पांच डॉक्टर भेजे गए थे। प्रदेश सरकार द्वारा दो माह पहले ही डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। डिमांड के अनुसार, करनाल जिले में स्वास्थ्य विभाग के निदेशक द्वारा 13 डॉक्टर भेजे गए, लेकिन इसी दौरान विभाग द्वारा संबंधित डॉक्टरों को अपने जिलों में पोस्टिंग की छूट दे दी गई।
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ऐसे में सितंबर माह में केवल तीन डॉक्टरों अरविंद कुमार पानीपत, जितेंद्र कुमार कुरुक्षेत्र, सुनील कुमार यमुनानगर ने करनाल में ड्यूटी ज्वाइन की। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टरों द्वारा नौकरी छोड़े जाने के कारण उन्हें गृह जिला में जाने की छूट दी गई, ताकि उन्हें परेशानी न आए और वे सेवा में बने रहें। इस कारण अब ये भी अपने गृह जिलों में चले गए हैं। इनके अलावा एक और अहम बात यह है कि करनाल जिले के भी तीन डॉक्टरों का नौकरी में चयन हुआ है, लेकिन वे अपने गृह जिले में नौकरी नहीं करना चाहते।
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जीटी रोड है डॉक्टरों को पसंद
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि डॉक्टरों को गांवों में पीएससी में ड्यूटी पसंद नहीं है। इसलिए वे जीटी रोड स्थित कस्बों को तवज्जो देते हैं। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नीलोखेड़ी में 11 पद स्वीकृत हैं और सभी भरे हुए हैं। इसी प्रकार तरावड़ी सीएचसी में 4 पद हैं, चारों भरे हैं। घरौंडा अस्पताल में सात पोस्ट हैं और पांच भरी हैं।
जीटी रोड से दूर कस्बों में नहीं जा रहे डॉक्टर
जिले में कुल सात सीएचसी हैं और 19 पीएसची हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो जीटी रोड से दूर कस्बों के अस्पतालों में डाक्टर नहीं जाना चाहते। इसका प्रमाण है इंद्री अस्पताल में 6 पद स्वीकृत हैं, लेकिन चार ही भरे हैं, दो खाली हैं। असंध में 12 पद मान्य हैं, लेकिन मात्र तीन डाक्टर यहां सेवाएं दे रहे हैं और 9 पद खाली हैं। निसिंग सीएचसी में तीन में से एक पद भरा है। पीएसची की बात करें तो नियमानुसार यहां पर दो डॉक्टर तैनात होते हैं, पर ज्यादातर में एक एक डाक्टर से ही काम चलाया जा रहा है।
ये है जिले में डॉक्टरों की स्थिति
स्थान स्वीकृत पद- भरे पद
करनाल 100 35
नीलोखेड़ी 11 11
तरावड़ी 4 4
घरौंडा 7 5
इंद्री 6 4
असंध 12 3
निसिंग- 3 1
निगदू 4 1
ये भेजे गए थे करनाल
नाम स्थान
अमनदीप सिंह- पीएससी बड़ौता
अरविंद कुमार-पीएसी जलमाना
-ललित कुमार-ट्रामा सेंटर
-जतिंद्र कुमार-पीएससी बरसत
-संजीव कुमार- पालीक्नीक सेक्टर-16
-वैशाली मलिक, जीएच असंध।
-विजय कुमार, पीएचसी उपलाना
विजय -पीएचसी गगसीना
गौरव जैन- पीएचसी चौरा
मनोज कुमार- जीएच असंध
मोनिका-जीएच असंध।
प्रदीप-जीएच असंध।
सुनील- जीएच असंध
फिर कैसे होगा इलाज
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह हाल तो सीएम के शहर का है, अन्य शहरों के हालात कैसे होंगे? जब डॉक्टर ही नहीं होंगे तो बीमारियों से पार कैसे पाया जाएगा। एक तरफ डेंगू और मलेरिया के मरीज बढ़ रहे हैं और विभाग कुछ नहीं कर पा रहा है, वहीं अब सर्दी बढ़ने और मौसम बदलने से भी बीमारियों की संख्या बढ़नी है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के पास इन बीमारियों से लड़ने के लिए पर्याप्त डॉक्टर ही नहीं है। इसलिए मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
वर्जन
डॉक्टरों की कमी का मामला उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। वर्तमान स्थिति से भी अवगत कराया गया है। प्रयास है कि जल्द ही जिले के लिए अन्य डॉक्टर तैनात कराए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
डॉ. एसएल वर्मा, सिविल सर्जन