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करोड़ों खर्च करने पर भी शहर गंदा
कैथल
Updated Sun, 12 Jan 2014 12:05 AM IST
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नगर परिषद का क्षेत्र भले ही फैल रहा है लेकिन यहां सफाई व्यवस्था के संबंध में कोई ब्लू प्रिंट तैयार नहीं है। न ही सफाई व्यवस्था को लेकर कोई मॉनीटरिंग का सिस्टम है। यह कोई आरोप नहीं है बल्कि स्वयं नगर परिषद द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में स्वीकार किया है।
सफाई अभियान कमेटी ने नगर परिषद से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी जिसमें यह खुलासा हुआ है। शहर में साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अव्यवस्था का आलम है। अब सफाई अभियान समिति ने न्यायालय की शरण ली है जिसमें 10 जनवरी को पेशी में तीन विभागों के अधिकारियों ने उपस्थित होकर जवाब दिया लेकिन डीसी द्वारा इस केस में कोई जवाब दायर नहीं किया गया है।
सफाई अभियान कमेटी के संयोजक पुनीत चौधरी एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने शहर में सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए नगर परिषद से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। जवाब में परिषद द्वारा बताया गया है कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए कोई ब्लू प्रिंट तैयार नहीं किया गया है। सात बीट बांटकर सफाई करवाई जाती है। नियमित कर्मचारियों के अलावा आउट सोर्सिंग से सफाई करवाई जा रही है लेकिन वर्ष 1990 के बाद से लेकर अब तक नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए जाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है।
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शहर में सफाई सुपरवाइजर का पद लगभग एक साल से तो सफाई इंस्पेक्टरों के पद कई साल से खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं जवाब में यह भी स्वीकार किया गया है कि शहर में पशुओं की डेयरी के गोबर आदि को डिस्पोज-ऑफ करने की कोई योजना उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा शहर में निशक्तों और महिलाओं के लिए परिषद द्वारा कोई शौचालय नहीं बनाया गया है। न ही वर्तमान में कोई शौचालय बनाए जाने की योजना है। सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग के बारे में भी परिषद में कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं परिषद में सफाई कर्मचारियों की ट्रेनिंग बारे में भी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
रैलियों से बताएंगे लोगों को सच
सफाई अभियान समिति के संयोजक ने कहा कि परिषद द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल है जिस कारण उन्हें मजबूरन इस मामले में न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है। 10 जनवरी को पेशी के दौरान नगर परिषद, वन विभाग की ओर से अधिकारी पेश हुए लेकिन डीसी कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि इस बारे में शहर में जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी ताकि शहर के लोगों को इस बारे में जानकारी दी जा सके।
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सफाई अभियान कमेटी ने नगर परिषद से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी जिसमें यह खुलासा हुआ है। शहर में साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद अव्यवस्था का आलम है। अब सफाई अभियान समिति ने न्यायालय की शरण ली है जिसमें 10 जनवरी को पेशी में तीन विभागों के अधिकारियों ने उपस्थित होकर जवाब दिया लेकिन डीसी द्वारा इस केस में कोई जवाब दायर नहीं किया गया है।
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सफाई अभियान कमेटी के संयोजक पुनीत चौधरी एडवोकेट ने बताया कि उन्होंने शहर में सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए नगर परिषद से आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी थी। जवाब में परिषद द्वारा बताया गया है कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए कोई ब्लू प्रिंट तैयार नहीं किया गया है। सात बीट बांटकर सफाई करवाई जाती है। नियमित कर्मचारियों के अलावा आउट सोर्सिंग से सफाई करवाई जा रही है लेकिन वर्ष 1990 के बाद से लेकर अब तक नियमित कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए जाने का कोई प्रयास नहीं हुआ है।
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शहर में सफाई सुपरवाइजर का पद लगभग एक साल से तो सफाई इंस्पेक्टरों के पद कई साल से खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं जवाब में यह भी स्वीकार किया गया है कि शहर में पशुओं की डेयरी के गोबर आदि को डिस्पोज-ऑफ करने की कोई योजना उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा शहर में निशक्तों और महिलाओं के लिए परिषद द्वारा कोई शौचालय नहीं बनाया गया है। न ही वर्तमान में कोई शौचालय बनाए जाने की योजना है। सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग के बारे में भी परिषद में कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इतना ही नहीं परिषद में सफाई कर्मचारियों की ट्रेनिंग बारे में भी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
रैलियों से बताएंगे लोगों को सच
सफाई अभियान समिति के संयोजक ने कहा कि परिषद द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल है जिस कारण उन्हें मजबूरन इस मामले में न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है। 10 जनवरी को पेशी के दौरान नगर परिषद, वन विभाग की ओर से अधिकारी पेश हुए लेकिन डीसी कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि इस बारे में शहर में जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी ताकि शहर के लोगों को इस बारे में जानकारी दी जा सके।