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धान की सीधी बिजाई : समय की बचत, घटेगा खर्चा
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जितेंद्र सक्सेना
करनाल। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन, मजदूरों की कमी और अधिक लागत के कारण सरकार की ओर से किसानों को धान की सीधी बुआई की सलाह दी जा रही है। कृषि विभाग के मुताबिक धान की सीधी बुआई में जहां पानी की आवश्यकता कम होती है, वहीं लागत भी कम आती है, जबकि फसल उत्पादन अच्छा होता है। भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए जागरूक कर रहे हैं।
धान की सीधी बुआई यानी डीएसआर एक प्रक्रिया है। इसमें पानी और लागत कम लगती है और मजदूरों की भी अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके अलावा धान की सीधी बुआई से मिट्टी की बार-बार जुताई भी नहीं करनी पड़ती है। इससे सूक्ष्म जीवों को भी लाभ पहुंचता है। कम लागत में अधिक उत्पादन के फार्मूले को देखते हुए जीटी बेल्ट के कई किसानों ने गांवों में इस बार सीधी बुआई की है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए बुआई की ये विधि काफी कारागार साबित होगी।
कृषि विभाग के एडीओ सुनील कुमार का कहना है कि डायरेक्ट सीडिड राइस (डीएसआर) विधि में खेत तैयार करते समय खेत का समतलीकरण अच्छी तरह से करें, क्योंकि ऊंचा-नीचा खेत होने पर धान का जमाव एक समान नहीं हो पाता। खेत में जल निकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें। खेत में प्रति एकड़ डीएपी 20 किलोग्राम, यूरिया110 किलोग्राम, पोटाश 40 किलोग्राम और जिंक सल्फेट यदि 21 प्रतिशत है तो 10 किलोग्राम और यदि 33 प्रतिशत है तो करीब छह किलोग्राम डालना चाहिए। खेत में सीधी बुआई करने के बाद 24 घंटे में शाम को 1300 से 1500 मिली पेंडीमेथलिन नाम की खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए। इससे किसानों को खरपतवार से छुटकारा मिल सकता है।
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धान की सीधी बिजाई के फायदे
- प्रति एकड़ 6 किलो बीज दोनों पद्धतियों में लगता है
- रोपाई के लिए लगाए जाने वाले पैसों की बचत होगी
- ट्रैक्टर से लेव करवाने की जरूरत नहीं
- पानी की भी 35 प्रतिशत बचत होगी
- भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए ये तकनीक बेहतर
- पौध तैयार करने की आवश्यकता नहीं, नर्सरी का खर्च बचता है
बुआई की विधि
बीजों की बुआई दो मुख्य तरीके से की जाती है। एक छिड़काव विधि और दूसरी निश्चित दूरी पर पंक्ति से बुआई विधि। बीजों की बुआई पौधे की बढ़वार, बीज का आकार, बीज की मिट्टी में गहराई आदि पर निर्भर करता है। बुआई की अन्य कई विधियां हैं, जो फसल के स्वभाव और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करतीं हैं।
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पिछले दो साल से डीएसआर तकनीक से धान की खेती कर रहे हैं। इस तकनीक में सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत होती है। इसके अलावा खेतों में कीचड़ भी नहीं होता। मजदूरों की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। मैंने अभी 14 एकड़ में धान की सीधी बुआई की है।
---राजदीप, किसान
पिछले दो साल से डीएसआर तकनीक से खेती कर रहे हैं। इस तकनीक से धान की पैदावार अच्छी होती है। फसल में बीमारी का खतरा कम होता है और फसल की जड़ भी मजबूत होती है। भविष्य में पानी की कमी को देखते हुए धान की सीधी बुआई की प्रक्रिया बेहतर साबित होगी। मैंने अभी 6 एकड़ में धान की सीधी बुआई की है।
--स्वर्ण सिंह, किसान, रामदास नगर
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करनाल। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन, मजदूरों की कमी और अधिक लागत के कारण सरकार की ओर से किसानों को धान की सीधी बुआई की सलाह दी जा रही है। कृषि विभाग के मुताबिक धान की सीधी बुआई में जहां पानी की आवश्यकता कम होती है, वहीं लागत भी कम आती है, जबकि फसल उत्पादन अच्छा होता है। भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को धान की सीधी बिजाई के लिए जागरूक कर रहे हैं।
धान की सीधी बुआई यानी डीएसआर एक प्रक्रिया है। इसमें पानी और लागत कम लगती है और मजदूरों की भी अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके अलावा धान की सीधी बुआई से मिट्टी की बार-बार जुताई भी नहीं करनी पड़ती है। इससे सूक्ष्म जीवों को भी लाभ पहुंचता है। कम लागत में अधिक उत्पादन के फार्मूले को देखते हुए जीटी बेल्ट के कई किसानों ने गांवों में इस बार सीधी बुआई की है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए बुआई की ये विधि काफी कारागार साबित होगी।
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कृषि विभाग के एडीओ सुनील कुमार का कहना है कि डायरेक्ट सीडिड राइस (डीएसआर) विधि में खेत तैयार करते समय खेत का समतलीकरण अच्छी तरह से करें, क्योंकि ऊंचा-नीचा खेत होने पर धान का जमाव एक समान नहीं हो पाता। खेत में जल निकासी की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर लें। खेत में प्रति एकड़ डीएपी 20 किलोग्राम, यूरिया110 किलोग्राम, पोटाश 40 किलोग्राम और जिंक सल्फेट यदि 21 प्रतिशत है तो 10 किलोग्राम और यदि 33 प्रतिशत है तो करीब छह किलोग्राम डालना चाहिए। खेत में सीधी बुआई करने के बाद 24 घंटे में शाम को 1300 से 1500 मिली पेंडीमेथलिन नाम की खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए। इससे किसानों को खरपतवार से छुटकारा मिल सकता है।
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धान की सीधी बिजाई के फायदे
- प्रति एकड़ 6 किलो बीज दोनों पद्धतियों में लगता है
- रोपाई के लिए लगाए जाने वाले पैसों की बचत होगी
- ट्रैक्टर से लेव करवाने की जरूरत नहीं
- पानी की भी 35 प्रतिशत बचत होगी
- भविष्य में पानी की आवश्यकता को देखते हुए ये तकनीक बेहतर
- पौध तैयार करने की आवश्यकता नहीं, नर्सरी का खर्च बचता है
बुआई की विधि
बीजों की बुआई दो मुख्य तरीके से की जाती है। एक छिड़काव विधि और दूसरी निश्चित दूरी पर पंक्ति से बुआई विधि। बीजों की बुआई पौधे की बढ़वार, बीज का आकार, बीज की मिट्टी में गहराई आदि पर निर्भर करता है। बुआई की अन्य कई विधियां हैं, जो फसल के स्वभाव और मौजूदा परिस्थितियों पर निर्भर करतीं हैं।
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पिछले दो साल से डीएसआर तकनीक से धान की खेती कर रहे हैं। इस तकनीक में सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत होती है। इसके अलावा खेतों में कीचड़ भी नहीं होता। मजदूरों की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। मैंने अभी 14 एकड़ में धान की सीधी बुआई की है।
---राजदीप, किसान
पिछले दो साल से डीएसआर तकनीक से खेती कर रहे हैं। इस तकनीक से धान की पैदावार अच्छी होती है। फसल में बीमारी का खतरा कम होता है और फसल की जड़ भी मजबूत होती है। भविष्य में पानी की कमी को देखते हुए धान की सीधी बुआई की प्रक्रिया बेहतर साबित होगी। मैंने अभी 6 एकड़ में धान की सीधी बुआई की है।
--स्वर्ण सिंह, किसान, रामदास नगर