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Karnal News: मां शांकुभरी मंदिर पर लगे मेले में उमड़े श्रद्धालु
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मूनक। गांव अलावाला में चौदस के मौके पर मां शाकुंभरी देवी का मेला लगा, जिसमें श्रद्धालुओं ने माथा टेक अपनी मनोकामनाएं मांगी। मान्यता है कि इस तीर्थ पर अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां पर पूजा की थी वह रात यहीं पर गुजारी थी। उसी से यह भी कुरुक्षेत्र के उन तीर्थ में शामिल है।
पंडित सतनारायण शास्त्री ने बताया कि गांव में मां भगवती शाकुंभरी देवी का मंदिर है और मां भगवती यानी भद्रकाली का स्वरूप है। मां भगवती के बारे में उनकी कथा पुराने समय में एक दुर्गम नाम का राक्षस था, उसने मन विचार किया कि क्यों न मैं वेदों को चुरा लूं और उससे ऐसा किया कि उसे ब्रह्मा जी की तपस्या आरंभ कर बहुत वर्षों के बाद ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए। ब्रह्मा जी की सेवा कर वेदों को मांग लिया। वरदान पाने के बाद उसने ब्राह्मणों, संतो, ऋषियों और देवताओं पर अत्याचार शुरू कर दिया । अंत में सभी देवताओं ने मां भगवती की श्रुति की तब मां जगदंबे प्रकट हुई और दुर्गम के साथ युद्ध करने के लिए तैयार हुई, तो दुर्गम ने अपनी विशाल सेना भेजी युद्ध होने लगा परंतु मां जगदंबे ने दुर्गम की सेना को पराजित कर दिया। अंत में दुर्गम राक्षस मां जगदंबे से युद्ध करने लगा तो इस समय उसका वध किया और चारों वेदों को ग्रहण करके ब्रह्मा जी को दिया। सभी देवी देवताओं ने मां जगदंबा की श्रुति की। मां भगवती जगदंबा ने वनस्पति फल फूल सहित आशीर्वाद दिया। तब से मां जगदंबा का रूप शांकुभरी विख्यात हुई। गांव के तीर्थ मंदिर पर मन से मांगी गई मनोकामना पूर्ण होती है। गांव अलावला में दूर-दूर से मन्नत मांगने के लिए मां भगवती के मंदिर में आकर अपनी मनोकामना कामना पूर्ण करते हैं। गांव के लोग नवरात्रों में अश्वनी मास में व चैत मास में आए नवरात्रों में चौदस के दिन भंडारा लगते हैं। इसी मंदिर में बड़े तपस्वी श्री बाबा भगवान की भी मान्यता है, जो वह भी मांग की मनोकामना पूर्ण करते हैं। गांव के सभी जाति इसकी पूजा करते हैं। इसकी कमेटी के दौरान इनकी जिम्मेदारी होती है।
गांव के सरपंच अजीत कुमार ने बताया कि जो भी श्रद्धालु मां से मन्नत मांगता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। गांव के कबुल राणा, ईशम राणा, कुलदीप राणा, सतपाल सूबेदार, जगमोहन, कंवरपाल, करण सिंह, नरपाल, अक्षय वर्मा, विजय बहादुर, राधा कृष्ण, शिव कुमार ने बताया कि सरकार सभी तीर्थों को नवीन करण कर रही है ताकि यह हमारी धरोहर जो कि त्यों बनी रहे और लोगों की श्रद्धा इसमें बनी रहे । लोगों की मान्यताएं पूरी होती रहे।
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पंडित सतनारायण शास्त्री ने बताया कि गांव में मां भगवती शाकुंभरी देवी का मंदिर है और मां भगवती यानी भद्रकाली का स्वरूप है। मां भगवती के बारे में उनकी कथा पुराने समय में एक दुर्गम नाम का राक्षस था, उसने मन विचार किया कि क्यों न मैं वेदों को चुरा लूं और उससे ऐसा किया कि उसे ब्रह्मा जी की तपस्या आरंभ कर बहुत वर्षों के बाद ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए। ब्रह्मा जी की सेवा कर वेदों को मांग लिया। वरदान पाने के बाद उसने ब्राह्मणों, संतो, ऋषियों और देवताओं पर अत्याचार शुरू कर दिया । अंत में सभी देवताओं ने मां भगवती की श्रुति की तब मां जगदंबे प्रकट हुई और दुर्गम के साथ युद्ध करने के लिए तैयार हुई, तो दुर्गम ने अपनी विशाल सेना भेजी युद्ध होने लगा परंतु मां जगदंबे ने दुर्गम की सेना को पराजित कर दिया। अंत में दुर्गम राक्षस मां जगदंबे से युद्ध करने लगा तो इस समय उसका वध किया और चारों वेदों को ग्रहण करके ब्रह्मा जी को दिया। सभी देवी देवताओं ने मां जगदंबा की श्रुति की। मां भगवती जगदंबा ने वनस्पति फल फूल सहित आशीर्वाद दिया। तब से मां जगदंबा का रूप शांकुभरी विख्यात हुई। गांव के तीर्थ मंदिर पर मन से मांगी गई मनोकामना पूर्ण होती है। गांव अलावला में दूर-दूर से मन्नत मांगने के लिए मां भगवती के मंदिर में आकर अपनी मनोकामना कामना पूर्ण करते हैं। गांव के लोग नवरात्रों में अश्वनी मास में व चैत मास में आए नवरात्रों में चौदस के दिन भंडारा लगते हैं। इसी मंदिर में बड़े तपस्वी श्री बाबा भगवान की भी मान्यता है, जो वह भी मांग की मनोकामना पूर्ण करते हैं। गांव के सभी जाति इसकी पूजा करते हैं। इसकी कमेटी के दौरान इनकी जिम्मेदारी होती है।
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गांव के सरपंच अजीत कुमार ने बताया कि जो भी श्रद्धालु मां से मन्नत मांगता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। गांव के कबुल राणा, ईशम राणा, कुलदीप राणा, सतपाल सूबेदार, जगमोहन, कंवरपाल, करण सिंह, नरपाल, अक्षय वर्मा, विजय बहादुर, राधा कृष्ण, शिव कुमार ने बताया कि सरकार सभी तीर्थों को नवीन करण कर रही है ताकि यह हमारी धरोहर जो कि त्यों बनी रहे और लोगों की श्रद्धा इसमें बनी रहे । लोगों की मान्यताएं पूरी होती रहे।
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