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Karnal News: गड़बड़ी के बाद भी हैफेड डीएम ने दिलाया था राइस मिलर को धान
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। असंध में करोड़ों के धान घोटाले में फंसे दो राइस मिलर्स को हैफेड की ओर से सीएमआर यानी कस्टम मिल्ड राइस अनुबंध के तहत धान दिया गया था। पूर्व में दोनों राइस मिल ने सीएमआर अनुबंध के तहत चावल की आपूर्ति नहीं दी थी। ऐसे में उन्हें धान नहीं दिया जाना चाहिए था। हैफेड डीएम के प्रयासों से इस गड़बड़ी के बावजूद दोनों राइस मिलर्स को धान दिया गया।
हैफेड और राइस मिल के बीच सीएमआर यानी कस्टम मिल्ड राइस अनुबंध होता है। इसमें राइस मिल को धान का चावल निकालने के बाद उसे सरकार के गोदामों में पहुंचाना होता है। इस प्रक्रिया के बदले राइस मिल को भुगतान किया जाता है। भौतिक सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर हैफेड के प्रबंध निदेशक ने डीएम अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन्हें पंचकूला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। हैफेड की प्राथमिक जांच के बाद अब सरकार और प्रशासन ने विभागीय जांच शुरू करा दी है। मामले में कुछ अन्य चेहरे भी सामने आ सकते हैं। विभागीय जांच के बाद अब सीएम फ्लाइंग ने भी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
ऐसे सामने आया घोटाला
असंध क्षेत्र की दो राइस मिलों की जांच में 33052 क्विंटल की कमी पाई गई। मामले की शिकायत असंध गांव के रिसालवा गांव निवासी राजीव ने जिला प्रबंधक, खरीद एजेसियों, विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों को की। इसमें असंध के दो राइस मिलों पर धान खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी कर बाहर से धान खरीद कर सीएमआर की पूर्ति करने के आरोप लगाए गए। दूसरी ओर धान घोटाले पर डीसी ने राइस मिलों के भौतिक सत्यापन के आदेश दिए। जिस पर हैफेड के स्टोरकीपर अशोक कुमार ने दोनों राइस मिलों की जांच की और रिपोर्ट में कार्रवाई के लिए लिखा।
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दो नवंबर को दोनों मिलों में जाकर भौतिक सत्यापन में सामने आया कि अग्रवाल एंड संस राइस मिल असंध को कुल 39,460 बैग धान दिया गया था। मौके पर सिर्फ 13,220 ही बैग मिले। यहां 9,840 क्विंटल धान कम मिला। राधे राधे राइस मिल को कुल 1,48,113 बैग धान के दिए गए थे। सत्यापन के दौरान मौके पर 86,215 बैग ही मिले। यहां 23,212 क्विंटल धान कम मिला। 2800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कम पाए गए धान की कीमत 9 करोड़ 25 लाख 45 हजार 600 रुपये बताई गई।
खुल रहीं घोटाले की परतें
धान खरीद लगभग समाप्त होने पर है इधर घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। धान के भौतिक सत्यापन में चार राइस मिलों में करोड़ों का धान पहले ही कम पाया गया था। ये चारों राइस मिल खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से आवंटन वाले थे लेकिन अब हैफेड की ओर से आवंटित दो और राइस मिलों में 9.25 करोड़ रुपये का धान कम पाया गया है।
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करनाल। असंध में करोड़ों के धान घोटाले में फंसे दो राइस मिलर्स को हैफेड की ओर से सीएमआर यानी कस्टम मिल्ड राइस अनुबंध के तहत धान दिया गया था। पूर्व में दोनों राइस मिल ने सीएमआर अनुबंध के तहत चावल की आपूर्ति नहीं दी थी। ऐसे में उन्हें धान नहीं दिया जाना चाहिए था। हैफेड डीएम के प्रयासों से इस गड़बड़ी के बावजूद दोनों राइस मिलर्स को धान दिया गया।
हैफेड और राइस मिल के बीच सीएमआर यानी कस्टम मिल्ड राइस अनुबंध होता है। इसमें राइस मिल को धान का चावल निकालने के बाद उसे सरकार के गोदामों में पहुंचाना होता है। इस प्रक्रिया के बदले राइस मिल को भुगतान किया जाता है। भौतिक सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर हैफेड के प्रबंध निदेशक ने डीएम अमित कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन्हें पंचकूला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। हैफेड की प्राथमिक जांच के बाद अब सरकार और प्रशासन ने विभागीय जांच शुरू करा दी है। मामले में कुछ अन्य चेहरे भी सामने आ सकते हैं। विभागीय जांच के बाद अब सीएम फ्लाइंग ने भी मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।
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ऐसे सामने आया घोटाला
असंध क्षेत्र की दो राइस मिलों की जांच में 33052 क्विंटल की कमी पाई गई। मामले की शिकायत असंध गांव के रिसालवा गांव निवासी राजीव ने जिला प्रबंधक, खरीद एजेसियों, विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों को की। इसमें असंध के दो राइस मिलों पर धान खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी कर बाहर से धान खरीद कर सीएमआर की पूर्ति करने के आरोप लगाए गए। दूसरी ओर धान घोटाले पर डीसी ने राइस मिलों के भौतिक सत्यापन के आदेश दिए। जिस पर हैफेड के स्टोरकीपर अशोक कुमार ने दोनों राइस मिलों की जांच की और रिपोर्ट में कार्रवाई के लिए लिखा।
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दो नवंबर को दोनों मिलों में जाकर भौतिक सत्यापन में सामने आया कि अग्रवाल एंड संस राइस मिल असंध को कुल 39,460 बैग धान दिया गया था। मौके पर सिर्फ 13,220 ही बैग मिले। यहां 9,840 क्विंटल धान कम मिला। राधे राधे राइस मिल को कुल 1,48,113 बैग धान के दिए गए थे। सत्यापन के दौरान मौके पर 86,215 बैग ही मिले। यहां 23,212 क्विंटल धान कम मिला। 2800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कम पाए गए धान की कीमत 9 करोड़ 25 लाख 45 हजार 600 रुपये बताई गई।
खुल रहीं घोटाले की परतें
धान खरीद लगभग समाप्त होने पर है इधर घोटाले की परतें लगातार खुल रही हैं। धान के भौतिक सत्यापन में चार राइस मिलों में करोड़ों का धान पहले ही कम पाया गया था। ये चारों राइस मिल खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से आवंटन वाले थे लेकिन अब हैफेड की ओर से आवंटित दो और राइस मिलों में 9.25 करोड़ रुपये का धान कम पाया गया है।