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Karnal News: मामूली तकनीकी आधार पर क्लेम न देना गलत, बीमा कंपनी पर जुर्माना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:47 AM IST
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Denying a claim on minor technical grounds is wrong; insurance company fined.
करनाल। बीमा कंपनियों की ओर से प्रीमियम कमाने में दिलचस्पी रखने और दावों से बचने की कोशिश करने संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की टिप्पणी को आधार बनाते हुए जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस लिमिटेड को पीड़ित को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 31,754 रुपये का इलाज खर्च, मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 20 हजार रुपये व मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर 11 हजार रुपये देने का आदेश दिया। आयोग ने बीमा कंपनी के दावे को मनमाने ढंग से खारिज करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा माना।
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आयोग ने अपने फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि बीमा कंपनियां केवल प्रीमियम कमाने में रुचि रखती हैं जो आजकल काफी अधिक हैं लेकिन अपनी देनदारियों का निर्वहन करने में टालमटोल करती हैं। बड़ी संख्या में मामलों में बीमा कंपनियां प्रभावित लोगों को अपने वास्तविक दावों के लिए लड़ने पर मजबूर करती हैं। वे ऐसे मामलों में समझौतों के उन खंडों पर भरोसा करती हैं, जिन पर व्यक्ति आमतौर पर पॉलिसी लेते समय बिना पढ़े हस्ताक्षर कर देता है। बीमा कंपनियों के लिए यह एक चलन बन गया है कि वे झूठे आश्वासन देकर पॉलिसी जारी करती हैं और जब बीमित राशि का दावा किया जाता है, तो ऐसे बहाने बनाती हैं।
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आयोग के फैसले के अनुसार, बालू निवासी गुरविंदर कौर 18 अगस्त 2023 को हाइपरपायरेक्सिया (तेज बुखार), उल्टी, यूआरआई और यूटीआई जैसी बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं और 24 अगस्त 2023 को डिस्चार्ज हुईं। इलाज के बाद उन्होंने बीमा कंपनी के पास 31,754 रुपये का क्लेम प्रस्तुत किया लेकिन कंपनी ने इसे तकनीकी आधारों पर खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना था कि मेडिकल रिकॉर्ड में यदि कोई त्रुटि है तो उसकी जिम्मेदारी इलाज करने वाले डॉक्टर की होती है न कि मरीज की।
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45 दिन में भुगतान करने के निर्देश
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत बिल और रसीदों को बीमा कंपनी ने न तो नकारा और न ही उनका खंडन किया। ऐसे में यह स्पष्ट है कि दावा वास्तविक था और इसे खारिज करना उचित नहीं था। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना। इसके बाद फैसले में आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिए कि वे शिकायतकर्ता को 31,754 रुपये की क्लेम राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके 31 हजार रुपये की मुआवजा राशि भी आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए।
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