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Karnal News: कर्णनगरी की दीपा ने तीन जिलों में जलाया आत्मनिर्भरता का दीपक

Tue, 18 Nov 2025 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Tue, 18 Nov 2025 02:12 AM IST
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Deepa of Karnanagari lit the lamp of self-reliance in three districts
कर्णनगरी की दीपा ने तीन जिलों में जलाया आत्मनिर्भरता का दीपक
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत से घरेलू व सामाजिक स्थिति में तेजी से सुधार कर रही हैं। इनमें से कई अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा रही हैं। संगोही गांव निवासी दीपा सैनी भी इनमें शामिल हैं। पिछले आठ साल से स्वयं सहायता समूह से जुड़कर वह अन्य महिलाओं को जूट के बैग बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। तीन जिलों में उन्होंने प्रशिक्षण शिविर लगाए हैं। चार हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।
दीपा ने बताया कि वह वर्ष 2017 में समूह से जुड़ी थीं। विभिन्न चीजें बनाने और सिलाई करने का शौक था। शादी के बाद पति के सामने इच्छा जाहिर कि वह समूह से जुड़कर कार्य करना चाहती हैं। शुरुआत में कुछ साल स्वयं प्रशिक्षण लिया। इसके बाद 50 हजार रुपये का ऋण लेकर गांव में ही काम करने की शुरुआत की। 10 महिलाओं के साथ शुरू किया गया बैग बनाने का काम मेहनत से बढ़ता गया। छह साल बाद स्वयं की दुकान बनाकर बड़े स्तर पर बैंग बनाने की शुरुआत की।
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दीपा अपने समूह की महिला सचिव हैं। साथ ही ग्राम संस्था से जुड़कर स्थानीय विकास कार्यों में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं। दीपा ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़कर जिंदगी में काफी बदलाव देखने को मिला है, पहले हर छोटे खर्चे के लिए पति व परिवार पर निर्भर रहना पड़ता था लेकिन आज इतनी सक्षम हैं कि परिवार का आर्थिक रूप से सहारा बन पा रही हैं। उनके समूह में शामिल हर ग्रामीण महिला में आत्मविश्वास बढ़ा है।
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दस समूहों की महिलाओं को दे रहीं प्रशिक्षण

दीपा तीन जिलों पानीपत, यमुनानगर, अंबाला में ग्रामीण महिलाओं को बैग बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। करीब चार हजार से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण पाकर स्वयं का काम भी शुरू कर चुकी हैं। दीपा ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए समझाना काफी मुश्किल होता है। महिलाएं अपने घरों से निकलने में भी डरती हैं। ऐसे में महिलाओं की और उनके परिवार की काउंसिलिंग भी की जाती है। वर्तमान में वह स्वयं के गांव में 10 समूहों की महिलाओं को जूट बैग बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।




हर महिला को 15 हजार रुपये की आमदनी
ग्रामीण महिलाओं के लिए घर से निकल आत्मनिर्भर बनना बहुत मुश्किल होता है। शुरू में काफी कम ऑर्डर मिला करते थे। कम ऑर्डर होने पर भी आत्मविश्वास को बनाए रखा और काम पर ही ध्यान रखा। कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से उनके सामान की साख बाजार में बनाई। उनके बनाए बैगों की मांग अच्छी है। उन्होंने बताया कि हर महिला लगभग एक माह में 15 हजार की आमदनी कर रही हैं। इसके अलावा समय-समय पर एमडीडी बाल भवन में किशोरियों को बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि हर लड़की अपने हुनर के बल पर आत्मनिर्भर बने।
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