फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Dairy industry is providing employment: Dr. PankajSearch for this on

डेयरी उद्योग उपलब्ध करा रहा रोजगार : डॉ. पंकज

Sat, 28 Sep 2024 04:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 28 Sep 2024 04:47 AM IST
विज्ञापन
Dairy industry is providing employment: Dr. PankajSearch for this on
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

करनाल। सफल डेयरी फार्मिंग व्यवसाय शुरू करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के कृषि विज्ञान में केंद्र में बिहार राज्य के किसानों के लिए उन्नत डेयरी प्रबंधन पर चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर प्रशिणार्थियों को प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने कहा कि वर्तमान में युवकों को स्वरोजगार देने में डेयरी उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

डॉ.पंकज कुमार सारस्वत ने कहा कि कृषि क्षेत्र में पशु पालकों एवं उद्यमियों को व्यवसाय समझने, लक्ष्य निर्धारित करने और शीघ्रता से गति प्राप्त करने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। प्रशिक्षण में डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि बिहार राज्य के देशी एवं संकर गाय और भैंस में दूध उत्पादन की क्षमता राष्ट्रीय औसत से कम है। अत: बिहार राज्य में नस्ल सुधार करना अति आवश्यक है। दुधारू पशुओं में नस्ल सुधार के लिए सुनियोजित नस्ल सुधार को अपनाना आवश्यक है। जो शुद्ध देशी गाय एवं मुर्राह भैंस के लिए चयनात्मक पशु प्रजनन विधि तथा अवर्णित गाय को शुद्ध देशी नस्ल जैसे साहीवाल, गिर के द्वारा ग्रेडिंग अप किया जा सकता है।
विज्ञापन


बिहार में संकरण के लिए विदेशी नस्ल जर्सी उत्तम है। संकर गाय में विदेशी नस्ल का जीन का स्तर 50 से 62.5 के मध्य होना चाहिए। जो किसान साधन सम्पन्न है वे 62.5 प्रतिशत तक अनुवांशिकता स्तर रख सकते है। डेरी अर्थशास्त्र के डॉ. अनिल कुमार दीक्षित ने बताया कि दूध उत्पादन के साथ-साथ दूध का सही विपणन लाभदायक डेयरी के लिए आवश्यक है। सही विपणन के लिए उत्पादित दूध का आकर्षक पैकेजिंग, उचित लेवेलिंग, गुणवत्ता का प्रचार एवं योग्य ग्राहक तक पहुँच बनाना आवश्यक है। डॉ. रमेश चंद्रा ने कहा कि बेहतर आवास दुधारू पशुओं के कुल दूध उत्पादन को प्रभावित करता है, इसलिए संकर एवं अधिक दूध देने वाली गाय के लिए उत्तम आवास आवश्यक है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार ने डेयरी पालन में सूखे चारे की महत्ता पर ज्ञान देते हुए बताया कि गेहूं का भूसा, पशु के आहार का एक महत्वपूर्ण भाग है जिससे पशुओं के लिए रेशा मिलता है और ग्रामीण परिवेश में पशु चारा का एक मुख्य भाग है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके. मिश्रा ने कहा कि खीस न पिलाने के कारण नवजात के पेट का प्रथम मल (म्युकोनियम) बाहर नहीं निकल पाता है जो नवजात के स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक है।


डॉ. अमर पाल सिंह एवं डॉ. नेहा गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ नवजात के लिए स्वस्थ माँ का होना आवश्यक है। भैंस के स्वस्थ नवजात का जन्म के समय भार 25-30 किलोग्राम जबकि देशी गाय के 17-22 तथा संकर गाय में 25-25 किलोग्राम होता हैं। गाभिन गाय से 45 से 60 दिन पहले दूध निकलना धीरे-धीरे बंद कर देना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान डॉ. एस राजू, डॉ. विजेंद्र मीणा, अश्वनी कुमार, डॉ. अरुण टीवी, व डॉ. प्रदीप ए कुलाल ने भी विचार रखे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed