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आदर्शवादी संस्कृति से सीख लेने की जरूरत
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
Updated Sun, 28 Aug 2016 12:20 AM IST
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत को सम्मानित करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि अपने देश जैसी उन्नत संस्कृति विश्व में कहीं नहीं मिलती। भारतीय संस्कृति में संस्कार सर्वोपरि है, ऐसी संस्कारमय संस्कृति को आगे बढ़ाना समय की मांग है। भारतीय संस्कृति में कल्याण के सामाजिक मूल्य निहित हैं।
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राज्यपाल शनिवार को भारत विकास परिषद की कर्ण शाखा की ओर से डीएवी महिला महाविद्यालय में आयोजित सांस्कृतिक पखवाडे़ के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि परिषद समाज सेवा और प्राणियों के दुख-दर्द को समझकर मानव सेवा का जो कार्य कर ही है, वह प्रशंसनीय है। सेवा, संस्कार, समर्पण की भावना को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। आज के परिवेश में संस्कारों को जिंदा रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि वेदों में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान उन्हीं को मिलते हैं जो दूसरे के घाव को अपने हृदय से ठीक करे।
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राज्यपाल ने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराएं पूरी तरह से वैज्ञानिक थी, लेकिन आज आडंबर व अंधविश्वास फैल गए हैं, इन सबकों हमें दूर करना है। भारत की संस्कृति का सृजन राम-कृष्ण ने किया और ऋषि-मुनियों ने हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम किया है। आज हम महापुरुषों के चित्रों को तो पूजते हैं परंतु उनके चरित्रों को भूल गए हैं।
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सतयुग में वृद्धाश्रम नहीं होते थे, लेकिन आज करोड़ों रुपये कमाने वाले बेटों के ना तो दिल में और ना ही घरों में बुजुर्गों के लिए जगह है। उन्होंने कहा कि रामायण से हमें जीवन जीने की हर कला का ज्ञान होता है। आज की पीढ़ी को शास्त्रों का ज्ञान होना जरूरी है। हमारी चेतना के स्रोत, प्रेरणा के कुंज, संस्कृति के पुरोधा महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर हम सबको जीवन व्यतीत करना चाहिए। अच्छे कर्म का फल सदैव अच्छा ही मिलता है इसलिए मानव हित के लिए हमेशा कार्य करना चाहिए।
इस मौके पर राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने पर कृति गुप्ता, विमल जैन, अनिल जैन, कांस्टेबल बाबू राम, सुरेश गुप्ता, सतीश कुमार, केएल टंडन, बालकिशन, निष्ठा व सुजाता को सम्मानित किया गया। भारत विकास परिषद ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न भेंट किया। जादूगर आंचल ने अपनी जादू की कला से हवा में गुलाब का फूल बनाकर राज्यपाल को भेंट किया।