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Karnal News: ...रो के कुछ देर चुप हो जाते हैं, दर्द लेकिन चला नहीं जाता
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- साझा विरासत कार्यक्रम में रचनाकारों ने अपनी कृतियों से बांधा समा, गूंजी तालियां
माई सिटी रिपोर्टर
कुंजपुरा। रामलीला भवन में रविवार को विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से मासिक साझा विरासत कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें रचनाकारों ने शायराना अंदाज में न केवल मौजूदा हालात में मानव के समक्ष आ रही चुनौतियों और समस्याओं का जिक्र किया बल्कि जीवन में संभलकर पग धरने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि अदबी संगम संस्था कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष सूबे सिंह सुजान ने सुनाया कि देखो इस दुनिया के सगलों से, मरके भी तो बचा नहीं जाता, रो के कुछ देर चुप हो जाते हैं, दर्द लेकिन चला नहीं जाता...।
इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट से रामलीला भवन गुंजायमान रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शायर इकबाल पानीपती ने कहा, कहां मासूम बच्चों की उन्हें किलकार प्यारी है, जिन्हें चाहत है कुर्सी की जिन्हें सरकार प्यारी है...। विशिष्ट अतिथि डॉ. हरीश बावला ने कहा कि मेरे खत भी उसे अब तो जलाने पड़ गए देखो, उसे क्या-क्या तकल्लुफ अब उठाने पड़ गए देखो...।
क्लब के संरक्षक प्रेमपाल सागर ने कहा कि न आसमां से बिजलियां गिराने की बात कर, कर उजड़ों को फिर से बसाने की बात कर...। डॉ. दयानंद खुंगर पानीपत ने कहा कि कुछ लोग खुद ही डांट खाने का काम करते हैं, जब पत्नी को कह दिया कि पांच मिनट में तैयार हो, आ रही है तो फिर हर आधे घंटे बाद यह पूछने की क्या जरूरत है कि कितना टाइम और लगेगा...।
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प्रकाश कुरुक्षेत्री ने कहा कि शौहरत भी छोड़ दी है ये दौलत भी छोड़ दी है, जबसे मिला है जख्म मुहब्बत भी छोड़ दी...। डॉ. बलवान सिंह बादल ने कहा, शाम को रुलते हुए सूरज को निहारा जाए, या आसमान में उड़ते परिंदों को पुकारा जाए...। सोनीपत से आए शायर शकील जठेड़ी ने कहा कि दुश्वारियां तो आती हैं राहे बनाने में, हां सहूलियत हो जाती है आने-जाने में...। हिसार से आए सोनू संजीदा ने कहा, दुआ रुक्सत तो वो बोला के सब किस्मत के लेखे हैं, उठा लो दिल के टुकड़े जो मेरी गलियों में फेंके हैं...।
झज्जर से आए प्राध्यापक जयसिंह जीत ने कहा कि नजर तेरी धनुष तेरा सफल संधान तेरा है, इबादत हो अगर दिल से यहां भगवान तेरा है...। रोहतक से आई पंजाब नेशनल बैंक की प्रबंधक खुशबू जैन ने कहा कि देश पर कुछ कह सकें वो ज्ञान होना चाहिए, देश मेरा खिल उठे अरमान होना चाहिए...। रामेश्वर देव ने कहा कि तुमने जो जगाए हैं दिल में जज्बात मेरे, मैं तलबगार हूं तेरा जो दिखाए हैं ख्यालात तूने...।
संगीत शिक्षिका रश्मि श्री रोहतक ने कहा कि हे तरणि तेरी अंगी मैं, तेरा ही तो ताप हूं, तेरी धुति तेरी छवि हूं मैं, नाम के अनुरूप हूं मैं, मैं रश्मि हूं...। इसके अलावा मंजूला पानीपत, साहिल सूफी व अन्य बुद्धिजीवियों ने भी विचार व्यक्त किए। गायन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने पर कविता को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सरपंच महेंद्र सिंह फौजी, अंशुल राणा, सावन पंवार, हविश, खुशाल रोजड़ा, सेजल गहलोत, पारस गहलोत व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
कुंजपुरा। रामलीला भवन में रविवार को विकास क्लब साहित्य कला मंच कुंजपुरा की ओर से मासिक साझा विरासत कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें रचनाकारों ने शायराना अंदाज में न केवल मौजूदा हालात में मानव के समक्ष आ रही चुनौतियों और समस्याओं का जिक्र किया बल्कि जीवन में संभलकर पग धरने का संदेश दिया। मुख्य अतिथि अदबी संगम संस्था कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष सूबे सिंह सुजान ने सुनाया कि देखो इस दुनिया के सगलों से, मरके भी तो बचा नहीं जाता, रो के कुछ देर चुप हो जाते हैं, दर्द लेकिन चला नहीं जाता...।
इस दौरान तालियों की गड़गड़ाहट से रामलीला भवन गुंजायमान रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शायर इकबाल पानीपती ने कहा, कहां मासूम बच्चों की उन्हें किलकार प्यारी है, जिन्हें चाहत है कुर्सी की जिन्हें सरकार प्यारी है...। विशिष्ट अतिथि डॉ. हरीश बावला ने कहा कि मेरे खत भी उसे अब तो जलाने पड़ गए देखो, उसे क्या-क्या तकल्लुफ अब उठाने पड़ गए देखो...।
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क्लब के संरक्षक प्रेमपाल सागर ने कहा कि न आसमां से बिजलियां गिराने की बात कर, कर उजड़ों को फिर से बसाने की बात कर...। डॉ. दयानंद खुंगर पानीपत ने कहा कि कुछ लोग खुद ही डांट खाने का काम करते हैं, जब पत्नी को कह दिया कि पांच मिनट में तैयार हो, आ रही है तो फिर हर आधे घंटे बाद यह पूछने की क्या जरूरत है कि कितना टाइम और लगेगा...।
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प्रकाश कुरुक्षेत्री ने कहा कि शौहरत भी छोड़ दी है ये दौलत भी छोड़ दी है, जबसे मिला है जख्म मुहब्बत भी छोड़ दी...। डॉ. बलवान सिंह बादल ने कहा, शाम को रुलते हुए सूरज को निहारा जाए, या आसमान में उड़ते परिंदों को पुकारा जाए...। सोनीपत से आए शायर शकील जठेड़ी ने कहा कि दुश्वारियां तो आती हैं राहे बनाने में, हां सहूलियत हो जाती है आने-जाने में...। हिसार से आए सोनू संजीदा ने कहा, दुआ रुक्सत तो वो बोला के सब किस्मत के लेखे हैं, उठा लो दिल के टुकड़े जो मेरी गलियों में फेंके हैं...।
झज्जर से आए प्राध्यापक जयसिंह जीत ने कहा कि नजर तेरी धनुष तेरा सफल संधान तेरा है, इबादत हो अगर दिल से यहां भगवान तेरा है...। रोहतक से आई पंजाब नेशनल बैंक की प्रबंधक खुशबू जैन ने कहा कि देश पर कुछ कह सकें वो ज्ञान होना चाहिए, देश मेरा खिल उठे अरमान होना चाहिए...। रामेश्वर देव ने कहा कि तुमने जो जगाए हैं दिल में जज्बात मेरे, मैं तलबगार हूं तेरा जो दिखाए हैं ख्यालात तूने...।
संगीत शिक्षिका रश्मि श्री रोहतक ने कहा कि हे तरणि तेरी अंगी मैं, तेरा ही तो ताप हूं, तेरी धुति तेरी छवि हूं मैं, नाम के अनुरूप हूं मैं, मैं रश्मि हूं...। इसके अलावा मंजूला पानीपत, साहिल सूफी व अन्य बुद्धिजीवियों ने भी विचार व्यक्त किए। गायन के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल करने पर कविता को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर सरपंच महेंद्र सिंह फौजी, अंशुल राणा, सावन पंवार, हविश, खुशाल रोजड़ा, सेजल गहलोत, पारस गहलोत व अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।