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किसानों पर फंसे करोड़ों, आढ़तियों की चिंता बढ़ी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 02:21 AM IST
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Crores trapped on farmers, the concern of arhtiyas increased
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। हरियाणा राज्य में सौ से अधिक अनाज मंडियों में करीब 35 हजार आढ़ती किसानों की उपज खरीदने में लगे हैं। इनमें से अधिसंख्य आढ़ती ऐसे हैं, जो किसानों को अपनी आढ़त से जोड़े रखने के लिए उन्हें जरूरत पड़ने पर कम ब्याज पर धन देते हैं। इसकी भरपाई किसान फसल देकर करते हैं। इस बार भी आढ़तियों ने उत्तर प्रदेश आदि सीमांत राज्यों के किसानों को करोड़ों रुपये दिए हैं। लेकिन, इस बार उत्तर प्रदेश के किसानों का फसल पंजीकरण कराने के बावजूद हरियाणा सरकार ने धान नहीं खरीदा। इसके कारण किसानों को उधार और ऋण पर दी गई करोड़ों की रकम फंस गई है, जिससे आढ़ती चिंतित हैं। अब धान की खरीद खत्म होने के बाद रकम वापसी के प्रयास में जुटे हैं। जबकि सीमांत राज्यों के किसान टालमटोल कर रहे हैं।
हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने पिछले दिनों सरकार से सीमांत राज्यों के लिए खरीद खोलने की मांग के दौरान सरकार को बताया था कि पूरे हरियाणा के करीब एक हजार करोड़ रुपये सीमांत राज्यों के किसानों पर बकाया है। इसमें करीब 200 करोड़ करनाल अनाज मंडी के आढ़तियों के ही हैं। लेकिन, बिना सीमांत राज्यों के किसानों की खरीद के खरीद समाप्त करने के बाद आढ़तियों की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है।
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आढ़तियों और किसानों के बीच रुपये के लेनदेन का विश्वासभरा रिश्ता लंबे समय से कायम है। वह हर साल फसल पैदा करने के लिए लागत लगाने, शादी ब्याह या अन्य किसी कार्य के लिए अपने आढ़ती से पैसे लेते हैं और फसल के रूप में उसे देते हैं, लेकिन अब खासकर उत्तर प्रदेश में मंडियां बेहद कमजोर होने के कारण किसानों को 1100-1200 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचना पड़ता है। ऐसे में किसान अब रुपये लौटाने के लिए हरियाणा की मंडियों में नहीं आ रहे हैं। जब भी आढ़ती इसके लिए कहते हैं तो वह कहते हैं कि उनके धान की दुर्गति हो गई है। लागत भी नहीं निकली है। अब कहां से कर्ज चुकाएं। करोड़ों रुपये फंस चुके हैं। यह आढ़तियों के लिए बड़ा झटका है।
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-रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
सिर्फ करनाल जिले में करीब 30 लाख क्विंटल धान कम खरीदा गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे राज्य में कितनी कम खरीद हुई होगी। हर साल सीमांत राज्यों खासकर उत्तर प्रदेश से धान आता था। सरकारी खरीद होती थी, जिससे सीमांत राज्यों के किसानों को तो लाभ होता ही था, हरियाणा सरकार को भी अधिक मंडी और विकास शुल्क मिलता था। आढ़तियों की भी आढ़त बढ़ती थी। लेकिन, इस बार ऐसा न होने के कारण किसान, आढ़तियों के साथ साथ सरकार को भी नुकसान हुआ है। राइस मिलर्स को भी पूरा धान नहीं मिला है। इससे सीएमआर भी कम मिलेगा। आढ़तियों के उधार और ब्याज पर दिए गए करोड़ों रुपये भी फंस गए हैं।
-राज कुमार सिंगला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष करनाल अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन
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