कट के नाम पर ‘काटे’ जा रहे किसान
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धान में नमी का खेल पिछले साल की तरह ही जारी है। किसान आढ़ती की दुकान पर धान लाया, राइस मिलर्स आया और हाथ में धान उठाते ही रेट बता दिया 1400 रुपये प्रति क्विंटल। तीन दिन से इंतजार में बैठे किसान के पास बेचने के अलावा कोई चारा नहीं है। रेट कम लगाने का कारण पूछा तो बता दिया जाता है कि नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, किसान के होश तब उड़ते हैं, जब उन्हें फार्म 1510 रुपये का थमा दिया जाता है। ऐसा केवल एक किसान के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि सभी के साथ हो रहा है। आढ़ती, मिलर्स और मार्केट कमेटी के अधिकारी मिलकर प्रति क्विंटल 100 से 110 रुपये का कट लगा रहे हैं, जो सीधा किसान पर लगता है। एक अनुमान है कि अब तक इस कट के नाम पर करोड़ों रुपये काटे जा चुके हैं।
अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को नई अनाज मंडी का दौरा किया तो ये सारी बातें सामर्ने आईं। मंडी में एक दुकान पर धान लेकर आए गांव गगसीना के नरेंद्र सिंह बताते हैं कि मंडी में धान पर कट नहीं लग रहा है, बल्कि सीधे किसान को काटा जा रहा है। किसान ने बताया कि उसकी धान को नमी बताकर 1410 रुपये खरीदा गया। जब पर्चा मिला तो रेट 1510 का मिला। विरोध किया, लेकिन कोई बात नहीं बनी। आसपास के किसानों से पूछा तो सभी के हालात इसी प्रकार के हैं। इसी प्रकार किसान मेहताब सिंह ने तो यहां तक दावा कर दिया कि मंडी में एक भी किसान ऐसा नहीं है, जिसकी धान सरकार द्वारा निर्धारित 1510 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही हो। किसानों को नमी के नाम पर जमकर बहकाया और लूटा जा रहा है। न तो किसान को सैंपल लेकर लैब तक जाने दिया जाता है और अगर कोई जाता है तो लैब में भी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता।
दरअरसल, आढ़ती और मिलर्स ने सब कुछ अपने काबू में ले रखा है। स्टौंडी से आए किसान रामधन का कहना है कि ई खरीद का केवल ढकोसला दिया गया है। न तो किसान की धान ई खरीद पर बिक रही है और न ही किसान के लिए सुविधा है। हां, ई तरीके से किसान को जरूर सरकार लुटवा रही है। क्यों नहीं सरकार के मंत्री यहां पर आकर देखते कैसे खेल चल रहा है? मंडियों को चेक करने की ड्यूटी अधिकारियों की लगाई है, जबकि अधिकारियों की मिलीभगत से ही तो यह सब कुछ हो रहा है। हमारा तो सिस्टम से ही विश्वास उठ गया है, हमें तो लूटने की आदत पड़ गई है। पहले भी लुटते आए हैं, आगे भी लुटते ही रहेंगे और खेती के अलावा करें भी तो क्या?
वहीं, अनुमान है कि पिछले चार दिन से हो रही खरीद से ही किसानों को करोड़ों रुपये का फटका लग चुका है। रोजाना हजारों क्विंटल धान मंडी में आ रहा है और प्रति क्विंटल के हिसाब से 100 रुपये से ज्यादा तक कट के नाम पर काटे जा रहे हैं, जबकि पर्चा किसान को पूरा दिया जाता है। ऐसे में राइस मिलर्स सरकार से 1510 के हिसाब से ही पैसे ले रहे हैं, इसमें किसान के साथ साथ सरकार को भी चूना लगाया जा रहा है। बता दें कि पिछले साल भी कट के नाम पर करनाल की मंडी में हुए करोड़ों रुपये के घालमेल की शिकायत सीएम तक हुई थी।
रेट पूरा मांगा तो खरीद ही नहीं होगी?
किसान राजबीर सिंह, रत्नलाल का कहना है कि अगर कोई किसान नमी 17 प्रतिशत होने पर भी रेट पूरा मांगता है तो उसकी ढेरी को छोड़ दिया जाता है। कई दिन तक मंडी में धान पड़े रहने पर मजबूरी में धान को सस्ते दाम पर बेचना पड़ रहा है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खरीद के लिए 80 से ज्यादा राइस मिलर्स को लाइसेंस दिए गए हैं, लेकिन मंडी में आधे भी नहीं आ रहे हैं। इसलिए धान के रेट कम हैं और किसान को पूरे रेट नहीं दिए जा रहे हैं।
नमी के लिए नहीं मिलती पर्ची
जिस नमी के नाम पर पूरी लूट मची हुई है, उसी नमी का मार्केट कमेटी किसान को कोई सबूत नहीं देती है। अगर कोई किसान अपनी धान का सैंपल लेकर लैब में जाता है तो उसे चेक करके नमी बता दी जाती है, लेकिन पर्ची के नाम पर उसे कुछ नहीं दिया जाता। ऐसे में आढ़ती मिलर्स के साथ मिलकर ये सारा खेल करते हैं। आढ़ती खुद किसान की धान का सैंपल लेकर लैब जाते हैं और वहां से टेस्ट रिपोर्ट आकर किसान को बताते हैं। मंडी में ऐसे तीन मामले आए। आढ़ती ने किसान को नमी 25 बताई, लेकिन जब किसान को शक हुआ तो दोबारा उसने खुद नमी चेक कराई तो 20 प्रतिशत आई। ऐसे में फसल में नमी ज्यादा बताकर किसानों के साथ सरेआम ठगी की जा रही है। खास बात यह है कि राइस मिलर्स केवल हाथ लगाकर ही नमी बता देते हैं और किसान के सैंपल को लैब तक जाने ही नहीं दिया जाता।
सीसीटीवी कैमरे की कैद में हुई मंडी
करनाल। आखिरकार अमर उजाला की ओर से नई अनाज मंडी में सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर चलाई गई मुहिम रंग लाई। मंगलवार को मंडी में छह स्थानों पर कैमरे लगा दिए गए। मंडी में आने के सभी छह रास्तों पर इन्हें लगाया गया है। खास बात यह है कि कैमरों के अंदर का दृश्य देखने के लिए मार्केट कमेटी सचिव के कमरे मेें एक बड़ी एलईडी लगाई है, जो सारा दृश्य 24 घंटे लाइव रहेगा। इसके अलावा, इन कैमरों को अपने विभाग के आला अधिकारियों के साथ चंडीगढ़ से भी जोड़ा गया है। विभाग के डायरेक्टर से लेकर चेयरमैन और एसीएस इसे देख सकेंगे।
आईडी के पासवर्ड बदले
मंडी में फर्जी गेट पास पकड़े जाने के बाद मार्केट कमेटी अधिकारी भी अलर्ट हो गए हैं। एनआईटी की साइट से कंप्यूटराइज्ड गेट पास काटे जाते हैं। इसको लेकर सभी कर्मचारियों को आईडी और उसका पासवर्ड बताया गया था, लेकिन हालात को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर मार्केट कमेटी के सचिव ने पासवर्ड बदल दिया है। अब केवल सचिव व उनके केवल दो कर्मचारियों को पासवर्ड दिए हैं, ताकि कहीं पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
फर्जी गेट पास रोकने को ये उठाए कदम
दूसरी ओर से फर्जी पास को रोकने के लिए नया कदम उठाया गया है। पहले सर्वर डाउन होने के बाद कर्मचारियों को दी गई रसीद बुक से सीरियल वाइज पास काटे जाते थे और ड्यूटी समाप्त होने के बाद उसी बुक से दूसरा कर्मचारी पास काटता था। अब हर गेट पर बैठने वाले कर्मचारियों को दो-दो पास बुक दी गई है, साथ ही उनकी रिसीविंग के लिए साइन कराए गए हैं। इसके अलावा, ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारी दूसरे कर्मचारी को अपनी बुक नहीं देगा, बल्कि अपने साथ ही घर ले जाएगा, ताकि कोई गड़बड़ी न हो सके। इस बीच कोई गेट पास में गड़बड़ी होगी तो कर्मचारी इसके जिम्मेदार होंगे। मार्केट कमेटी के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि पूरी मंडी को सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मुख्य रूप से एंट्री गेट पर अच्छी क्वालिटी के कैमरे लगाए हैं। साथ ही इन कैमरों को विभाग के आला अधिकारियों के आफिस से जोड़ा गया है। वे चंडीगढ़ बैठे ही करनाल की मंडी को देख सकेंगे।