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नंदीग्राम व गोशाला के हालात : न गायों को चारा और न ही देखभार, रोजाना मर रहा गोवंश
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। गांव फुसगढ़ स्थित नंदीग्राम और गोशाला के हालात खराब हैं। समय पर चारा और इलाज नहीं मिलने के कारण गोवंश रोजाना दम तोड़ रहा है। औसतन एक से दो गोवंश की मौत हो रही है। इससे भी बड़ी बात है कि मौत होने के बाद भी मृत पशुओं को उठाया नहीं जाता। कई-कई दिन तक मृत पशु गोशाला में ही पड़े रहते हैं और आवारा कुत्ते गायों को नोचते हैं।
गोवंश के मरने के मामले में ग्रामीण सड़क पर उतर गए हैं। बुधवार को फुसगढ़ के सैकड़ों ग्रामीणों ने लघु सचिवालय पहुंचकर जमकर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। डीसी को ज्ञापन सौंपकर नंदीग्राम और गोशाला को गांव की पंचायती जमीन में शिफ्ट करने की मांग की है।
ग्रामीण चीकू, परमिंदर सिंह लाठर, पाला राम, कृष्ण कुमार, राजो देवी, सुषमा देवी, संतोष देवी, सुनील, सुमन आदि ने बताया कि करीब दो साल पहले गांव फूसगढ़ में बने नंदीग्राम और गोशाला राम भरोसे चल रही है। चारो तरफ गंदगी फैली हुई है। नंदीग्राम और गोशाला में गोवंशों की अच्छे से देखरेख नहीं की जा रही और न ही उनका उचित इलाज किया जा रहा है। इसी कारण, हर रोज करीब गोवंश मर रहा है। इसका मुख्य कारण है कि उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है और न ही बीमार होने पर उनका उचित इलाज किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी गोवंश बीमारी के कारण मर रहे हैं इसका बहाना बना रहे हैं। कहने को तो गोवंशों के लिए दो डॉक्टर हैं, लेकिन फिर भी गोवंश बीमारी से मर रहे हैं। सवाल है कि जब दो डॉक्टर हैं तो गायों को इलाज क्यों नहीं मिल रहा है?
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नंदीग्राम और गोशाला में मृत पड़े गोवंशों को नोचते रहते हैं कुत्ते और पक्षी
ग्रामीणों ने बताया कि नंदीग्राम और गोशाला में काफी संख्या में गाय और गोवंश हैं। कहने को तो गोशाला और नंदीग्राम में इन गोवंशों की देखरेख के लिए कर्मचारी लगाए हुए हैं, लेकिन फिर हर रोज गोवंश मर रहे हैं। इतना ही नहीं मरने के बाद भी गोवंश वहीं पड़े रहते हैं, उनके शव को कुत्ते और पक्षी नोचते रहते हैं, लेकिन कोई भी उन शवों को नहीं उठाता। इस कारण उनकी बदबू गांव में फैल जाती है। इस बदबू के कारण भोजन करना भी दूभर हो गया है। डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
जानिए नंदीग्राम और गोशाला के मौजूदा हॉल
नंदीग्राम में गोवंश की स्थिति खराब है। शेड के नीचे बनाई हुई खोर को देखकर लगाता है कि इनमें कई दिनों से गोवंशों के लिए चारा ही नहीं डाला है। इतना ही नहीं दो गोवंश वहीं मृत पड़े हैं, जहां उन्होंने दम तोड़ा होगा। उन्हें साइड में करने वाला भी कोई नहीं है। नंदीग्राम में गोवंशों के लिए भूसा भी नहीं है। हालांकि, कृष्ण गर्ग का कहना है कि भूसा गोशाला के पास रखा है। पानी की खोर में गोबर भरा हुआ है, जिसमें पानी चले भी कई दिन बीत चुके हैं। यदि गोशाला की बात करें तो वहां भी दो गोवंश मृत पड़े हुए थे। नंदीग्राम की बात करें तो लगभग 250 की संख्या में नंदी हैं और गोशाला की बात करें तो 600 के करीब गोवंश हैं। इनमें कुछ गाय दुधारू भी है।
ये है गोवंश के बीमार होने का मुख्य कारण
नंदीग्राम और गोशाला में आने से पहले ये गोवंश शहर की गलियों में अपना भोजन देखते थे। इस दौरान इन्होंने पॉलिथीन खाई है। गोशाला में आने के बाद जब ये गोवंश चारा खाते हैं तो कुछ दिनों बाद इनकी तबीयत खराब हो जाती है और फिर ये मर जाते हैं। कृष्ण गर्ग का कहना है कि गोवंशों के लिए दो डॉक्टर हैं, जो बीमार गोवंश का चेकअप करते हैं। यदि नगर निगम जब इन गोवंश को पकड़कर लाते हैं तो उन गोवंश का उसी दौरान चेकअप किया जाए तो इनकी जान बच सकती है।
ये बोले कृष्ण गर्ग
नंदीग्राम और गोशाला में गोवंश में बीमारी के कारण ही गोवंश मर रहे हैं, उनके उठाने का ठेका एक व्यक्ति को दिया हुआ है। इस लिए वह अपनी मर्जी से ही उनका उठान करता है। गोशाला में चारा कटा जाता है और भूस भी वहीं है, जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वो नहीं चाहते की यहां नंदीग्राम व गोशाला चले।
-कृष्ण गर्ग, गोशाला संचालक व पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर।
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करनाल। गांव फुसगढ़ स्थित नंदीग्राम और गोशाला के हालात खराब हैं। समय पर चारा और इलाज नहीं मिलने के कारण गोवंश रोजाना दम तोड़ रहा है। औसतन एक से दो गोवंश की मौत हो रही है। इससे भी बड़ी बात है कि मौत होने के बाद भी मृत पशुओं को उठाया नहीं जाता। कई-कई दिन तक मृत पशु गोशाला में ही पड़े रहते हैं और आवारा कुत्ते गायों को नोचते हैं।
गोवंश के मरने के मामले में ग्रामीण सड़क पर उतर गए हैं। बुधवार को फुसगढ़ के सैकड़ों ग्रामीणों ने लघु सचिवालय पहुंचकर जमकर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। डीसी को ज्ञापन सौंपकर नंदीग्राम और गोशाला को गांव की पंचायती जमीन में शिफ्ट करने की मांग की है।
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ग्रामीण चीकू, परमिंदर सिंह लाठर, पाला राम, कृष्ण कुमार, राजो देवी, सुषमा देवी, संतोष देवी, सुनील, सुमन आदि ने बताया कि करीब दो साल पहले गांव फूसगढ़ में बने नंदीग्राम और गोशाला राम भरोसे चल रही है। चारो तरफ गंदगी फैली हुई है। नंदीग्राम और गोशाला में गोवंशों की अच्छे से देखरेख नहीं की जा रही और न ही उनका उचित इलाज किया जा रहा है। इसी कारण, हर रोज करीब गोवंश मर रहा है। इसका मुख्य कारण है कि उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है और न ही बीमार होने पर उनका उचित इलाज किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम के अधिकारी गोवंश बीमारी के कारण मर रहे हैं इसका बहाना बना रहे हैं। कहने को तो गोवंशों के लिए दो डॉक्टर हैं, लेकिन फिर भी गोवंश बीमारी से मर रहे हैं। सवाल है कि जब दो डॉक्टर हैं तो गायों को इलाज क्यों नहीं मिल रहा है?
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नंदीग्राम और गोशाला में मृत पड़े गोवंशों को नोचते रहते हैं कुत्ते और पक्षी
ग्रामीणों ने बताया कि नंदीग्राम और गोशाला में काफी संख्या में गाय और गोवंश हैं। कहने को तो गोशाला और नंदीग्राम में इन गोवंशों की देखरेख के लिए कर्मचारी लगाए हुए हैं, लेकिन फिर हर रोज गोवंश मर रहे हैं। इतना ही नहीं मरने के बाद भी गोवंश वहीं पड़े रहते हैं, उनके शव को कुत्ते और पक्षी नोचते रहते हैं, लेकिन कोई भी उन शवों को नहीं उठाता। इस कारण उनकी बदबू गांव में फैल जाती है। इस बदबू के कारण भोजन करना भी दूभर हो गया है। डेंगू और मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।
जानिए नंदीग्राम और गोशाला के मौजूदा हॉल
नंदीग्राम में गोवंश की स्थिति खराब है। शेड के नीचे बनाई हुई खोर को देखकर लगाता है कि इनमें कई दिनों से गोवंशों के लिए चारा ही नहीं डाला है। इतना ही नहीं दो गोवंश वहीं मृत पड़े हैं, जहां उन्होंने दम तोड़ा होगा। उन्हें साइड में करने वाला भी कोई नहीं है। नंदीग्राम में गोवंशों के लिए भूसा भी नहीं है। हालांकि, कृष्ण गर्ग का कहना है कि भूसा गोशाला के पास रखा है। पानी की खोर में गोबर भरा हुआ है, जिसमें पानी चले भी कई दिन बीत चुके हैं। यदि गोशाला की बात करें तो वहां भी दो गोवंश मृत पड़े हुए थे। नंदीग्राम की बात करें तो लगभग 250 की संख्या में नंदी हैं और गोशाला की बात करें तो 600 के करीब गोवंश हैं। इनमें कुछ गाय दुधारू भी है।
ये है गोवंश के बीमार होने का मुख्य कारण
नंदीग्राम और गोशाला में आने से पहले ये गोवंश शहर की गलियों में अपना भोजन देखते थे। इस दौरान इन्होंने पॉलिथीन खाई है। गोशाला में आने के बाद जब ये गोवंश चारा खाते हैं तो कुछ दिनों बाद इनकी तबीयत खराब हो जाती है और फिर ये मर जाते हैं। कृष्ण गर्ग का कहना है कि गोवंशों के लिए दो डॉक्टर हैं, जो बीमार गोवंश का चेकअप करते हैं। यदि नगर निगम जब इन गोवंश को पकड़कर लाते हैं तो उन गोवंश का उसी दौरान चेकअप किया जाए तो इनकी जान बच सकती है।
ये बोले कृष्ण गर्ग
नंदीग्राम और गोशाला में गोवंश में बीमारी के कारण ही गोवंश मर रहे हैं, उनके उठाने का ठेका एक व्यक्ति को दिया हुआ है। इस लिए वह अपनी मर्जी से ही उनका उठान करता है। गोशाला में चारा कटा जाता है और भूस भी वहीं है, जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, वो नहीं चाहते की यहां नंदीग्राम व गोशाला चले।
-कृष्ण गर्ग, गोशाला संचालक व पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर।