{"_id":"5d7ab06b8ebc3e016308e3cb","slug":"crime-karnal-news-knl49327164","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां गुहार लगाती रही, 26 घंटे बाद भी नहीं मिला इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां गुहार लगाती रही, 26 घंटे बाद भी नहीं मिला इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कल्पना चावला मेडिकल कालेज में एक और डाक्टरों की लापरवाही का मामला सामने आया है। जीटी रोड पर गांव दहा के पास बाइक के सामने लावारिस पशु आने से घायल बाइक सवार को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में दाखिल कराया गया, लेकिन 26 घंटे के बाद भी घायल को इलाज नहीं मिल पाया। घायल के परिजन डाक्टरों से बार-बार गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी किसी ने सुनवाई नहीं की गई। परिजन कहते रहे कि घायल की तबियत बिगड़ रही है, लेकिन डाक्टरों ने कहा कि सुबह चेक करेंगे। सुबह तक युवक ने दम तोड़ दिया। मृतक के परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई है और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार को बांसों गेट निवासी 32 वर्षीय राजकुमार बाइक पर गांव दहा के समीप पहुंचा तो उसके सामने लावारिस पशु आ गया। इस कारण वह अनियंत्रित हो गया और सड़क पर गिर गया। इस कारण उसे गंभीर चोट लग गई। उसके सिर और पेट में चोट थी। आनन-फानन में उसे मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में दाखिल कराया गया। इस पर डाक्टरों ने उसकी मरहम पट्टी तो की, लेकिन प्रापर इलाज नहीं किया। केवल अल्ट्रासाउंड के लिए लिख दिया। बुधवार रात को जब राजकुमार की तबियत बिगड़ने लगी तो उसके परिजनों ने इमरजेंसी में तैनात डाक्टरों से गुहार लगाई कि उसे चेक करें, लेकिन संबंधित डाक्टर कमरे में बैठे-बैठे यही कहते रहे कि सुबह चेक करेंगे अब क्या कर सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि इस मामले में एक विभाग के डाक्टरों द्वारा लापरवाही बरती गई, इसी कारण युवक की जान चली गई। सुबह जब युवक ने दम तोड़ा तो डाक्टरों में हड़कंप मच गया। बाद में डाक्टर कार्ड पर अपनी उपस्थिति और कमेंट दर्ज करने में जुटे रहे। इस मामले में मृतक के परिजनों ने जांच की मांग की है।
मौत का जिम्मेदार कौन
युवक राजकुमार की मौत का जिम्मेदार कौन-कौन हैं, ये जांच का विषय है। 26 घंटे तक दाखिल रहने के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका और न ही प्रापर तरीके से सीनियर डाक्टरों ने उसे चेक करने की जहमत उठाई। हालांकि, अब इस मामले में कालेज प्रबंधन दबाने की कोशिश में जुट गया है। इस बारे में इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ. गौरव का कहना है कि राजकुमार घायल अवस्था में आया था। उसका इलाज अच्छे से किया गया है। यही कहीं कोई लापरवाही हुई है तो इसकी जांच की जाएगी। दूसरी ओर कालेज के प्रवक्ता डॉ. गुलशन गर्ग ऐसी किसी घटना के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
दिलावर की मौत का मामले में आज तक परिजनों को न्याय नहीं मिला
गौरतलब है कि कालेज में मार्च माह में चिड़ाव निवासी दिलावर की मौत भी डाक्टरों की लापरवाही के कारण हुई थी। परिजन गुहार लगाते रहे थे कि दिलावर की चाती में दर्द है, लेकिन डाक्टरों ने उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया था। कई घंटे तक उनके चक्कर लगवाए और आखिरकार युवक की मौत हो गई थी। इस मामले में आरोपी डाक्टरों के खिलाफ पहले कार्रवाई की गई, लेकिन बाद में उनको बहाल कर दिया गया। एक डाक्टर को जरूर नौकरी से बर्खास्त किया गया था। आज भी इस मामले में दोबारा जांच के लिए परिजन चक्कर लगा रहे हैं।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, बुधवार को बांसों गेट निवासी 32 वर्षीय राजकुमार बाइक पर गांव दहा के समीप पहुंचा तो उसके सामने लावारिस पशु आ गया। इस कारण वह अनियंत्रित हो गया और सड़क पर गिर गया। इस कारण उसे गंभीर चोट लग गई। उसके सिर और पेट में चोट थी। आनन-फानन में उसे मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में दाखिल कराया गया। इस पर डाक्टरों ने उसकी मरहम पट्टी तो की, लेकिन प्रापर इलाज नहीं किया। केवल अल्ट्रासाउंड के लिए लिख दिया। बुधवार रात को जब राजकुमार की तबियत बिगड़ने लगी तो उसके परिजनों ने इमरजेंसी में तैनात डाक्टरों से गुहार लगाई कि उसे चेक करें, लेकिन संबंधित डाक्टर कमरे में बैठे-बैठे यही कहते रहे कि सुबह चेक करेंगे अब क्या कर सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि इस मामले में एक विभाग के डाक्टरों द्वारा लापरवाही बरती गई, इसी कारण युवक की जान चली गई। सुबह जब युवक ने दम तोड़ा तो डाक्टरों में हड़कंप मच गया। बाद में डाक्टर कार्ड पर अपनी उपस्थिति और कमेंट दर्ज करने में जुटे रहे। इस मामले में मृतक के परिजनों ने जांच की मांग की है।
विज्ञापन
मौत का जिम्मेदार कौन
युवक राजकुमार की मौत का जिम्मेदार कौन-कौन हैं, ये जांच का विषय है। 26 घंटे तक दाखिल रहने के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सका और न ही प्रापर तरीके से सीनियर डाक्टरों ने उसे चेक करने की जहमत उठाई। हालांकि, अब इस मामले में कालेज प्रबंधन दबाने की कोशिश में जुट गया है। इस बारे में इमरजेंसी के इंचार्ज डॉ. गौरव का कहना है कि राजकुमार घायल अवस्था में आया था। उसका इलाज अच्छे से किया गया है। यही कहीं कोई लापरवाही हुई है तो इसकी जांच की जाएगी। दूसरी ओर कालेज के प्रवक्ता डॉ. गुलशन गर्ग ऐसी किसी घटना के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कह रहे हैं।
विज्ञापन
दिलावर की मौत का मामले में आज तक परिजनों को न्याय नहीं मिला
गौरतलब है कि कालेज में मार्च माह में चिड़ाव निवासी दिलावर की मौत भी डाक्टरों की लापरवाही के कारण हुई थी। परिजन गुहार लगाते रहे थे कि दिलावर की चाती में दर्द है, लेकिन डाक्टरों ने उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया था। कई घंटे तक उनके चक्कर लगवाए और आखिरकार युवक की मौत हो गई थी। इस मामले में आरोपी डाक्टरों के खिलाफ पहले कार्रवाई की गई, लेकिन बाद में उनको बहाल कर दिया गया। एक डाक्टर को जरूर नौकरी से बर्खास्त किया गया था। आज भी इस मामले में दोबारा जांच के लिए परिजन चक्कर लगा रहे हैं।