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Karnal News: पशुओं की कराई प्रतियोगिताएं, किसानों ने जानी तकनीकें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 10 Apr 2023 02:09 AM IST
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Competitions were organized for animals, farmers learned techniques
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) स्थापना शताब्दी वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय डेयरी मेले के दूसरे दिन बड़ी संख्या में पशुपालक पहुंचे। दुग्ध एवं पशु सौंदर्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, लुधियाना कुलपति डाॅ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि युवाओं को डेयरी और कृषि उद्योग से जुड़ना चाहिए। इससे उन्हें खुद को रोजगार मिलेगा ही, वह दूसरों को भी रोजगार दे सकेंगे। शाम को प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रीय डेयरी मेले में दूसरे दिन तक 400 पशुओं का पंजीकरण किया गया। दूसरे दिन सुबह से ही दूरदराज से पहुंचे किसानों ने यहां लगे स्टाॅलों का रुख किया। जहां एक ओर विभिन्न निजी कंपनियों ने आधुनिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया तो दूसरी ओर एनडीआरआई, सीएसएसआरआई, सीआईआरजी, आईवीआरआई, आईआईडब्ल्यूबीआर आदि कई संस्थानों ने अपनी तकनीकियों के प्रदर्शन को देखा। वैज्ञानिकों से उनके बारे में जानकारी हासिल की।
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रविवार को किसानों के लिए मनोरंजन के लिए संगोष्ठी मंच पर रागिनी की व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान सुबह चार बजे से दुग्ध दोहन प्रतियोगिता शुरू की गई। सुबह 10 बजे से पनीर बनाने की प्रतियोगिता और खासकर महिलाओं के लिए दुग्ध दोहन प्रतियोगिता शुरू की गई। दोपहर बाद दो बजे से शाम पांच बजे तक किसान संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी की शुरुआत निदेशक डॉ. धीर सिंह ने की। उन्होंने मूल्य संवर्धन/दूध का प्रसंस्करण, चारा उत्पादन एवं प्रबंधन, डेरी पशुओं की नस्लें, समेकित कृषि प्रणाली, अपनी मृदा को स्वस्थ रखने के विषयों पर किसानों को समझाया। उन्होंने दूध को संपूर्ण आहार बताते हुए इसका सेवन करने की सलाह दी।
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मुख्य अतिथि गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, लुधियाना (पंजाब) के कुलपति डाॅ. इंद्रजीत सिंह ने शताब्दी वर्ष की बधाई देते हुए किसानों एवं पशुपालकों के लिए बहुपयोगी मंच बताया। उन्होंने कहा कि अब पुरानी तकनीक से काम नहीं चलेगा, न ही पशुपालकों को फायदा होगा। इसलिए पशुपालकों, किसानों को समय दर समय हो रहे नए-नए अनुसंधानों को अपनाना होगा। शोध संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ना होगा। संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. आशीष कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने भैसों की उत्पादकता को बढ़ाने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया है। आयोजन सचिव डॉ. गोपाल सांखला ने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी मेला में अब तक लगभग 400 पशु पंजीकृत हो चुके हैं। सोमवार को तीन दिवसीय मेले का समापन समारोह है। संस्थान के पीआरओ डॉ.अजय कुमार डांग ने बताया कि प्रतियोगिताओं का परिणाम समापन समारोह के दौरान घोषित किया जाएगा।
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