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Karnal News: इलाज को कॉस्मेटिक बता भुगतान रोका, लगा जुर्माना
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करनाल। पहले ब्रेस्ट सिस्ट की सर्जरी के लिए कैशलेस इलाज की मंजूरी दी गई। अस्पताल से छुट्टी के समय उपचार को कॉस्मेटिक बताकर बीमा कंपनी भुगतान से मुकर गई। स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के इस रवैये को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। कंपनी पर जुर्माना लगाया।
करीब एक साल सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को इलाज के 33,108 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 11 हजार रुपये कानूनी खर्च भी 45 दिनों में देना होगा।
आ आयोग के फैसले के अनुसार, शक्ति पुरम निवासी अमित ने परिवार के लिए पांच लाख रुपये की स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। पत्नी के स्तन और बगल के हिस्से में गांठ की समस्या होने पर पांच जून 2025 को निजी अस्पताल में सर्जरी हुई। अस्पताल ने इलाज के लिए 35,900 रुपये का कैशलेस क्लेम कंपनी भेजा था।
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इससे पहले कंपनी ने तीन जून को 21,540 रुपये के भुगतान की मंजूरी दे दी लेकिन छह जून को अस्पताल से छुट्टी के समय कैशलेस अनुमति वापस ले ली। दोबारा मंजूरी मांगने पर उपचार को कॉस्मेटिक प्रक्रिया बताकर भुगतान से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद उन्हें इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ा।
शर्तें देने का प्रमाण नहीं, कंपनी की दलील पर सवाल
बीमा कंपनी ने आयोग में दावा किया कि पॉलिसी की शर्तों के तहत कॉस्मेटिक उपचार का खर्च कवर नहीं होता। कंपनी ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने प्रतिपूर्ति के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए। शिकायतकर्ता का पक्ष था कि डॉक्टर ने सर्जरी को चिकित्सकीय रूप से जरूरी बताया था और कंपनी पहले ही कैशलेस भुगतान की मंजूरी दे चुकी थी।
कंपनी नहीं बता पाई कि सर्जरी पॉलिसी में कवर क्यों नहीं
आयोग ने पाया कि कंपनी साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी की शर्तें शिकायतकर्ता को दी गई थीं। इसके लिए न कोई प्राप्ति रसीद पेश की गई और न ही कूरियर या अन्य दस्तावेज। ऐसे में कंपनी यह स्पष्ट करने में भी विफल रही कि संबंधित उपचार पॉलिसी के तहत क्यों कवर नहीं था। ऐसे में केवल कॉस्मेटिक प्रक्रिया का हवाला देकर क्लेम खारिज करना मनमाना और अनुचित पाया गया। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह तथा सदस्य नीरू अग्रवाल और सरवजीत कौर की पीठ ने शिकायत स्वीकार करते हुए यह आदेश सुनाया।
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करीब एक साल सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को इलाज के 33,108 रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और 11 हजार रुपये कानूनी खर्च भी 45 दिनों में देना होगा।
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आ आयोग के फैसले के अनुसार, शक्ति पुरम निवासी अमित ने परिवार के लिए पांच लाख रुपये की स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। पत्नी के स्तन और बगल के हिस्से में गांठ की समस्या होने पर पांच जून 2025 को निजी अस्पताल में सर्जरी हुई। अस्पताल ने इलाज के लिए 35,900 रुपये का कैशलेस क्लेम कंपनी भेजा था।
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इससे पहले कंपनी ने तीन जून को 21,540 रुपये के भुगतान की मंजूरी दे दी लेकिन छह जून को अस्पताल से छुट्टी के समय कैशलेस अनुमति वापस ले ली। दोबारा मंजूरी मांगने पर उपचार को कॉस्मेटिक प्रक्रिया बताकर भुगतान से इन्कार कर दिया गया। इसके बाद उन्हें इलाज का खर्च खुद उठाना पड़ा।
शर्तें देने का प्रमाण नहीं, कंपनी की दलील पर सवाल
बीमा कंपनी ने आयोग में दावा किया कि पॉलिसी की शर्तों के तहत कॉस्मेटिक उपचार का खर्च कवर नहीं होता। कंपनी ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने प्रतिपूर्ति के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए। शिकायतकर्ता का पक्ष था कि डॉक्टर ने सर्जरी को चिकित्सकीय रूप से जरूरी बताया था और कंपनी पहले ही कैशलेस भुगतान की मंजूरी दे चुकी थी।
कंपनी नहीं बता पाई कि सर्जरी पॉलिसी में कवर क्यों नहीं
आयोग ने पाया कि कंपनी साबित नहीं कर सकी कि पॉलिसी की शर्तें शिकायतकर्ता को दी गई थीं। इसके लिए न कोई प्राप्ति रसीद पेश की गई और न ही कूरियर या अन्य दस्तावेज। ऐसे में कंपनी यह स्पष्ट करने में भी विफल रही कि संबंधित उपचार पॉलिसी के तहत क्यों कवर नहीं था। ऐसे में केवल कॉस्मेटिक प्रक्रिया का हवाला देकर क्लेम खारिज करना मनमाना और अनुचित पाया गया। आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह तथा सदस्य नीरू अग्रवाल और सरवजीत कौर की पीठ ने शिकायत स्वीकार करते हुए यह आदेश सुनाया।