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बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराने वालों को देना होगा मुआवजा
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बच्चों से बंधुआ मजदूरी कराने वालों पर अब कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उन्हें ऐसे बच्चों को अब मुआवजा भी देना पड़ेगा। श्रम विभाग की टीम सीडब्ल्यूसी संग अभियान चलाएगी और काम करने वाले ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी। वहीं बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने के साथ-साथ उन्हें माता-पिता के हाथों में सुरक्षित सौंपा जाएगा। वहीं ऐसे परिवारों के खिलाफ जेजे एक्ट के अनुच्छेद 75 व 76 के तहत प्राथमिकी दर्ज होगी, जो अपने बच्चों से भीख मंगवाते हैं।
जिला प्रशासन की ओर से चिल्ड्रन इन स्ट्रीट सिचुएशन यानी सामाजिक परिवेश से दूर सड़क की स्थिति में आ चुके बच्चों के पुनर्वास के लिए मंगलवार को पहला शिविर सेक्टर-12 में पाठक अस्पताल के पीछे लगाया जाएगा। यहां पहचान किए गए 54 बच्चों के आधार कार्ड, परिवार पहचानपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे। इनमें कई ऐसे भी हैं, जो स्कूल नहीं जाते। संबंधित विभाग की ओर से यह सभी सुविधाएं मौके पर ही उपलब्ध करवाई जाएंगी। शिविरों के नोडल अधिकारी एवं इंद्री के एसडीएम डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने सोमवार को लघु सचिवालय में शिविर के प्रबंधों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग से संबंधित सेवाओं को शिविरों तक सीमित न रखें बल्कि शिविर के बाद भी ऐसे बच्चों की मदद करें। ताकि इन्हें भी समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके। ब्यूरो
एसडीएम ने बताया कि 19 मई को सेक्टर-16 और 23 मई को सेक्टर-32 में बच्चों के लिए शिविर आयोजित किया जाएगा। बैठक में उन्होंने डीएसपी को निर्देश दिए कि शिविरों के लिए सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएं। डीपीओ को कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए पोषाहार की व्यवस्था करने के लिए कहा। शिविरों में पांच साल से अधिक आयु के बच्चों के आधार की त्रुटियां भी ठीक करवाई जाएंगी। उप सिविल सर्जन डॉ. नीलम वर्मा पहचान किए गए सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराकर उन्हें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जोड़ेंगी।
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एसडीएम ने नगर निगम के अधिकारियों से कहा कि जो बच्चे कूड़ा बीनने में लगे हैं, उन्हें एक सुनियोजित तरीके से काम में लगाएं, ताकि वे वेस्ट को बेचकर अपनी आजीविका कमा सकें। सड़क पर बिना किसी सहारे के घूमते बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाए जाएं और ऐसे बच्चों को नाइट शेल्टर प्रदान किए जाएं। जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि ऐसे बच्चे जिनका स्कूलों मेें दाखिला करवाया गया है, उनकी नियमित प्रगति रिपोर्ट दी जाए और स्लम बस्तियों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों की तैनाती की जाए।
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जिला प्रशासन की ओर से चिल्ड्रन इन स्ट्रीट सिचुएशन यानी सामाजिक परिवेश से दूर सड़क की स्थिति में आ चुके बच्चों के पुनर्वास के लिए मंगलवार को पहला शिविर सेक्टर-12 में पाठक अस्पताल के पीछे लगाया जाएगा। यहां पहचान किए गए 54 बच्चों के आधार कार्ड, परिवार पहचानपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे। इनमें कई ऐसे भी हैं, जो स्कूल नहीं जाते। संबंधित विभाग की ओर से यह सभी सुविधाएं मौके पर ही उपलब्ध करवाई जाएंगी। शिविरों के नोडल अधिकारी एवं इंद्री के एसडीएम डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने सोमवार को लघु सचिवालय में शिविर के प्रबंधों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग से संबंधित सेवाओं को शिविरों तक सीमित न रखें बल्कि शिविर के बाद भी ऐसे बच्चों की मदद करें। ताकि इन्हें भी समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जा सके। ब्यूरो
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एसडीएम ने बताया कि 19 मई को सेक्टर-16 और 23 मई को सेक्टर-32 में बच्चों के लिए शिविर आयोजित किया जाएगा। बैठक में उन्होंने डीएसपी को निर्देश दिए कि शिविरों के लिए सुरक्षा व कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिस कर्मचारियों की ड्यूटी लगाएं। डीपीओ को कुपोषण के शिकार बच्चों के लिए पोषाहार की व्यवस्था करने के लिए कहा। शिविरों में पांच साल से अधिक आयु के बच्चों के आधार की त्रुटियां भी ठीक करवाई जाएंगी। उप सिविल सर्जन डॉ. नीलम वर्मा पहचान किए गए सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराकर उन्हें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जोड़ेंगी।
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एसडीएम ने नगर निगम के अधिकारियों से कहा कि जो बच्चे कूड़ा बीनने में लगे हैं, उन्हें एक सुनियोजित तरीके से काम में लगाएं, ताकि वे वेस्ट को बेचकर अपनी आजीविका कमा सकें। सड़क पर बिना किसी सहारे के घूमते बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र बनवाए जाएं और ऐसे बच्चों को नाइट शेल्टर प्रदान किए जाएं। जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि ऐसे बच्चे जिनका स्कूलों मेें दाखिला करवाया गया है, उनकी नियमित प्रगति रिपोर्ट दी जाए और स्लम बस्तियों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापकों की तैनाती की जाए।