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Karnal News: रेत निचोड़ें आओ, पानी पे सख्त पहरे हैं...

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 31 Jul 2024 07:32 AM IST
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Come squeeze the sand, there are strict guards on the water...
- एमडीडी बाल भवन में शाम-ए-गजल में शायरों ने लूटी वाहवाही
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। मन की उड़ान साहित्यिक मंच की ओर से एमडीडी बाल भवन में शाम-ए-गजल का आयोजन किया गया। शायर ओम प्रकाश उल्फत ने कहा, लगी है प्यास तो फिर रेत निचोड़ें, आओ यहां के पानी पे बहुत सख्त पहरे हैं।
रामेश्वर देव ने कहा, वो जिसको मैंने जिंदगी में फूल सौंपे थे, आज उसने अपने शब्दों का खंजर बना डाला...। गुलाब सिंह फक्कड़ ने कहा, नफरत के काबिल भी नहीं मैं, तुम कहते हो प्यार कर लूं...।
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गुरमीत पाढ़ा ने कहा, कोई ख्वाइश तेरी अधूरी न रहे, कि हमारी याद जरूरी न रहे...। मनोज मधुरभाषी ने कहा, अपने सीने में आस लगाए बैठे हैं, ईश्वर के घर में कभी अंधेर नहीं होता...। राजन गांधी ने कहा, दिल की किताब में गुलाब उनका था, रात की नींद में ख्वाब उनका था...। अशोक मलंग ने कहा, टूट गए मलंग सपने मेरे, दुश्मन हो गए अपने मेरे...।
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एमसी योगी ने कहा, प्रेम का खजाना सजाया था मैंने, लोग पैसों के मोहताज निकले...। सुरेंद्र कल्याण ने कहा, मैं जिंदा हूं मगर जिंदगी कहां रखते हैं, कुछ इस वजह से शान है...। कुमारी खुशबू ने कहा, पापा कहते हैं बिना हौसलों के शुरुआत नहीं होती...। सत्या कोहंड ने कहा, कंकड़, मोती, कांटे, फूल, बगान क्या देखना, छोटा-बड़ा मुश्किल-आसान क्या देखना....। आशीष ने कहा, कुछ इस वजह से शान है खुशबू-ए महफिल में हमारी के लोग तो इत्र लगाते हैं, हम रखते हैं तस्वीर तुम्हारी...।
कमलेश कुमार पालीवाल ने कहा, कभी ये अच्छी होती है कभी अच्छी नहीं होती मगर जब हद से बढ़ जाए खुशी अच्छी नहीं होती...। ममता प्रवीण ने कहा, मैं हंसा तो हंसा जी भरकर, मैं रोया तो रोया खुलकर, खुशियां भी पाई हैं मैंने गम भी भरपूर देखा है...। कवि कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा, हवाएं बदली हुई हैं साहब, तभी तो तंगदिली है साहब....।

करमजीत ने कहा, तेरे जान दे रब्ब ही रूसिया, खत्म सी लगती कहानी है...। शुभम कल्याण ने कहा, हर शाम मरता है, फिर भी मौत से डरता है...। रमेश कुमार ने गीत के माध्यम से मन मोह लिया। विशिष्ट अतिथि एमडीडी ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र सिंह मान व अतिथि मारिया डीमा रोमानिया रहीं। मंच पर शायर ओम प्रकाश की पुस्तक शाम-ए-गजल का विमोचन भी किया गया। मंच संचालन रामेश्वर देव ने किया। कार्यक्रम में नीरू खुराना, गोपाल दास व संजीव कुमार आदि मौजूद रहे।
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