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Karnal News: शीतलहर से बढ़ा ठंड का कहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Dec 2024 11:20 PM IST
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Cold wave increases the havoc of cold
करनाल। पहाड़ों पर बर्फबारी के बाद मैदानी इलाकों में ठंड का असर बढ़ रहा है। शीतलहर सता रही है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे आ गया है। क्षेत्र में 22 दिसंबर तक शीतलहर का असर रहेगा। यानी ठंड और बढ़ जाएगी। उसके बाद आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे मगर न्यूनतम तापमान लुढ़केगा। जीटी बेल्ट के विभिन्न जिलों में न्यूनतम तापमान 3 से 6 डिग्री व अधिकतम तापमान 19 से 21 डिग्री सेल्सियस रहेगा।विशेषज्ञों की मानें तो इस वक्त जलवायु पर ला नीना (जलवायु पैटर्न) का असर है। दरअसल, ला नीना और अल नीनो दोनों ही प्रशांत महासागर में होने वाली घटनाएं हैं। जिनका मौसम पर असामान्य रूप से दिखाई देता है। जब दक्षिणी प्रशांत महासागर में पानी ठंडा होने लगता है, तो उसके प्रभाव से पश्चिम की ओर से एशिया व यूरोप की ओर तेज हवाएं चलने लगती हैं।ला नीना का असर दुनिया के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र में अलग-अलग होता है। दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों में भीषण गर्मी, जंगल की आग जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। तो वहीं उत्तर हिस्से के देशों में ज्यादा ठंडी देखने को मिलती है। यही वजह है कि इस बार ठंड का स्पेल लंबा चलने की संभावना है।
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क्षेत्र में कोहरे का असर भी पिछले दिनों से देखने को मिल रहा है। अगले कुछ दिनों तक देर रात्रि और सुबह तक कोहरा छाया रहेगा। इस वजह से फिजा भी बिगड़ रही है। अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, पानीपत, करनाल व कैथल में अचानक एक्यूआई का स्तर 200 से पार पहुंच गया, जोकि स्वास्थ्य के लिए खराब की श्रेणी में आता है।
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अब हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने वाला एक नया पश्चिमी विक्षोभ बनने की संभावना है। इससे पहाड़ों का माैसम बिगड़ेगा और इसका असर अत्याधिक ठंड के रूप में मैदान इलाकों पर दिखेगा।
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फसलों के लिए ठंड अच्छी
कृषि विशेषज्ञ डॉ. गिरीश नागपाल बताते हैं कि चूंकि इस बार जलवायु पर ला नीना का असर है। यह पैटर्न एक शीत अवस्था है, जो कि पूर्वी उष्ण कटिबंधीय प्रशांत महासागर क्षेत्र के असामान्य शीतलन को दर्शाता है। ला नीना से जलवायु संबंधी घटनाएं एक वर्ष से तीन वर्ष तक बनी रह सकती हैं। लिहाजा संभावना जताई जा रही है कि इस बार सर्दी का असर लंबा दिखेगा। जिसका फायदा गेहूं, चना, सरसों व जौं के लिए बहुत अच्छा रह सकता हैं। अधिक सर्दी पड़ने पर फसलों का विकास अच्छा होगा और दाने का वजन बढ़ेगा है।


पशुओं को खुले में न रखें
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि सर्दी से बचाव के लिए पशुओं के लिए भी कमोबेश वही उपाय आवश्यक हैं, जो खुद को सर्दी से बचाने के लिए किए जाते हैं। अधिक ठंड पड़ने पर पशुओं को खुले में न रखें। उनके लिए शेड का इंतजाम करें ताकि सीधे शीतलहर के प्रभाव में न आएं। शेड पूरी तरह बंद न हो, इसमे वेंटिलेशन जरूर होना चाहिए। जहां पशु हों, वहां आग न जलाएं, धुएं के कारण कार्बन डाईऑक्साइड बनती है और ऑक्सीजन कम हो सकती है। पोषक चारा दें और पानी अधिक ठंडा न पिलाएं। पशुओं को चुकंदर आदि एंटी ऑक्सीडेंट वाली चीजें खिलाई जा सकती हैं।

ठंड से बचाव के लिए रखे ध्यान
सर्दी से बचाव के लिए विभिन्न जिलों में उपायुक्तों की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है। इसमें लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सर्दी और शीतलहर से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतें। बुजुर्गों और नवजात शिशुओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। बाहर जाते समय सिर, कान और पैरों को अच्छे से ढककर निकलें और फ्लू, नाक बहना या बंद नाक जैसी समस्याओं का सामना होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए रोजाना कम से कम चार लीटर पानी पीना चाहिए।
फल, सब्जियां और विटामिन सी से भरपूर आहार लेने के साथ-साथ नियमित व्यायाम जरूर करें। गर्म तरल पदार्थ पीने की भी सलाह दी गई है। कई जिलों में पाले का भी असर है। लिहाजा किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से फसलों को बचाने के लिए नियमित सिंचाई करें। पाले का असर विशेष रूप से अगेती सरसों, आलू, फलों और सब्जियों की नर्सरी पर पड़ता है। सर्दी में पशु कम पानी पीते हैं, जिससे पानी की कमी हो सकती है और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसके लिए गुनगुना पानी देने की सलाह दी गई है। पशुओं के लिए ऊर्जा से भरपूर राशन भी दिया जाए।

शीत लहर जैसी स्थिति के बीच प्रदूषण बढ़ने से सेहत पर दोहरी मार पड़ सकती है, क्योंकि सांस की परेशानियां बढ़ने के साथ-साथ हार्ट अटैक, स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। खास तौर पर ब्लड प्रेशर व हृदय रोग के पुराने मरीजों को हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है। लिहाजा सेहत के प्रति सतर्क रहें और खानपान में ठंडी चीजों का इस्तेमाल न करें। सुबह अधिक ठंड और प्रदूषण के बीच सैर के लिए न जाएं।
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