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Karnal News: ठंड और धूप की कमी से बढ़े मिर्गी के मरीज
Sat, 17 Jan 2026 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 17 Jan 2026 02:23 AM IST
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मनोरोग ओपीडी के बाहर मरीजों की कतार
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ठंड और पर्याप्त धूप न मिलने से मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल गतिविधि प्रभावित हो रही हैं। इससे मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में बीते एक सप्ताह में मिर्गी के करीब 25-30 मरीज पहुंचे चुके हैं। रोजाना औसतन 4 से 5 मरीज आ रहे हैं। पुराने मरीजों के साथ-साथ नए मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। आमतौर पर ओपीडी में रोजाना एक या दो मरीज ही आते हैं।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार सर्द मौसम में दिमाग की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। बढ़ती ठंड के कारण शरीर का तापमान गिरता है। इससे ब्रेन में न्यूरॉन्स की इलेक्ट्रिकल फायरिंग असंतुलित हो रही है। न्यूरॉन्स की इलेक्ट्रिकल फायरिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान का तरीका है। इससे मस्तिष्क के कार्य, जैसे सोच, याददाश्त और संवेदनाएं संभव होती हैं। यह असंतुलन मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर रहा है।
धूप कम मिलने से विटामिन-डी की कमी और हार्मोनल बदलाव भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ मामलों में पहली बार मिर्गी के लक्षण सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीज बेहोशी, झटके, अचानक गिर जाने या कुछ देर के लिए याददाश्त कमजोर होने जैसी शिकायत लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
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इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज से भी दौरा
सामान्य तापमान में मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल गतिविधि संतुलित रहती है। शरीर के सभी काम सही ढंग से चलते हैं। मिर्गी के मरीजों में दिमाग का कुछ हिस्सा अधिक संवेदनशील हो जाता है। ठंड, नींद की कमी, तनाव या समय पर दवा नहीं लेने जैसी स्थितियों में अचानक न्यूरॉन्स की तेज और एकसाथ फायरिंग शुरू हो जाती है जिसे इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज कहा जाता है। यह असामान्य गतिविधि मिर्गी के दौरे का कारण बनती है।
लक्षण : बेहोशी, शरीर में झटके, बोलने या देखने में दिक्कत और कुछ देर के लिए याददाश्त कमजोर होना।
ध्यान रखें : मिर्गी से ग्रसित मरीज सर्दियों में विशेष सतर्कता बरतें। नियमित रूप से दवा लें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद नहीं करें। सिर और शरीर को ठंड से बचाकर रखें। पर्याप्त नींद लें। लंबे समय तक भूखे न रहें। किसी भी असामान्य लक्षण या दौरे की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें।
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करनाल। ठंड और पर्याप्त धूप न मिलने से मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल गतिविधि प्रभावित हो रही हैं। इससे मिर्गी के दौरे पड़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल की ओपीडी में बीते एक सप्ताह में मिर्गी के करीब 25-30 मरीज पहुंचे चुके हैं। रोजाना औसतन 4 से 5 मरीज आ रहे हैं। पुराने मरीजों के साथ-साथ नए मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। आमतौर पर ओपीडी में रोजाना एक या दो मरीज ही आते हैं।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य कौशिक के अनुसार सर्द मौसम में दिमाग की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। बढ़ती ठंड के कारण शरीर का तापमान गिरता है। इससे ब्रेन में न्यूरॉन्स की इलेक्ट्रिकल फायरिंग असंतुलित हो रही है। न्यूरॉन्स की इलेक्ट्रिकल फायरिंग सूचनाओं के आदान-प्रदान का तरीका है। इससे मस्तिष्क के कार्य, जैसे सोच, याददाश्त और संवेदनाएं संभव होती हैं। यह असंतुलन मिर्गी के दौरे को ट्रिगर कर रहा है।
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धूप कम मिलने से विटामिन-डी की कमी और हार्मोनल बदलाव भी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ मामलों में पहली बार मिर्गी के लक्षण सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीज बेहोशी, झटके, अचानक गिर जाने या कुछ देर के लिए याददाश्त कमजोर होने जैसी शिकायत लेकर ओपीडी में पहुंच रहे हैं।
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इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज से भी दौरा
सामान्य तापमान में मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल गतिविधि संतुलित रहती है। शरीर के सभी काम सही ढंग से चलते हैं। मिर्गी के मरीजों में दिमाग का कुछ हिस्सा अधिक संवेदनशील हो जाता है। ठंड, नींद की कमी, तनाव या समय पर दवा नहीं लेने जैसी स्थितियों में अचानक न्यूरॉन्स की तेज और एकसाथ फायरिंग शुरू हो जाती है जिसे इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज कहा जाता है। यह असामान्य गतिविधि मिर्गी के दौरे का कारण बनती है।
लक्षण : बेहोशी, शरीर में झटके, बोलने या देखने में दिक्कत और कुछ देर के लिए याददाश्त कमजोर होना।
ध्यान रखें : मिर्गी से ग्रसित मरीज सर्दियों में विशेष सतर्कता बरतें। नियमित रूप से दवा लें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद नहीं करें। सिर और शरीर को ठंड से बचाकर रखें। पर्याप्त नींद लें। लंबे समय तक भूखे न रहें। किसी भी असामान्य लक्षण या दौरे की स्थिति में चिकित्सक से संपर्क करें।