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सीएम कैंप ऑफिस का घेराव नहीं करने दिया तो सड़क पर ही जमाया डेरा
ब्यूरो/अमर उजाला/करनाल
Updated Sun, 25 Dec 2016 12:12 AM IST
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मनोहर लाल खट्टर, हरियाणा के मुख्ययमंत्री
- फोटो : amar ujala
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आंगनबाड़ी केंद्रों में खाना बनाने वाली मदर ग्रुप से जुड़ी महिलाएं मांगों को लेकर शनिवार को सड़कों पर उतर आईं। कर्ण पार्क से प्रदर्शन करते हुए सैकड़ों महिलाएं ओएसडी कार्यालय का घेराव करने पहुंचीं। हालांकि, पुलिस ने उन्हें बैरिकेड लगाकर पहले ही रोक लिया। इस दौरान महिलाओं ने बेरिकेड्स को तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान महिलाओं और पुलिस कर्मचारियों में नोक-झोंक भी हुई। इस दौरान महिलाओं ने वहीं सड़क पर ही डेरा जमा लिया और सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब दो घंटे के जाम के बाद प्रशासन ने सीएम से मंगलवार को उनको समय दिलाया।
इससे पहले, महिलाएं कर्ण पार्क से जुलूस के रूप में शहर की सड़कों से होते हुए नारेबाजी करते हुए कैंप ऑफिस के पास पहुंचीं। यहां पर पहले से ही पुलिस बेरिकेड्स लगाकर तैयार खड़ी थी। जैसे ही महिलाएं पहुंचीं तो उन्होंने बेरिकेड्स हटाने की कोशिश की। एक तरफ पुलिसकर्मी और दूसरी तरफ महिलाएं, दोनों में करीब आधा घंटा तक जोरआजमाईश चली। आखिरकार जब बेरिकेड्स नहीं हटा पाईं तो वहीं पर सड़क पर बैठ गई। इससे पूरा रास्ता जाम हो गया।
नायब तहसीलदार राज बक्श व डीएसपी जितेंद्र गहलावत ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे बार-बार सीएम से मिलने का समय मांगती रही। आखिरकार दोपहर 3 बजे से लेकर 5 बजे तक महिलाएं सड़कों पर ही बैठी रहीं तो प्रशासन ने ओएसडी से बात कर सीएम का समय मांगा। सीएम ने महिलाओं को मिलने के लिए चंडीगढ़ में मंगलवार को बुलाया है। इसके बाद महिलाओं ने सड़क खाली की और नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
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मात्र 200 से 250 मेहनताना में काम कर रही महिलाएं
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष शकुंतला जाखड़ ने कहा कि मदर ग्रुप की महिलाएं आंगनबाड़ी परियोजना में खाना बनाने का काम 9 सालों से कर रही हैं। इसके तहत 1 रुपया 60 पैसे प्रति बच्चा व गर्भवती महिला के हिसाब से राशन बना रही हैं। पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से तीन दिन हेल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप को खाना बनाने के आदेश देकर मदर ग्रुप के काम के दिन भी घटा दिए। इनका मेहनताना महीने में केवल 200-250 रुपये ही बन पाता है। यह मेहनताता भी मिले हुए एक साल से ज्यादा हो चुका है। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव सविता, सचिव अंजु, मदर ग्रुप की संयोजक नूतन प्रकाश, प्रदेश कोषाध्यक्ष राजकुमारी दहिया, रामकली जांगड़ा, चंद्रकला, पार्वती तनेजा, सोतसी, सीटू से जगपाल राणा, जगमाल, हरीश बागी, सर्व कर्मचारी संघ से कृष्ण शर्मा, सुशील गुर्जर, सतपाल सैनी व ओमप्रकाश माटा ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को संबोधित किया।
ये हैं समिति की मांगें
मदर ग्रुप की महिलाओं की मांग है कि तीन दिन हैल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप द्वारा खाना बनाने के आदेश को तुरंत वापिस लिया जाए। पूरा सप्ताह मदर ग्रुप को काम दिया जाए। मेहनताना एक रूपये से बढ़ाकर कम से कम तीन रूपये प्रति बच्चा व गर्भवती महिला किया जाए व पिछले एक साल से रूका हुआ मेहनताना तुंरत प्रभाव से दिया जाए। ईधंन, दलिया दलाई, आटा पिसाई आदि के रेट बाजार भाव के अनुसार रिवाईज किए जाएं। आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं को मनमर्जी से काम से ना हटाया जाए। अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापिस लिया जाए। मदर ग्रुपस की सभी महिलाओं का खाता खोला जाए और मेहनताना सीधा खाते में डाला जाए। मदर ग्रुप की महिलाओं के लिए वर्दी का प्रबंध किया जाए। राशन बनाने वाली वर्कर्स को बीपीएल की श्रेणी में रखा जाए और सभी महिलाओं का बीमा किया जाए, राशन वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण किया जाए। राशन वितरण का काम स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कराया जाए। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 4 प्रतिशत से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया जाए। मदर ग्रुप को सशक्त बनाया जाए और मदर ग्रुपस की महिलाओं को प्रषिक्षण दिया जाए।
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इससे पहले, महिलाएं कर्ण पार्क से जुलूस के रूप में शहर की सड़कों से होते हुए नारेबाजी करते हुए कैंप ऑफिस के पास पहुंचीं। यहां पर पहले से ही पुलिस बेरिकेड्स लगाकर तैयार खड़ी थी। जैसे ही महिलाएं पहुंचीं तो उन्होंने बेरिकेड्स हटाने की कोशिश की। एक तरफ पुलिसकर्मी और दूसरी तरफ महिलाएं, दोनों में करीब आधा घंटा तक जोरआजमाईश चली। आखिरकार जब बेरिकेड्स नहीं हटा पाईं तो वहीं पर सड़क पर बैठ गई। इससे पूरा रास्ता जाम हो गया।
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नायब तहसीलदार राज बक्श व डीएसपी जितेंद्र गहलावत ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे बार-बार सीएम से मिलने का समय मांगती रही। आखिरकार दोपहर 3 बजे से लेकर 5 बजे तक महिलाएं सड़कों पर ही बैठी रहीं तो प्रशासन ने ओएसडी से बात कर सीएम का समय मांगा। सीएम ने महिलाओं को मिलने के लिए चंडीगढ़ में मंगलवार को बुलाया है। इसके बाद महिलाओं ने सड़क खाली की और नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
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मात्र 200 से 250 मेहनताना में काम कर रही महिलाएं
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष शकुंतला जाखड़ ने कहा कि मदर ग्रुप की महिलाएं आंगनबाड़ी परियोजना में खाना बनाने का काम 9 सालों से कर रही हैं। इसके तहत 1 रुपया 60 पैसे प्रति बच्चा व गर्भवती महिला के हिसाब से राशन बना रही हैं। पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से तीन दिन हेल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप को खाना बनाने के आदेश देकर मदर ग्रुप के काम के दिन भी घटा दिए। इनका मेहनताना महीने में केवल 200-250 रुपये ही बन पाता है। यह मेहनताता भी मिले हुए एक साल से ज्यादा हो चुका है। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव सविता, सचिव अंजु, मदर ग्रुप की संयोजक नूतन प्रकाश, प्रदेश कोषाध्यक्ष राजकुमारी दहिया, रामकली जांगड़ा, चंद्रकला, पार्वती तनेजा, सोतसी, सीटू से जगपाल राणा, जगमाल, हरीश बागी, सर्व कर्मचारी संघ से कृष्ण शर्मा, सुशील गुर्जर, सतपाल सैनी व ओमप्रकाश माटा ने प्रदर्शनकारी महिलाओं को संबोधित किया।
ये हैं समिति की मांगें
मदर ग्रुप की महिलाओं की मांग है कि तीन दिन हैल्पर व तीन दिन मदर ग्रुप द्वारा खाना बनाने के आदेश को तुरंत वापिस लिया जाए। पूरा सप्ताह मदर ग्रुप को काम दिया जाए। मेहनताना एक रूपये से बढ़ाकर कम से कम तीन रूपये प्रति बच्चा व गर्भवती महिला किया जाए व पिछले एक साल से रूका हुआ मेहनताना तुंरत प्रभाव से दिया जाए। ईधंन, दलिया दलाई, आटा पिसाई आदि के रेट बाजार भाव के अनुसार रिवाईज किए जाएं। आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं को मनमर्जी से काम से ना हटाया जाए। अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापिस लिया जाए। मदर ग्रुपस की सभी महिलाओं का खाता खोला जाए और मेहनताना सीधा खाते में डाला जाए। मदर ग्रुप की महिलाओं के लिए वर्दी का प्रबंध किया जाए। राशन बनाने वाली वर्कर्स को बीपीएल की श्रेणी में रखा जाए और सभी महिलाओं का बीमा किया जाए, राशन वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण किया जाए। राशन वितरण का काम स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कराया जाए। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 4 प्रतिशत से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया जाए। मदर ग्रुप को सशक्त बनाया जाए और मदर ग्रुपस की महिलाओं को प्रषिक्षण दिया जाए।