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Karnal News: सीएम फ्लाइंग ने खाद बनाने की अवैध फैक्ट्री पकड़ी
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सीएम फ्लाइंग ने खाद बनाने की अवैध फैक्ट्री पकड़ी
- फोटो : सीएम फ्लाइंग ने खाद बनाने की अवैध फैक्ट्री पकड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सीएम फ्लाइंग ने छापा मारकर पिंगली गांव के पास एक अवैध खाद और कीटनाशक बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। टीम ने यहां से 27 तरह के उत्पाद बरामद किए हैं, इनमें अधिकतर को बनाने का लाइसेंस मालिक के पास नहीं था। फैक्ट्री को देवव्रत नामक आरोपी संचालित करता है। रात तक टीम की ओर से कार्रवाई चलती रही। मैन्यूफैक्चरिंग का पता उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित शीशमबाड़ी का लिखा गया था, जब उस पते की पुष्टि की गई तो वहां उस जगह पर एक आश्रम है, जहां किसी प्रकार की दवा निर्माण गतिविधि नहीं होती है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह फैक्ट्री डेढ़ साल से चल रही थी लेकिन संबंधित विभाग ने कार्रवाई नहीं की। दबिश के दौरान फैक्ट्री में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था न वैज्ञानिक टीम और आवश्यक मशीनें। जबकि इन तीनों के बिना खाद की फैक्ट्री का संचालन नहीं किया जा सकता। आरोपी यहां तैयार किए जा रहे उत्पाद पर फर्जी पते और कंपनी के फर्जी लेबल लगा रहे थे।
सीएम फ्लाइंग डीएसपी सुशील कुमार ने बताया कि फैक्ट्री में जो दवाइयां और खाद तैयार हो रही थी, उन पर बतौर मैन्यूफैक्चरिंग पता उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित शीशमबाड़ी का पता लिखा गया था लेकिन जब उस पते की पुष्टि की गई तो उस जगह पर एक आश्रम है। फैक्ट्री के मालिक देवव्रत के पास मैन्यूफेक्चरिंग का एक सामान्य लाइसेंस है, लेकिन उस आधार पर वह 27 तरह के उत्पाद नहीं बना सकता। टीम ने तैयार उत्पादों के नमूने लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। तैयार दवाओं पर कंपनी के लेबल चिपकाकर बेचने की तैयारी कर रहा था।
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करनाल। सीएम फ्लाइंग ने छापा मारकर पिंगली गांव के पास एक अवैध खाद और कीटनाशक बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। टीम ने यहां से 27 तरह के उत्पाद बरामद किए हैं, इनमें अधिकतर को बनाने का लाइसेंस मालिक के पास नहीं था। फैक्ट्री को देवव्रत नामक आरोपी संचालित करता है। रात तक टीम की ओर से कार्रवाई चलती रही। मैन्यूफैक्चरिंग का पता उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित शीशमबाड़ी का लिखा गया था, जब उस पते की पुष्टि की गई तो वहां उस जगह पर एक आश्रम है, जहां किसी प्रकार की दवा निर्माण गतिविधि नहीं होती है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह फैक्ट्री डेढ़ साल से चल रही थी लेकिन संबंधित विभाग ने कार्रवाई नहीं की। दबिश के दौरान फैक्ट्री में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था न वैज्ञानिक टीम और आवश्यक मशीनें। जबकि इन तीनों के बिना खाद की फैक्ट्री का संचालन नहीं किया जा सकता। आरोपी यहां तैयार किए जा रहे उत्पाद पर फर्जी पते और कंपनी के फर्जी लेबल लगा रहे थे।
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सीएम फ्लाइंग डीएसपी सुशील कुमार ने बताया कि फैक्ट्री में जो दवाइयां और खाद तैयार हो रही थी, उन पर बतौर मैन्यूफैक्चरिंग पता उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित शीशमबाड़ी का पता लिखा गया था लेकिन जब उस पते की पुष्टि की गई तो उस जगह पर एक आश्रम है। फैक्ट्री के मालिक देवव्रत के पास मैन्यूफेक्चरिंग का एक सामान्य लाइसेंस है, लेकिन उस आधार पर वह 27 तरह के उत्पाद नहीं बना सकता। टीम ने तैयार उत्पादों के नमूने लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होगी। तैयार दवाओं पर कंपनी के लेबल चिपकाकर बेचने की तैयारी कर रहा था।
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