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सीएम सिटी में सुरक्षित नहीं बचपन
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Fri, 10 Feb 2017 12:36 AM IST
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सीएम सिटी में सुरक्षित नहीं बचपन
- फोटो : Amar Ujala
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सीएम सिटी में बचपन सुरक्षित नहीं है। न केवल बच्चों का मानसिक शोषण किया जा रहा है, बल्कि शारीरिक शोषण के मामले भी सामने आ रहे हैं। बच्चों की मदद के लिए चलाई गई हेल्पलाइन पर प्रतिदिन एक से दो शिकायतें इस तरह की आ रही हैं। बाल श्रम के भी मामले कम नहीं हैं। कई मामलों में बच्चों को घरों में बंधक बनाने और पिटाई के मामले भी सामने आ रहे हैं।
आंकड़े इस बात की भी तसदीक करते हैं कि बच्चों के लिए बनाई गई हेल्पलाइन पर प्रति माह 25 से 30 शिकायतें आती हैं। इनमें ज्यादातर तो बच्चों के साथ मारपीट की शिकायतें होती हैं, तो कई जगहों पर बच्चों से घरों में जबरदस्ती बाल श्रम कराया जाता है।
पिछले छह माह में बच्चों के साथ गलत कार्यों के भी तीन मामले सामने आए। शोषण के मामलों में लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। सबसे ज्यादा मामले पिता के शराब पीकर बच्चों को पीटने के आते हैं।
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गौरतलब है कि पिछले दिनों एक अनाथ आश्रम में भी बच्चों के शोषण के आरोप लगे थे। वहीं सेक्टर-6 स्थित एक घर से बालश्रम कर रहे बच्चों को भी छुड़वाया था। इसके अलावा, अगर पूरे साल की बात करें तो बच्चों के शोषण की शिकायतों का अंबार लग जाता है।
शहर से लापता हो रहे बच्चे
करनाल में एक और गंभीर बात यह है कि बच्चे लापता हो रहे हैं। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि माह में दो से तीन बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। इनमें भी ज्यादा की संख्या प्रवासी लोगों के बच्चों की है। हेल्पलाइन के कोऑर्डिनेटर अमित कुमार ने बताया कि जो बच्चे हमारे पास शिकायत करते हैं, वे अपने माता पिता से परेशान होते हैं, तो कई मामलों में बच्चा माता-पिता से बिछड़ जाने के बाद अकेला रहता है तो वह बाल श्रम करके अपना काम चलता है। बच्चों की तलाश करने को लेकर पुलिस केवल केस दर्ज करके अपना काम समाप्त कर लेती है। हालांकि, पिछले दिनों पुलिस ने मुस्कान अभियान में जरूर बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजा।
कब कितनी शिकायतें आई
माह केस दुर्व्यवहार पेंशन गुमशुदा
अक्टूबर 24 8 13 1
नवंबर 29 10 10 4
दिसंबर 17 9 3 3
जनवरी 27 16 4 1
बच्चों के लिए स्कीमें
जिला बाल संरक्षण सोसायटी की ओर से 18 साल तक के बच्चों के लिए दो स्कीमें चलाई जाती हैं। इनके तहत स्पॉन्सरशिप और फोस्टर केयर नामक योजनाएं हैं। इनके तहत गांवों में रहने वाले बच्चों को आर्थिक मदद की जाती है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के उन बच्चों को पात्र माना जाता है जिनके माता पिता की वार्षिक आय 22 हजार हो और शहरी क्षेत्र में यह राशि 35 हजार निश्चित है। इन योजनाओं के तहत प्रति माह 2 हजार रुपये दिये जाते हैं। शर्त यह है कि 18 साल से नीचे हो और केवल तीन साल के लिए यह मदद दी जाती है।
कोई भी बच्चा ले सकता है मदद
केंद्र सरकार की ओर से 24 घंटे चलाई जाने वाले चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का फायदा 18 साल तक के बच्चे उठा सकते हैं। जिला बाल कल्याण अधिकारी सर्बजीत सिंह ने बताया कि जिला बाल भवन में यह हेल्पलाइन स्थापित की गई है और 24 घंटे यह सेवा उपलब्ध है। इसके लिए दस लोगों का स्टाफ शामिल है। बच्चे अपनी किसी भी तकलीफ को 1098 नंबर हेल्पलाइन पर बता सकते हैं। ऐसे बच्चों की समस्याओं का हल किया जाएगा।
1098 पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है। स्थिति के अनुसार बच्चों को शेल्टर की व्यवस्था कराई जाती है। साथ ही बच्चों के परिजनों की तलाश की जाती है और उन्हें उनके पास भेजा जाता है। पिछले दिनों भी तीन बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजा गया था। बच्चों की देखभाल व सुरक्षा को लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जाता है, साथ ही हेल्पलाइन के बारे में जगह जगह जानकारी दी जाती है।
- सुरेंद्र मान, चेयरमैन, जिला बाल कल्याण समिति
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आंकड़े इस बात की भी तसदीक करते हैं कि बच्चों के लिए बनाई गई हेल्पलाइन पर प्रति माह 25 से 30 शिकायतें आती हैं। इनमें ज्यादातर तो बच्चों के साथ मारपीट की शिकायतें होती हैं, तो कई जगहों पर बच्चों से घरों में जबरदस्ती बाल श्रम कराया जाता है।
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पिछले छह माह में बच्चों के साथ गलत कार्यों के भी तीन मामले सामने आए। शोषण के मामलों में लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। सबसे ज्यादा मामले पिता के शराब पीकर बच्चों को पीटने के आते हैं।
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गौरतलब है कि पिछले दिनों एक अनाथ आश्रम में भी बच्चों के शोषण के आरोप लगे थे। वहीं सेक्टर-6 स्थित एक घर से बालश्रम कर रहे बच्चों को भी छुड़वाया था। इसके अलावा, अगर पूरे साल की बात करें तो बच्चों के शोषण की शिकायतों का अंबार लग जाता है।
शहर से लापता हो रहे बच्चे
करनाल में एक और गंभीर बात यह है कि बच्चे लापता हो रहे हैं। पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि माह में दो से तीन बच्चों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। इनमें भी ज्यादा की संख्या प्रवासी लोगों के बच्चों की है। हेल्पलाइन के कोऑर्डिनेटर अमित कुमार ने बताया कि जो बच्चे हमारे पास शिकायत करते हैं, वे अपने माता पिता से परेशान होते हैं, तो कई मामलों में बच्चा माता-पिता से बिछड़ जाने के बाद अकेला रहता है तो वह बाल श्रम करके अपना काम चलता है। बच्चों की तलाश करने को लेकर पुलिस केवल केस दर्ज करके अपना काम समाप्त कर लेती है। हालांकि, पिछले दिनों पुलिस ने मुस्कान अभियान में जरूर बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजा।
कब कितनी शिकायतें आई
माह केस दुर्व्यवहार पेंशन गुमशुदा
अक्टूबर 24 8 13 1
नवंबर 29 10 10 4
दिसंबर 17 9 3 3
जनवरी 27 16 4 1
बच्चों के लिए स्कीमें
जिला बाल संरक्षण सोसायटी की ओर से 18 साल तक के बच्चों के लिए दो स्कीमें चलाई जाती हैं। इनके तहत स्पॉन्सरशिप और फोस्टर केयर नामक योजनाएं हैं। इनके तहत गांवों में रहने वाले बच्चों को आर्थिक मदद की जाती है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के उन बच्चों को पात्र माना जाता है जिनके माता पिता की वार्षिक आय 22 हजार हो और शहरी क्षेत्र में यह राशि 35 हजार निश्चित है। इन योजनाओं के तहत प्रति माह 2 हजार रुपये दिये जाते हैं। शर्त यह है कि 18 साल से नीचे हो और केवल तीन साल के लिए यह मदद दी जाती है।
कोई भी बच्चा ले सकता है मदद
केंद्र सरकार की ओर से 24 घंटे चलाई जाने वाले चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का फायदा 18 साल तक के बच्चे उठा सकते हैं। जिला बाल कल्याण अधिकारी सर्बजीत सिंह ने बताया कि जिला बाल भवन में यह हेल्पलाइन स्थापित की गई है और 24 घंटे यह सेवा उपलब्ध है। इसके लिए दस लोगों का स्टाफ शामिल है। बच्चे अपनी किसी भी तकलीफ को 1098 नंबर हेल्पलाइन पर बता सकते हैं। ऐसे बच्चों की समस्याओं का हल किया जाएगा।
1098 पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है। स्थिति के अनुसार बच्चों को शेल्टर की व्यवस्था कराई जाती है। साथ ही बच्चों के परिजनों की तलाश की जाती है और उन्हें उनके पास भेजा जाता है। पिछले दिनों भी तीन बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजा गया था। बच्चों की देखभाल व सुरक्षा को लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जाता है, साथ ही हेल्पलाइन के बारे में जगह जगह जानकारी दी जाती है।
- सुरेंद्र मान, चेयरमैन, जिला बाल कल्याण समिति