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ग्राहक तैयार, बाजार और सरकारी विभागों का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Fri, 16 Dec 2016 12:37 AM IST
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ग्राहक तैयार, बाजार और सरकारी विभागों का इंतजार
- फोटो : Amar Ujala
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नोटबंदी के बाद चल रही ऑनलाइन और ई पेमेंट को लेकर ग्राहक तो तैयार हो गए हैं, लेकिन अभी तक न तो बाजार तैयार है और ही सरकारी विभाग। दुकानदारों के कैशलेस न अपनाने के कारण वह ग्राहकों को ऑनलाइन पेमेंट से इनकार कर रहे हैं। कैशलेस को लेकर जहां सरकार व्यापारी और खरीदारों को फायदा होने की बात कर रही है। वहीं, व्यापारी इस व्यवस्था से खुद को घाटे में रहने की बात कह रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि जब वह स्वाइप मशीन से पैसा लेते हैं तो उन्हें इसके लिए उन्हें बैंक को दो से ढाई प्रतिशत तक चार्ज देना पड़ रहा है। दुकानों पर बेचने वाले सामान में उन्हें केवल दो से पांच प्रतिशत तक का मार्जन होता है। कैशलेस सुविधा पर दो से तीन प्रतिशत तक चार्ज देना पड़ गया तो उनकी दुकानों का किराया भी पूरा नहीं होगा। इससे दुकानदार कैशलेस को अपनाने से कतरा रहे हैं।
बाजार में अभी तक केवल 5 प्रतिशत ही ऐसे दुकानें हैं, जो पेटीएम और स्वाइप मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर में लगभग 3300 दुकानें हैं। इनमें से केवल 170 दुकानदार ही ऐसे हैं, जिनकी दुकानों पर कैशलेस शॉपिंग की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अधिकतर दुकानदारों और ग्राहकों को कैशलेस का ज्ञान न होने के कारण दिक्कतें हो रही हैं। वहीं कुछ लोग ऑनलाइन ठगी होने के डर से कैशलेस स्कीम के इस्तेमाल से डर रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने आए रवि, प्रांजल व अमृत कुमार ने बताया कि वे ऑनलाइन पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन दुकानदारों के पास न तो मशीनें हैं और न ही वे पेटीएम यूज कर रहे हैं। दुकानदार नगदी मांगते हैं, इससे परेशानी हो रही है।
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सभी को कैशलेस प्रणाली अपनानी चाहिए, यह सरल है। इसके लिए सभी को जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही स्वाइप मशीनें आ जाएंगी, उसके बाद परेशानी नहीं रहेगी।
- राजेंद्र मल्होत्रा, मैनेजर, लीड बैंक
केमिस्ट को ज्यादा टैक्स लगने का डर
दवाइयों पर रेट ज्यादा होता है, लेकिन इसकी कीमत कम होती है। केमिस्ट दवाइयों को एमआरपी रेट के हिसाब से बेचकर अधिक लाभ कमाते हैं। इससे उन्हें टैक्स कम रेट के हिसाब से अदा करना पड़ता है। कैशलेस के प्रयोग से पूरा रिकार्ड ऑनलाइन होगा। जिस रेट पर वह दवाइयों को बेचते हैं, उसी हिसाब से टैक्स भी देना पड़ेगा। इससे केमिस्ट की बचत में कमी हो जाएगी। अपनी बचत को पहले की तरह बनाए रखने के लिए केमिस्ट ऑनलाइन पेमेंट और स्वाइप मशीनों के इस्तेमाल से कतरा रहे हैं।
सरकारी विभाग नहीं हो पाए ऑनलाइन
प्रशासन लोगों को हर रोज कैशलेस के प्रति जागरूक कर रहा है, लेकिन सरकारी विभागों को अभी तक स्वाइप मशीनों के आने का इंतजार है। जिले के मुख्य विभाग आरटीए, बिजली निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, ई दिशा आदि ऐसे हैं, जहां लोगों को हर रोज काम पड़ते हैं। इन विभागों में से एक दो में तो ऑनलाइन बिल स्वीकार कर लिए जाते हैं, लेकिन स्वाइप मशीन अभी तक भी नहीं है। अधिकारी मशीनों के लिए मांग पहले से भेज चुके हैं। मशीन न मिलने से काम कैश से ही किया जा रहा है।
नहीं मिल रही स्वाइप मशीन
चावला मेडिकल स्टोर के संचालक नवीन चावला ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकान के लिए 28 दिन पहले स्वाइप मशीन का एचडीएफसी बैंक को आर्डर किया था। अभी तक उन्हें बैंक की ओर से मशीन नहीं दी गई है। मशीन न मिलने के कारण वह पेटीएम का प्रयोग कर रहे हैं। पेटीएम से भी 25 हजार रुपये की ट्रांजेक्शन होने के बाद पेटीएम की ओर से मेसेज आया है कि उनकी लिमिट पूरी हो चुकी है। ऐसे में वह कैशलेस को कैसे अपनाएंगे।
दो से ढाई प्रतिशत बैंक चार्ज से नुकसान
व्यापार मंडल के प्रधान कृष्ण लाल तनेजा ने बताया कि कैशलेस का इस्तेमाल करने के लिए दुकानदारों को मशीनें नहीं मिल रहीं हैं। वहीं 5 प्रतिशत लोग कैशलेस का प्रयोग कर रहे हैं। जो लोग कैशलेस का प्रयोग कर रहे हैं, बैंक उनसे 2 से ढाई प्रतिशत चार्ज ले रहे हैं। इससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। इसलिए दुकानदार अपना खर्चा भी नहीं निकाल पाते हैं और वह कैशलेस के इस्तेमाल से डर रहे हैं। इससे दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। सरकार को कैशलेस के प्रयोग पर दुकानदारों को कुछ फायदा देना चाहिए। ताकि वह खुशी से कैशलेस का प्रयोग कर सकें। बाजार में पैसे की कमी के चलते व्यापारी माल नहीं ला पा रहा है।
कैशलेस के साथ देनी चाहिए कोई स्कीम
मोबाइल व्यापारी महेश ने बताया कि सरकार का नोटबंदी का फैसला अच्छा था, लेकिन व्यवस्था ठीक न होने से सरकार की यह योजना फेल हो गई है। लोगों को पैसे की समस्या से उभारने के लिए सरकार कैशलेस व्यवस्था पर जोर दे रही है। सरकार ने यह योजना भी बिना किसी तैयारी के शुरू कर दी है। सरकार को कैशलेस के साथ लोगों को ऐसी स्कीम भी देनी चाहिए, जो लोगों को कैशलेस की ओर आकर्षित करे। जैसे रेलवे टिकट के साथ 10 लाख का बीमा करता है। इसी प्रकार की कोई स्कीम देने से लोग कैशलेस का ज्यादा प्रयोग करेंगे। बिना तैयारी के लागू की गई योजना नोटबंदी की तरह फेल हो सकती है।
बेटे ने दी जानकारी, अब करेंगे कैशलेस का इस्तेमाल
कपड़ा मार्केट स्थित कपड़ा दुकान मालिक मुरारी बत्रा ने बताया कि उन्हें कैशलेस की जानकारी नहीं थी। उनके बेटे ने उन्हें कैशलेस के बारे में जानकारी दी। इससे लगता है कि पैसे की समस्या से कैशलेस से निपटा जा सकता है। अब अधिकतर ग्राहक भी कैशलेस से खरीददारी की मांग कर रहे हैं। इसलिए वह अब स्वाइप मशीन और पेटीएम का प्रयोग करेंगे।
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व्यापारियों का कहना है कि जब वह स्वाइप मशीन से पैसा लेते हैं तो उन्हें इसके लिए उन्हें बैंक को दो से ढाई प्रतिशत तक चार्ज देना पड़ रहा है। दुकानों पर बेचने वाले सामान में उन्हें केवल दो से पांच प्रतिशत तक का मार्जन होता है। कैशलेस सुविधा पर दो से तीन प्रतिशत तक चार्ज देना पड़ गया तो उनकी दुकानों का किराया भी पूरा नहीं होगा। इससे दुकानदार कैशलेस को अपनाने से कतरा रहे हैं।
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बाजार में अभी तक केवल 5 प्रतिशत ही ऐसे दुकानें हैं, जो पेटीएम और स्वाइप मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। शहर में लगभग 3300 दुकानें हैं। इनमें से केवल 170 दुकानदार ही ऐसे हैं, जिनकी दुकानों पर कैशलेस शॉपिंग की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अधिकतर दुकानदारों और ग्राहकों को कैशलेस का ज्ञान न होने के कारण दिक्कतें हो रही हैं। वहीं कुछ लोग ऑनलाइन ठगी होने के डर से कैशलेस स्कीम के इस्तेमाल से डर रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने आए रवि, प्रांजल व अमृत कुमार ने बताया कि वे ऑनलाइन पेमेंट करना चाहते हैं, लेकिन दुकानदारों के पास न तो मशीनें हैं और न ही वे पेटीएम यूज कर रहे हैं। दुकानदार नगदी मांगते हैं, इससे परेशानी हो रही है।
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सभी को कैशलेस प्रणाली अपनानी चाहिए, यह सरल है। इसके लिए सभी को जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही स्वाइप मशीनें आ जाएंगी, उसके बाद परेशानी नहीं रहेगी।
- राजेंद्र मल्होत्रा, मैनेजर, लीड बैंक
केमिस्ट को ज्यादा टैक्स लगने का डर
दवाइयों पर रेट ज्यादा होता है, लेकिन इसकी कीमत कम होती है। केमिस्ट दवाइयों को एमआरपी रेट के हिसाब से बेचकर अधिक लाभ कमाते हैं। इससे उन्हें टैक्स कम रेट के हिसाब से अदा करना पड़ता है। कैशलेस के प्रयोग से पूरा रिकार्ड ऑनलाइन होगा। जिस रेट पर वह दवाइयों को बेचते हैं, उसी हिसाब से टैक्स भी देना पड़ेगा। इससे केमिस्ट की बचत में कमी हो जाएगी। अपनी बचत को पहले की तरह बनाए रखने के लिए केमिस्ट ऑनलाइन पेमेंट और स्वाइप मशीनों के इस्तेमाल से कतरा रहे हैं।
सरकारी विभाग नहीं हो पाए ऑनलाइन
प्रशासन लोगों को हर रोज कैशलेस के प्रति जागरूक कर रहा है, लेकिन सरकारी विभागों को अभी तक स्वाइप मशीनों के आने का इंतजार है। जिले के मुख्य विभाग आरटीए, बिजली निगम, जनस्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, ई दिशा आदि ऐसे हैं, जहां लोगों को हर रोज काम पड़ते हैं। इन विभागों में से एक दो में तो ऑनलाइन बिल स्वीकार कर लिए जाते हैं, लेकिन स्वाइप मशीन अभी तक भी नहीं है। अधिकारी मशीनों के लिए मांग पहले से भेज चुके हैं। मशीन न मिलने से काम कैश से ही किया जा रहा है।
नहीं मिल रही स्वाइप मशीन
चावला मेडिकल स्टोर के संचालक नवीन चावला ने बताया कि उन्होंने अपनी दुकान के लिए 28 दिन पहले स्वाइप मशीन का एचडीएफसी बैंक को आर्डर किया था। अभी तक उन्हें बैंक की ओर से मशीन नहीं दी गई है। मशीन न मिलने के कारण वह पेटीएम का प्रयोग कर रहे हैं। पेटीएम से भी 25 हजार रुपये की ट्रांजेक्शन होने के बाद पेटीएम की ओर से मेसेज आया है कि उनकी लिमिट पूरी हो चुकी है। ऐसे में वह कैशलेस को कैसे अपनाएंगे।
दो से ढाई प्रतिशत बैंक चार्ज से नुकसान
व्यापार मंडल के प्रधान कृष्ण लाल तनेजा ने बताया कि कैशलेस का इस्तेमाल करने के लिए दुकानदारों को मशीनें नहीं मिल रहीं हैं। वहीं 5 प्रतिशत लोग कैशलेस का प्रयोग कर रहे हैं। जो लोग कैशलेस का प्रयोग कर रहे हैं, बैंक उनसे 2 से ढाई प्रतिशत चार्ज ले रहे हैं। इससे व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। इसलिए दुकानदार अपना खर्चा भी नहीं निकाल पाते हैं और वह कैशलेस के इस्तेमाल से डर रहे हैं। इससे दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। सरकार को कैशलेस के प्रयोग पर दुकानदारों को कुछ फायदा देना चाहिए। ताकि वह खुशी से कैशलेस का प्रयोग कर सकें। बाजार में पैसे की कमी के चलते व्यापारी माल नहीं ला पा रहा है।
कैशलेस के साथ देनी चाहिए कोई स्कीम
मोबाइल व्यापारी महेश ने बताया कि सरकार का नोटबंदी का फैसला अच्छा था, लेकिन व्यवस्था ठीक न होने से सरकार की यह योजना फेल हो गई है। लोगों को पैसे की समस्या से उभारने के लिए सरकार कैशलेस व्यवस्था पर जोर दे रही है। सरकार ने यह योजना भी बिना किसी तैयारी के शुरू कर दी है। सरकार को कैशलेस के साथ लोगों को ऐसी स्कीम भी देनी चाहिए, जो लोगों को कैशलेस की ओर आकर्षित करे। जैसे रेलवे टिकट के साथ 10 लाख का बीमा करता है। इसी प्रकार की कोई स्कीम देने से लोग कैशलेस का ज्यादा प्रयोग करेंगे। बिना तैयारी के लागू की गई योजना नोटबंदी की तरह फेल हो सकती है।
बेटे ने दी जानकारी, अब करेंगे कैशलेस का इस्तेमाल
कपड़ा मार्केट स्थित कपड़ा दुकान मालिक मुरारी बत्रा ने बताया कि उन्हें कैशलेस की जानकारी नहीं थी। उनके बेटे ने उन्हें कैशलेस के बारे में जानकारी दी। इससे लगता है कि पैसे की समस्या से कैशलेस से निपटा जा सकता है। अब अधिकतर ग्राहक भी कैशलेस से खरीददारी की मांग कर रहे हैं। इसलिए वह अब स्वाइप मशीन और पेटीएम का प्रयोग करेंगे।