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जिला और सत्र न्यायाधीश बत्रा ने चखा जेल का खाना
कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 22 Nov 2013 12:02 AM IST
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश ललित बत्रा ने वीरवार को जिला जेल के रसोई घर का निरीक्षण किया। उन्होंने इस दौरान यहां पर खाना बनाने वाले कैदियों से बात की और उन्हें पेश आ रही परेशानियों के बारे में उसे बात की।
न्यायाधीश ललित बत्रा ने इस दौरान 500 कैदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनका हाल चाल पूछा, समस्याएं सुनी और समस्याओं का मौके पर समाधान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए।
इतना ही नहीं, उन्होंने कैदियों को उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए भी जेल अधिकारियों को उचित व्यवस्था करवाने बारे कहा। वह वीरवार को जिला जेल में विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से लगाई गई विशेष लोक अदालत की अध्यक्षता करने के लिए पहुंचे थे।
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विशेष लोक अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई करने से पहले न्यायाधीश ललित बत्रा ने कैदियों से व्यक्तिगत रूप से उनका हाल-चाल पूछकर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया।
कई हवालातियों ने पीजीआई में ईलाज के दौरान आ रही दिक्कतों, शूगर औअन्य बीमारियों र की जांच, बुजुर्ग बंदियों व कैदियों ने सर्दी के कारण नहाने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था करने के साथ-साथ कई तरह की अन्य समस्याएं रखीं।
न्यायाधीश ने कानून के अनुसार जेल में समय पूरा होने पर कई लोगों को जमानत की अर्जी डालने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समय पूरा होने के बाद कुछ धाराओं में जमानत याचिका डालनी चाहिए और उनकी जमानत याचिका को दस्तावेजों के अनुसार स्वीकार किया जाएगा।
इसके बाद उन्होंने रसोईघर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने लोक अदालत में लंबित मामलों पर सुनवाई की। सीजेएम सुमित गर्ग ने बताया कि जेल में लगाई गई विशेष लोक अदालत में कुल 46 मामले रखे गए। इनमें से 16 मामलों का मौके पर निपटारा किया गया।
तेरह मामलों में बेल दी गई और तीन मामले अंडरगोन से संबंधित थे। इस विशेष लोक अदालत में एडिशनल सेशन जज रंजना अग्रवाल, एडिशनल सेशन जज अमनदीप दीवान, सीजेएम सुधीर परमार व सीजेएम जरनैल सिंह भी मौजूद थे।
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न्यायाधीश ललित बत्रा ने इस दौरान 500 कैदियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनका हाल चाल पूछा, समस्याएं सुनी और समस्याओं का मौके पर समाधान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए।
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इतना ही नहीं, उन्होंने कैदियों को उचित चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के लिए भी जेल अधिकारियों को उचित व्यवस्था करवाने बारे कहा। वह वीरवार को जिला जेल में विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से लगाई गई विशेष लोक अदालत की अध्यक्षता करने के लिए पहुंचे थे।
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विशेष लोक अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई करने से पहले न्यायाधीश ललित बत्रा ने कैदियों से व्यक्तिगत रूप से उनका हाल-चाल पूछकर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया।
कई हवालातियों ने पीजीआई में ईलाज के दौरान आ रही दिक्कतों, शूगर औअन्य बीमारियों र की जांच, बुजुर्ग बंदियों व कैदियों ने सर्दी के कारण नहाने के लिए गर्म पानी की व्यवस्था करने के साथ-साथ कई तरह की अन्य समस्याएं रखीं।
न्यायाधीश ने कानून के अनुसार जेल में समय पूरा होने पर कई लोगों को जमानत की अर्जी डालने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि समय पूरा होने के बाद कुछ धाराओं में जमानत याचिका डालनी चाहिए और उनकी जमानत याचिका को दस्तावेजों के अनुसार स्वीकार किया जाएगा।
इसके बाद उन्होंने रसोईघर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने लोक अदालत में लंबित मामलों पर सुनवाई की। सीजेएम सुमित गर्ग ने बताया कि जेल में लगाई गई विशेष लोक अदालत में कुल 46 मामले रखे गए। इनमें से 16 मामलों का मौके पर निपटारा किया गया।
तेरह मामलों में बेल दी गई और तीन मामले अंडरगोन से संबंधित थे। इस विशेष लोक अदालत में एडिशनल सेशन जज रंजना अग्रवाल, एडिशनल सेशन जज अमनदीप दीवान, सीजेएम सुधीर परमार व सीजेएम जरनैल सिंह भी मौजूद थे।